सिर्फ मज़दूर वर्ग ही मानव समाज को तबाही से बचा सकता है!

अंतर्राष्ट्रीय मई दिवस ज़िन्दाबाद!

अपील

पूंजीवाद-साम्राज्यवाद के शोषण-दमन और विनाश से आज़ादी के लिए

संघर्ष को तेज़ करें!

मई दिवस 2020 के अवसर पर दिल्ली के ट्रेड यूनियनों का संयुक्त बयान

अंतर्राष्ट्रीय मई दिवस-2020 ऐसे समय पर मनाया जा रहा है जब दुनिया के सभी देशों के मज़दूर कोरोना जैसी वैश्विक महामारी से जूझ रहे हैं। वायरस के संक्रमण तथा उसे रोकने के लिए लागू किये गए कठोर लॉक डाउन का सबसे भयानक असर हर देश के मज़दूरों-मेहनतकशों पर हो रहा है। करोड़ों-करोड़ों मज़दूर अपनी रोज़ी-रोटी खो रहे हैं और अंधकारमय भविष्य का सामना कर रहे हैं। करोड़ों मज़दूर अपने घर-बार और परिजनों से दूर, देश या दुनिया के किसी कोने में शरणार्थियों की तरह बंद पड़े हैं। उन्हें राज्य के वहशी दमन का सामना करना पड़ रहा है।

अस्पतालों में मरीजों का इलाज और सेवा करने में लगे डॉक्टर, नर्स और स्वास्थ्यकर्मी अपनी जान को जोखिम में डालकर, पर्याप्त सुरक्षा सामग्रियों के बिना ही, दिन-रात काम कर रहे हैं। सफाई कर्मी, रेल व सड़क परिवहन कर्मी, बिजली-पानी की सप्लाई और आवश्यक जन सेवाओं के मज़दूर, शिक्षक, आदि अनेक मुश्किलों का सामना करते हुए अपना सामाजिक दायित्व निभा रहे हैं। आशा-आंगनवाड़ी कर्मी घर-घर जाकर स्वास्थ्य सेवा व जानकारी पहुंचा रहे हैं। महामारी और लॉक डाउन की इन हालतों में यह बात बार-बार स्पष्ट हो रही है कि मज़दूर-मेहनतकश ही मानव समाज के असली उत्पादनकर्ता व संचालक हैं और मानव श्रम ही समाज का संचालन करने वाली और समाज की दौलत को पैदा करने वाली प्रमुख शक्ति है।

अंतर्राष्ट्रीय मई दिवस-2020 के अवसर पर इन कठिन हालतों से बहादुरी के साथ संघर्ष कर रहे, दुनिया भर में हमारे तमाम मज़दूर भाइयों और बहनों को लाल सलाम!

आज यह साफ है कि अधिकतम पूंजीवादी राज्य मज़दूर-मेहनतकश जनसमुदाय की रोज़ी-रोटी और सेहत की रक्षा करने में नाक़ामयाब हैं। अपने देश की सरकार समेत, पूंजीपतियों की सेवा में काम करने वाली सभी सरकारें कोरोना वायरस से जूझने वाले मज़दूरों को रक्षा देने में असमर्थ हैं। वे स्वास्थ्य कर्मियों को वायरस से नहीं बचा पा रही हैं। वे अपना रोज़गार खोने वाले मज़दूरों की रक्षा नहीं कर पा रही हैं।

लॉकडाउन के चलते, लोग सड़कों पर उतरकर जन प्रदर्शन नहीं कर सकते हैं, इसलिए इन हालतों का फायदा उठाकर, केन्द्र सरकार के अधिकारी हुकूमत के शोषण-दमन के खि़लाफ़ आवाज़ बुलंद करने वाले अनेक राजनीतिक व सामाजिक कार्यकर्ताओं को “राष्ट्र-विरोधी” करार कर गिरफ़्तार कर रहे हैं। वायरस के डर का फायदा उठाकर, मोबाइल फोन डाटा के ज़रिये लोगों पर निगरानी खूब बढ़ायी जा रही है। अमरीकी इजारेदार कंपनी फेसबुक और हिन्दोस्तानी इजारेदार कंपनी रिलायंस जिओ के बीच एक विशाल सौदा किया गया है, जिसके सहारे दोनों कंपनियां एक-दूसरे का डाटा प्राप्त कर सकेंगी और ई-व्यापार से ज्यादा से ज्यादा मुनाफ़े कमा सकेंगी। इसके साथ-साथ, राज्य प्रशासन, कॉर्पोरेट मीडिया और सोशल मीडिया की पूरी सांठ-गांठ के साथ, कोरोना महामारी के लिए खास मजहब के लोगों को ज़िम्मेदार दर्शाने का झूठा प्रचार फैलाकर, सांप्रदायिक नफ़रत और हिंसा भड़काने में लगा हुआ है। हिन्दोस्तान के मज़दूर राज्य की इन घिनावनी करतूतों की कड़ी भर्त्सना करते हैं!

