कोविड-19 की वजह से लॉकडाउन के दौरान सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की हालत 

कोविड-19 की वजह से लॉकडाउन के दौरान सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की हालत पर मज़दूर एकता लहर ने तमिलनाडु गवर्नमेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (टी.एन.जी.डी.ए.) के अध्यक्ष डॉ. के. सेंथिल के साथ बातचीत की। हम उस बातचीत के अंश यहां प्रकाशित कर रहे हैं।

मज़दूर एकता लहर (म.ए.ल) : डॉ. सेंथिल हम आपसे तमिलनाडु में करोना वायरस से पैदा हुई मौजूदा स्थिति के बारे में जानना चाहते हैं।

डॉ. सेंथिल : दुनियाभर में तमाम बिमारियों की तुलना में कोविड-19 (कोरोना वायरस) सबसे अधिक संक्रमणकारी, सबसे अधिक लंबे इन्क्यूबेशन अवधि (15 दिन) वाली, और सबसे लंबे समय तक संक्रमणशील बने रहने वाली बीमारी है। यह बीमारी 28 दिनों तक दूसरे लोगों को संक्रमित कर सकती है। कोरोना वायरस सबसे अधिक संक्रमणशील रहता है। इस वजह से यह वायरस बड़ी तेज़ी से फैल सकता है और समुदाय के बीच बहुत बड़े पैमाने पर संक्रमण फैला सकता है।

बीमारी फैलाने के मौजूदा रुझानों से हमें शक है कि क्या हम स्टेज-2 यानी व्यक्तिगत संक्रमण से आगे बढ़कर स्टेज-3 यानी समुदाय में संक्रमण के स्तर पर तो नहीं पहुंच गए हैं। स्टेज-2 से स्टेज-3 की ओर जाना शायद पूरे राज्य के स्तर पर न हो, लेकिन यह किसी खास इलाक में हो सकता है। लॉकडाउन और अन्य उपायों से हम यह कोशिश कर रहे हैं कि हम किसी तरह से स्टेज-3 पर पहुंचनें से बचे रहें।

तमिलनाडु में कोरोना वायरस संक्रमण के 1600 मामले सामने आये हैं, और हाल ही में कई मरीज आये हैं जिन्हें अनजान स्रोतों से संक्रमण हुआ है। इस हालत में यदि लॉक डाउन हटाया जाता है तो, ऐसे संक्रमित लोगों से समुदाय में वायरस का प्रसार होने की संभावना है, जिनमें संक्रमण के बावजूद उसके लक्षण नज़र नहीं आ रहे हैं। इसके साथ-साथ हमें यह भी सोचना होगा कि यह लॉक डाउन लंबे समय के लिए जारी नहीं रखा जा सकता। इसलिए हम डॉक्टरों का यह मनाना है कि लॉक डाउन को चरणबद्ध तरीके से हटाया जाना चाहिए। यदि ऐसा नहीं किया गया तो यह बीमारी ख़तरनाक स्तर तक पहुंच सकती है।

म.ए.ल. : कोरोना वायरस के प्रसार को हम किस तरह से रोक सकते हैं?

डॉक्टर सेंथिल : इस वायरस की वजह से इटली और अमरीका में मृत्यु दर क्रमशः 12 प्रतिशत और 7 प्रतिशत रही है। दुनिया के स्तर पर यह दर 7 प्रतिशत है। वैसे तो अधिक उम्र के लोगों में मृत्यु दर ज्यादा है, लेकिन इस उम्र में संक्रमण हुए लोगों की तादाद कम है, क्योंकि वे अधिक बाहर नहीं निकलते हैं, और इसलिए उनकी वायरस से संपर्क में आने की संभावना कम है। कम उम्र के लोगों में संक्रमण का प्रमाण अधिक है, जबकि अधिक उम्र के लोगों में मृत्यु दर अधिक है।

