लॉक डाउन के दौरान मज़दूरों की हालतें

रेल, बैंक और सफाई कर्मचारियों ने अपनी परिस्थितियां बताईं

24 मार्च को जब देशभर में लॉक डाउन शुरू हुआ, उसके बाद से, अलग-अलग क्षेत्रों के मज़दूरों की हालतें लोगों को देखने में आ रही हैं। एक तरफ है उन मज़दूरों की कठिनाइयां जिनके पास कोई काम नहीं है। दूसरी तरफ है उन मज़दूरों की समस्याएं, जो आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं की सप्लाई को बनाये रखने के लिए काम कर रहे हैं। स्वास्थ्य सेवा कर्मियों और दवाइयों व रोज़मर्रे की चीजों की सप्लाई करने वालों के अलावा, रेलवे, बैंक, टेलिकॉम, बिजली, जल सप्लाई, साफ-सफाई, पुलिस व अन्य सेवाओं के कर्मी भी इनमें शामिल हैं।

मज़दूर एकता लहर ने महाराष्ट्र इलाके के कुछ खास क्षेत्रों के मज़दूरों से फोन पर बातचीत की। यहां हम रेल कर्मियों, बैंक कर्मियों और सफाई कर्मियों की मुश्किल हालतों की एक समीक्षा पेश कर रहे हैं।

रेल कर्मी

भारतीय रेल अनाज, सब्जी, फल, दूध और दवाइयों को उत्पादन के स्थान से देश के कोने-कोने में पहुंचाने में निर्णायक भूमिका अदा कर रहा है। भारतीय रेल तेल, ईंधन और रसोई गैस जगह-जगह पहुंचा रहा है। वह पॉवर प्लांटों को चलाने के लिए कोयला पहुंचाने का काम कर रहा है।

भारतीय रेल के लोको पाइलटों और गार्डों ने हाल में इस मांग को लेकर संघर्ष किया है कि दैनिक बायोमेट्रिक हाजिरी दर्ज़ करने के लिए जो श्वास परख और स्क्रीन पर उंगलियां दबाने की प्रक्रियायें आवश्यक होती थीं, उन्हें रोक दी जाये। ये दोनों प्रक्रियायें इस समय ख़तरनाक मानी जा रही हैं, क्योंकि इनके ज़रिये कोविड-19 का संक्रमण फैल सकता है।

देशभर में रेल मज़दूरों के इन संघर्षों की वजह से, रेलवे बोर्ड ने 28 मार्च को एक सर्कुलर जारी किया, कि लॉक डाउन के दौरान इन दोनों प्रक्रियाओं को रोका जा रहा है। रेल कर्मी अब भी संघर्ष कर रहे हैं, यह सुनिश्चित करने के लिए कि हरेक जोन में रेल अधिकारी इन प्रक्रियाओं को वास्तव में रोक रहे हैं।

एक और समस्या है सुरक्षाकारी मास्क और सैनिटाइजर की नाकाफी सप्लाई। जब-जब क्रू बदलता है, तब-तब नए क्रू के आने से पहले इंजन और गार्ड के कैबिन को सैनिटाइज करना पड़ता है। परन्तु कुछ जोन में ऐसा नहीं किया जा रहा है। लोको पाइलटों और गार्डों को बिना सैनिटाइज किये हुए केबिनों और इंजनों में जाकर काम शुरू करना पड़ता है। अब तक एक लोको पाइलट, गुजरात के पालनपुर में, कोरोना वायरस का ग्रस्त पाया गया है।

रेल की पटरियों की देख-रेख करने वाले मज़दूरों को काफी सारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। आपस में 6 फुट दूरी बनाये रखने की डॉक्टरों की सलाह का यहां सरासर उल्लंघन हो रहा है। पटरियों की देख-रेख करने वाले मज़दूरों को समूह में, पास-पास खड़े होकर, टूटी पटरियों को हटाने और नयी पटरियां लगाने का काम करना पड़ता है। नंदुरबार, महाराष्ट्र में तीन पटरी देखरेख कर्मियों में कोरोना वायरस के लक्षण पाए जाने के बाद, अब उन्हें अलग रखा गया है। इन मज़दूरों के पास अपने-अपने यातायात के साधन नहीं होते हैं, इसलिए अति सीमित सार्वजनिक परिवहन के साधनों के सहारे इन्हें गुजारा करना पड़ रहा है। रात को अक्सर घर पहुंचते-पहुंचते बहुत देर हो जाती है। कुछ जगहों पर स्थानीय निवासी कालोनी के गेट पर ताला लगा देते हैं, जिससे रेल कर्मियों को घर पहुंचने में दिक्कत होती है।