वर्तमान महामारी के चलते, हिन्दोस्तान की सरकार और दुनिया में पूंजीपतियों की सभी सरकारें बड़े-बड़े कॉर्पोरेट घरानों, बैंकों व वित्त संस्थानों की दौलत को बचाने की चिंता में मग्न हैं। परन्तु करोड़ों-करोड़ों मज़दूर जो बेरोज़गार हो गए हैं या जिन्हें कई महीनों से वेतन नहीं मिल रहे हैं या वेतन में कटौती की जा रही है, किसान जो अपने उत्पादों को बेच न पाने के कारण दिवालिया हो रहे हैं, लाखों-लाखों छोटे उद्योग व धंधे चलाने वाले जो बर्बाद हो रहे हैं इनके लिए सरकार के पास कोई ठोस समाधान नहीं है।

जिन अधिकारों को हमने इतने संघर्षों के बाद जीता है, उन्हें पूंजीपति महामारी के बहाने एक-एक करके छीन लेने की पूरी तैयारी कर रहे हैं। 12 घंटे काम की शिफ्ट और ओवर टाइम पर सीमा की बात चल चुकी है। दिहाड़ी मज़दूरों को अपने घर वापस जाने से रोकने के सरकार के सख़्त क़दमों के पीछे एक कारण यह है कि पूंजीपति चाहते हैं कि भविष्य के दिनों में जब लॉकडाउन ख़त्म होगा और उद्योग फिर चल पड़ेंगे, तो यह सस्ता श्रम उन्हें वहीं के वहीं उपलब्ध हो। ठेकेदारी प्रथा को और विस्तृत करना, “ईज ऑफ़ डूइंग बिजनस” के नाम पर पूंजीपतियों के लिए हायर एंड फायर को ज्यादा आसान बनाना, इन सब पर बड़े-बड़े उद्योगपतियों और सरकार के बीच चर्चा चल रही है। सरकारी मज़दूरों के महंगाई भत्ते में कटौती घोषित की गयी है। श्रम कानूनों में पूंजपतियों द्वारा प्रस्तावित मज़दूर-विरोधी संशोधनों को पीछे के दरवाजे से लाने की भरसक कोशिशें चल रही हैं।

सार्वजनिक कंपनियों और शिक्षा, स्वाथ्य व अन्य आवश्यक सेवाओं के निजीकरण की सारी योजनायें बरकरार हैं। महामारी के कारण देश और दुनिया की अर्थव्यवस्था के वर्तमान संकट से बच निकलने के लिए साम्राज्यवादी ताक़तें और बड़े-बड़े कॉर्पोरेट घराने मज़दूरों-मेहनतकशों के शोषण और लूट को कई गुना बढ़ाने के प्रयास करेंगे। आने वाले दिनों में, मज़दूरों के अधिकारों पर बड़े-बड़े हमले होने वाले हैं।

आज यह बहुत स्पष्ट नज़र आ रहा है कि पूंजीवाद एक बेहद अमानवीय व्यवस्था है। इसका मुख्य लक्ष्य है लाखों-लाखों मेहनतकश लोगों को बर्बाद करके, बड़े-बड़े देशी-विदेशी कॉर्पोरेट घरानों की अमीरी को बढ़ाते रहना। पूंजीपति वर्ग अब समाज को चलाने के क़ाबिल नहीं रहा है। सिर्फ मज़दूर वर्ग ही मानव समाज को तबाही से बचा सकता है!

आइये, मई दिवस-2020 को हम एकजुट होकर एक ऐसे भविष्य के लिए संघर्ष को तेज़ करें, जिसमें अर्थव्यवस्था सभी श्रमिकों की खुशहाली सुनिश्चित करने के लिए काम करेगी, न कि चंद धन्नासेठों की तिजौरियां भरने के लिए। एक ऐसे भविष्य के लिए संघर्ष को तेज़ करें, जिसमें प्रमुख फैसले मज़दूर ले सकेंगे, पूरे समाज के हित के लिए न कि बड़े-बड़े काॅर्पाेरेट घरानों की लालच को पूरा करने के लिए।

आइये, अपने अधिकारों की हिफ़ाज़त के लिए और समाज के उज्ज्वल भविष्य के लिए अपनी आवाज़ को बुलंद करें! विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्देशित सामाजिक सावधानियों का पालन करते हुए, हम अपने-अपने कार्य-स्थलों और निवास-स्थानों पर मई दिवस मनाएं!