तमिलनाडु में सार्स-कोव 2 से संक्रमित लोगों की मृत्यु दर 1.25 प्रतिशत है, जबकि पूरे देश में यह दर 3 प्रतिशत है। चूंकि इस वायरस की वजह से होने वाली मृत्यु दर बहुत अधिक है, इसलिए हम इसे फैलने नहीं दे सकते। इस मक़सद को हासिल करने के लिए हमें “संक्रमण की कड़ी” को तोड़ना होगा, इसके लिए कन्टेनमेंट तरीका अपनाना होगा, और इस वायरस द्वारा अन्य लोगों को संक्रमित होने से बचाना होगा, जैसे की चीन, दक्षिण कोरिया, इत्यादि देशों में किया गया है। जबकि इसका कोई इलाज अभी तक नहीं मिला है, ऐसे हालात में संक्रमित व्यक्ति और उनके संपर्क में आये लोगों को अलग करना होगा, और इस तरह से हम इसके प्रसार को रोक सकते हैं।

म.ए.ल. : इस वायरस से संक्रमित लोगों के लिए किस तरह के इलाज के विकल्प उपलब्ध है?

डॉक्टर सेंथिल : हम हर एक मरीज को जल्दी से जल्दी ठीक करने के लिए सभी विकल्पों का इस्तेमाल कर रहे हैं। भारत सरकार और तमिलनाडु की सरकार द्वारा बताई गयी दवाइयों जैसे हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन का इस्तेमाल सहायक उपचार के लिए जाता है, लेकिन इनसे मरीजों को कोई खास फायदा नहीं होता है। गंभीर मामलों में और अधिक आक्रामक दवाइयों का इस्तेमाल किया जाता है। अब हम जल्दी ही प्लाज्मा थेरेपी को शुरू करने का इंतजार कर रहे हैं।

तोक्युलिजुमाब एक बेहद महंगी दवाई है (करीब 50,000 रुपये) जिसकी ज़रूरत ऐसे मरीजों को होती है जिनकी हालत तेज़ी से खराब हो रही हो। कुछ दुसाध्य मामलों में स्टेरॉयड और एंटी-कोअगुलान्ट्स का भी चुनिंदा मामलों में उपयोग किया जाता है।

इन दवाइयों के अलावा, वेंटीलेटर और ऑक्सीजन प्रमुख चीजें हैं जिनका इस्तेमाल किया जाता है। ऑक्सीजन से बहुत अच्छे परिणाम निकलते हैं। 3-4 दिन ऑक्सीजन देने से 20 प्रतिशत मामलों के मरीज का इलाज हो जाता है। इसलिए सभी अस्पतालों में ऑक्सीजन की पर्याप्त मात्रा में सप्लाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।

हमें और अधिक ऑक्सीजन पाइपलाइन, पॉइंट, रेगुलेटर, ऑक्सीजन सिलिंडर, और ऑक्सीजन जेनेरेटरों की ज़रूरत है। कोविड-19 के मरीजों के लिए हमें साधारण परिस्थिति में लगने वाली मात्रा से 15-20 गुना अधिक ऑक्सीजन की ज़रूरत पड़ सकती है। नए तरह के सहायक इलाज के तरीकों के चलते अब केवल 5 प्रतिशत मरीजों को ही वेंटीलेटर की ज़रूरत पड़ रही है। इसके बावजूद हमें और अधिक वेंटीलेटर की ज़रूरत है।

कोविड के इलाज के लिए प्लाज्मा थेरेपी का उपाय भी सुझाया जा रहा है।

इस वायरस का स्थायी इलाज करने के लिए हमें अपने देश में नयी दवाई या टीके की खोज करने की कोशिश करने की ज़रूरत है।

म.ए.ल. : क्या कोविड-19 का इलाज कर रहे डॉक्टरों को पूरी सुरक्षा मिल रही है?