सिग्नलिंग सिस्टम की देखरेख और संचालन करने वाले मज़दूरों का कार्यभार लॉक डाउन के दौरान बहुत बढ़ गया है। उन्हें केबल के नापतोल करने तथा दूसरे प्रकार की देखरेख के काम को करने को कहा जा रहा है। इसके लिए उन्हें रेलवे स्टेशन के रीले रूम को खोलना पड़ता है, जिसमें सैकड़ों-हजारों केबल और सर्किट होते हैं। मज़दूरों का कहना है कि सामान्य देखरेख के काम के लिए इन सुरक्षित कमरों में इन दिनों प्रवेश करना स्वास्थ्य के लिए ख़तरनाक है।

बैंक कर्मी

जब लॉक डाउन शुरू हुआ था, तो बैंक कर्मियों की आधी संख्या को ही काम पर आने को कहा गया था। जन परिवहन के रोक दिए जाने के कारण, उन्हें अपने-अपने साधनों से काम पर पहुंचने को कहा गया था और उन्हें कोई ऐसा आश्वासन नहीं दिया गया था कि इस अतिरिक्त खर्च के लिए कोई मुआवज़ा मिलेगा।

जब केंद्र सरकार ने यह घोषणा की कि 3 अप्रैल से सबके जन धन खाते में 500 रुपये दिए जायेंगे, तब से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में सभी कर्मियों को काम पर आने को कहा गया है।

प्रतिदिन, ग्राहकों के चले जाने के बाद, बैंक के आफिसों को सैनिटाइज नहीं किया जाता है। शहरों में भी बैंक कर्मियों के लिए पर्याप्त मात्रा में मास्क और हैण्ड सैनिटाइजर नहीं हैं। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की 38,000 ग्रामीण शाखाओं में वायरस से सुरक्षा के कोई भी सुरक्षाकारी पहनावे या साधन नहीं हैं।

आजकल, किसी एक समय पर सिर्फ पांच ग्राहकों को बैंक के अन्दर आने दिया जाता है। जहां बैंक पहले सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक काम करते थे, तो अब काम के समय को शाम 4 बजे तक बढ़ा दिया गया है। बैंक कर्मियों के काम का बोझ बढ़ गया है, काम पर तनाव बढ़ गया है और वायरस से संक्रमण का खतरा बढ़ गया है।

सफाई कर्मचारी

मुंबई कोविड-19 से सबसे अधिक प्रभावित शहरों में से एक है। बृहन मुंबई नगर निगम के मज़दूरों की भूमिका इन हालातों में बहुत ही अहम है। अगर किसी बिल्डिंग में कोई कोरोना ग्रस्त मरीज पाया जाता है तो सफाई कर्मियों को फौरन उसे सैनिटाइज करने के लिए भेज दिया जाता है। यह बहुत ख़तरनाक काम होता है। बृहन मुंबई नगर निगम के ठेका मज़दूरों के यूनियन के एक नेता का कहना है कि 6,000 ठेका मज़दूरों का काम नियमित सफाई कर्मियों के काम से कहीं ज्यादा मुश्किल है। सामान्य हालतों में भी, ठेका कर्मियों को ही सबसे कठिन व ख़तरनाक काम को करना पड़ता है। जब किसी बिल्डिंग में कोई कोरोना ग्रस्त मरीज पाया जाता है तो इन ठेका सफाई कर्मियों को ही सबसे पहले अन्दर भेजा जाता है। परन्तु इन्हें मास्क, सैनिटाइजर और सुरक्षाकारी पहनावे नहीं दिए जाते हैं। न ही इन्हें रिस्क अलावेंस मिलता है, जो नियमित कर्मियों को मिलता है, और न ही बीमार पड़ने पर इन्हें कोई स्वास्थ्य बीमा कवरेज मिलता है।

Tag:   

Share Everywhere

Apr 16-30 2020    Struggle for Rights    Rights     2020   

पार्टी के दस्तावेज

8 जनवरी, 2020 की सर्व हिन्द आम हड़ताल को सफल करें!

मज़दूर एकता कमेटी का आह्वान

देश की दिशा पूंजीपतियों की अमीरी को बढ़ा रही है और मज़दूर, किसान व सभी मेहनतकशों को ग़रीबी में धकेल रही है। इस रास्ते का विरोध करने के लिए और देश की दौलत पर अपने अधिकार का दावा करने के लिए यह हड़ताल आयोजित की जा रही है।

मेहनतकशों का है यह नारा, हम हैं इसके मालिक! हिन्दोस्तान हमारा!

thumbपूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है। इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को। यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

(Click thumbnail to download PDF)

5th Congress Documentहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन को यह रिपोर्ट पेश की गई। महाअधिवेशन में इस पर चर्चा की गयी और इसे अपनाया गया। पांचवें महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार, इस रिपोर्ट को सम्पादकीय शोधन के साथ, प्रकाशित किया जा रहा है।

(Click thumbnail to download PDF)

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

(Click thumbnail to download PDF)

यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)

यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब, मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)