 

केन्द्र व दिल्ली सरकार से मांग

  • पूंजीपतियों के दवाब में काम के घंटे बढ़ाना नहीं मंजूर। 8 घंटे काम का नियम लागू रहे।
  • सरकारी कर्मचारी पर मंहगाई भत्ते में व पेंशनर्स पर महंगाई राहत में लगी रोक हटाओ।
  • केन्द्र सरकार श्रम कानून में श्रमिक-विरोधी बदलाव रद्द करे। ट्रेड यूनियन अधिकारों पर हमले बंद करो।
  • धर्म, जाति, नस्ल व लिंग के आधार पर भेदभाव समाप्त करो!
  • कोविड-19 के चलते लॉकडाउन में फंसे सभी मज़दूरों को 7,500 रुपये गुजारा भत्ता प्रतिमाह दो।
  • सभी मज़दूर परिवारों को राशन दो, राशन में सभी सामान दो। आवास की सुविधा दो।
  • सभी स्वास्थ्य व सफाई कर्मियों को सुरक्षा किट व सभी सुविधा एक समान प्रदान करो।
  • लॉकडाउन के दिनों का घरेलू कामगार समेत सभी श्रमिकों का वेतन न काटा जाए, नौकरी से न निकाला जाए।
  • सरकारी संस्थानों के निजीकरण पर रोक लगाओ।

 


 

  • दिल्ली में घोषित न्यूनतम वेतन का मज़दूरों को भुगतान सुनिश्चित करो! दिहाड़ी व पीस रेट के मज़दूरों को एक समान भुगतान करो। मंहगाई के अनुसार 21,000 रुपये वेतन की घोषणा करो।
  • सभी मज़दूरों को सामाजिक सुरक्षा, ईलाज, एक्सीडेंट बीमा, मृत्यु बीमा दो।
  • स्थाई काम में लगे ठेका श्रमिकों की नौकरी पक्की करो। आउटसोर्स कर्मियों को पक्का कर सारी सुविधायें दो।
  • महिला श्रमिकों को समान वेतन व सारी सुविधायें समान दो।
  • स्कीम वर्कर्स को कर्मचारी का दर्ज़ा दो, सारी सुविधायें दो।
  • असंगठित क्षेत्र के सभी मज़दूरों का पंजीकरण कर सारी सुविधायें दो। घरेलू कामगार के लिए कानून बनाओ।
  • सभी निर्माण मज़दूरों का पंजीकरण कर सभी हित लाभ दो।
  • रेहड़ी-पटरी व स्व-रोज़गार करने वालों का दमन बंद करो, पंजीकरण कर सारी सुविधायें दो।

इंटक, एटक, एच.एम.एस., सीटू, ए.आई.यू.टी.यू.सी., सेवा, टी.यू.सी.सी., एक्टू, एल.पी.एफ., यू.टी.यू.सी.,

मज़दूर एकता कमेटी, आई.सी.टी.यू.

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May 1-15 2020    Struggle for Rights    Rights     2020   

पार्टी के दस्तावेज

8 जनवरी, 2020 की सर्व हिन्द आम हड़ताल को सफल करें!

मज़दूर एकता कमेटी का आह्वान

देश की दिशा पूंजीपतियों की अमीरी को बढ़ा रही है और मज़दूर, किसान व सभी मेहनतकशों को ग़रीबी में धकेल रही है। इस रास्ते का विरोध करने के लिए और देश की दौलत पर अपने अधिकार का दावा करने के लिए यह हड़ताल आयोजित की जा रही है।

मेहनतकशों का है यह नारा, हम हैं इसके मालिक! हिन्दोस्तान हमारा!

thumbपूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है। इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को। यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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5th Congress Documentहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन को यह रिपोर्ट पेश की गई। महाअधिवेशन में इस पर चर्चा की गयी और इसे अपनाया गया। पांचवें महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार, इस रिपोर्ट को सम्पादकीय शोधन के साथ, प्रकाशित किया जा रहा है।

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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब, मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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