डॉ. सेंथिल : जहां तक सुरक्षा उपकरणों का सवाल है, हमें सरकार की ओर से पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट (पी.पी.ई.) यह व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण दिया जा रहा है। लेकिन इसकी क्वालिटी के बारे में कुछ शक है। कभी-कभी सही मॉडल और माप इत्यादि की पी.पी.ई. नहीं मिल पाती है। हम उम्मीद करते हैं कि इन सुरक्षा उपकरणों और सहायक सामग्रियों की क्वालिटी सुनिश्चित की जाएगी। कोविड-19 के मरीजों के इलाज में सुरक्षा उपकरण सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इसके साथ समझौता करने से स्वास्थ्य कर्मियों के साथ पूरे देश की स्वास्थ्य व्यवस्था गंभीर खतरे में आ सकती है। हमारी एसोसिएशन ने सरकार से अपील की है कि स्वास्थ्य कर्मियों को यह सुरक्षा उपकरण देने से पहले इनकी क्वालिटी सुनिश्चित की जाये।

दुनियाभर में कोविड-19 की वजह से हो रही मौत में स्वास्थ्य कर्मियों की मौत का प्रतिशत आम लोगों की मौत से दो-गुना है। स्वास्थ्य कर्मी सीधे तौर से कोविड-19 मरीजों के शारीरिक संपर्क में आते हैं, जिससे उन्हें लम्बे समय के लिए अत्याधिक वायरल लोड का सामना करना पड़ता है।

म.ए.ल. : क्या सरकार ने उन सभी स्वास्थ्य कर्मियों को पी.पी.ई. उपकरण दिए हैं, जिनकी कोरोना संक्रमित लोगों के संपर्क में आने की संभावना है? 

डॉ. सेंथिल : मेरे खयाल में जो भी कर्मचारी कोरोना ड्यूटी पर तैनात हैं उन्हें पी.पी.ई. उपकरण दिए गए हैं। लेकिन जैसे कि मैंने पहले बताया है, उनकी डिजाईन और क्वालिटी के बारे में निश्चित तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता।

जो कर्मचारी गैर-कोविड बीमारियों के इलाज के लिए तैनात किये गए हैं, सरकार से अपील की गयी है कि उन्हें भी अगले कुछ दिनों में मास्क जैसे ज़रूरी पी.पी.ई. उपकरण दिए जायें। सरकार ने हमारी अपील को स्वीकार किया है। यदि समुदाय में संक्रमण फैलता है तो इसकी बेहद ज़रूरत होगी।

म.ए.ल. : किस तरह के मास्क का इस्तेमाल करने का सुझाव दिया जा रहा है?

डॉ. सेंथिल : आई.सी.एम.आर. ने कोविड ड्यूटी और बुखार से पीड़ित मरीजों के वार्ड में काम करने वाले स्वास्थ्य कर्मियों के लिए एन-95 मास्क इस्तेमाल करने की सलाह दी है। आई.सी.यू. और गैर-कोविड बीमारियों का इलाज कर रहे कर्मियों के लिए भी एन-95 मास्क इस्तेमाल करने की सलाह दी गयी है। चूंकि सभी निजी अस्पताल बंद कर दिए गए हैं, इसलिए अधिकांश प्रसूति के मामले सरकारी अस्पतालों के पास आ रहे हैं। सभी सरकारी अस्पतालों में इमरजेंसी और गैर-कोविड बीमारियों के मामले सबसे अधिक हैं। लेकिन यदि समुदाय में कोरोना वायरस का संक्रमण फैल जाता है तो हमें सभी मामलों से निपटने के लिए पी.पी.ई. की ज़रूरत पड़ सकती है। लॉक डाउन हटाये जाने से पहले सरकार को सभी डॉक्टरों के लिए पी.पी.ई. सुनिश्चित करनी होगी।

जिस किसी मामले में मरीज की शारीरिक जांच करनी है या मरीज को छूने की ज़रूरत है, ऐसे सभी मामलों में पी.पी.ई. का उपयोग ज़रूरी है। जब तक कोरोना वायरस का प्रभावी इलाज या फिर टीका नहीं मिल जाता, उस समय तक हमें मरीजों की शारीरिक जांच कम से कम करनी चाहिए। जहां तक संभव हो सके डॉक्टरों को मरीज से कम-से-कम एक मीटर की दूरी बनाये रखते हुए इलाज करना चाहिए। इस व्यवहार को देशभर में अपनाया जायेगा।

म.ए.ल. : क्या आप कोविड-19 की ड्यूटी पर काम कर रहे डॉक्टरों के काम के हालात में बारे में विस्तार से बतायेंगे?

डॉ. सेंथिल : चूंकि डॉक्टरों को अपनी ड्यूटी से पहले और बाद में तमाम तरह की तैयारी करनी होती है, इसलिए उन्हें 6 घंटे की शिफ्ट पर तैनात किया जाता है। जब एक डॉक्टर 7 दिन की ड्यूटी पूरी कर लेता है, तो उसे 7 से 14 दिनों के लिए आइसोलेशन में रखा जाता है। चूँकि इस दौरान वह अपने घर या हॉस्टल वापस नहीं जा सकते, और उन्हें आइसोलेशन में रखा जाना ज़रूरी है, इसलिए उन्हें होटलों में रखा जा रहा है। अपनी 7 दिन की ड्यूटी और 21 दिन के आइसोलेशन के दौरान वह अपने परिजनों में किसी से भी मिल नहीं सकते, और उन्हें पूरी तरह से आइसोलेशन में रखा जाता है। चूँकि वह बाहर नहीं जा सकते इसलिए उनके लिए खाने का भी इंतजाम किया जाता है। इसके अलावा उन्हें पूरक दवाइयों के रूप में हाइड्रोक्लोरोक्वीन, विटामिन सी, डी, इत्यादि भी दी जाती है। कुछ जगहों पर उन्हें एच-1 एन-1 का टीका भी लगाया जाता है। आइसोलेशन के 7 दिन बाद उनकी कोरोना वायरस की जांच की जाती है। इन तमाम इंतजामात और सुरक्षा के उपायों के चलते डॉक्टर पूरे आत्मविश्वास के साथ कोरोना वायरस से लड़ रहे हैं, भले ही उनके लिए कई स्रोतों से संक्रमण का बेहद ख़तरा है।

म.ए.ल. : ऐसे समय में डॉक्टरों को किस तरह की सामाजिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है?

डॉ. सेंथिल : दूसरों को संक्रमण से बचाने के लिए, आम तौर से हम खुद को समाज से अलग रख रहे हैं। सही जानकारी के अभाव की वजह से लोग डॉक्टर और नर्स के करीब आने से डर रहे हैं। आप सभी उस घटना के बारे में जानते हैं जब कोरोना संक्रमण से एक डॉक्टर की मौत हो गयी थी और कुछ लोगों ने उनको दफनाये जाने पर आपत्ति जताई थी। हमने इस बात को बड़ी गंभीरता लिया और सरकार से ऐसे मामलों में सुरक्षा देने की मांग की। स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा के लिए सरकार ने एक अध्यादेश पारित किया है। राज्य सरकारों ने भी ऐसे मामलों में अंतिम संस्कार के लिए सुरक्षा देने का वादा किया है।

स्वास्थ्य कर्मियों को कोरोना वायरस से बेहद ख़तरे के बावजूद अभी तक किसी भी डॉक्टर ने कोविड की ड्यूटी पर जाने से इंकार नहीं किया है।

म.ए.ल. : सरकारी डॉक्टरों की और कौन सी मांगे हैं?

डॉ. सेंथिल : पूरे तमिलनाडु में सरकारी अस्पतालों में 18,000 डॉक्टर काम कर रहे हैं। डॉक्टर के वेतन के ढांचे और भत्ते को लेकर हमारी कुछ प्रमुख मांगे हैं। जब हम इन मसलों पर सरकार के साथ चर्चा के अंतिम दौर में थे उसी समय हमारे देश में सार्स कोव2 इस वायरस का आगमन हुआ। इस कठिन परिस्थिति में हम अपनी मांगों को परे रखते हुए कोविड से लड़ने में जुट गए हैं।

म.ए.ल. : क्या आप डॉक्टरों को अपने अन्य स्वास्थ्य कर्मियों से पूरा समर्थन मिल रहा है?

डॉ. सेंथिल : कोविड 19 से लड़ने में हमारी हॉस्पिटल की नर्सें हमारा पूरा सहयोग दे रही हैं। इसके अलावा वे पूरी लगन और ज़िम्मेदारी के साथ और बगैर किसी हिचकिचाहट के, डॉक्टरों के साथ काम कर रही हैं। इसके अलावा हम नर्सिंग असिस्टेंट, सफाई कर्मियों, इत्यादि स्वास्थ्य कर्मियों को इस महामारी के दौरान ली जाने वाली सावधानी के बारे में प्रशिक्षण भी दे रहे हैं।

म.ए.ल. : इस कोरोना वायरस महामारी से हमारे देश की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए क्या सबक मिलते हैं?

डॉ. सेंथिल : स्वास्थ्य क्षेत्र समाज का एक बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र है। देश के सभी लोगों के लिए पर्याप्त मात्र में अच्छी क्वालिटी की स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित करना, यह सरकार की ज़िम्मेदारी है। इस स्वास्थ्य सेवा में रोग-निरोधी स्वास्थ्य सेवा, नयी दवाइयों और टीकों की खोज, इत्यादि शामिल होने चाहिएं। हमारे देश के बजट में स्वास्थ्य सेवा के लिए पर्याप्त धन आवंटित किया जाना चाहिए।

म.ए.ल. : तमिलनाडु के लोगों के लिए आपके क्या सुझाव हैं?

डॉ. सेंथिल : तमिलनाडु के लोग अच्छी तरह से जानते हैं कि इस महामारी से क्या ख़तरे हो सकते हैं। राज्य में कई लोगों का रोज़गार छीन गया है, और इस लॉक डाउन की हालत में उन्हें पर्याप्त सहायता नहीं मिल पा रही है। इन सभी परिस्थितियों और कठिनाइयों के बावजूद वे प्रशासन के साथ सहयोग कर रहे हैं। लोगों की ज़िंदगी बेशक़ीमती है और हम सभी को उनकी सुरक्षा करने के लिए एकजुट होकर काम करना चाहिए।

इस संकट का सामना करने के लिए हम सभी डॉक्टर, नर्स और अन्य स्वास्थ्य कर्मी लगातार काम करते रहेंगे।

म.ए.ल. : इस विषय पर अपने विचार और अनुभव हमारे साथ साँझा करने के लिए हम आपका धन्यवाद करते हैं।

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May 1-15 2020    Struggle for Rights    Rights     2020   

पार्टी के दस्तावेज

8 जनवरी, 2020 की सर्व हिन्द आम हड़ताल को सफल करें!

मज़दूर एकता कमेटी का आह्वान

देश की दिशा पूंजीपतियों की अमीरी को बढ़ा रही है और मज़दूर, किसान व सभी मेहनतकशों को ग़रीबी में धकेल रही है। इस रास्ते का विरोध करने के लिए और देश की दौलत पर अपने अधिकार का दावा करने के लिए यह हड़ताल आयोजित की जा रही है।

मेहनतकशों का है यह नारा, हम हैं इसके मालिक! हिन्दोस्तान हमारा!

thumbपूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है। इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को। यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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5th Congress Documentहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन को यह रिपोर्ट पेश की गई। महाअधिवेशन में इस पर चर्चा की गयी और इसे अपनाया गया। पांचवें महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार, इस रिपोर्ट को सम्पादकीय शोधन के साथ, प्रकाशित किया जा रहा है।

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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब, मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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