मज़दूर एकता कमेटी का आह्वान, 10 मई, 2020

कोरोना महामारी के बहाने मज़दूरों के शोषण को और तेज़ करने की पूंजीपतियों की योजनाओं का जमकर विरोध करें!

मज़दूरों की खुशहाली को सुनिश्चित करने वाले समाज के निर्माण के लिए एकजुट हों!

मज़दूर एकता कमेटी का आह्वान, 10 मई, 2020

कोरोना वायरस महामारी के चलते, हिन्दोस्तान के बड़े-बड़े पूंजीपतियों ने आने वाले दिनों में मजदूरों के शोषण को और तीव्र करने की कई योजनायें घोषित की हैं।

"महामारी से पैदा हुए आर्थिक संकट पर काबू पाने" के नाम पर, केंद्र सरकार और देश के अनेक राज्यों – पंजाब, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, आदि – ने अगले कम से कम तीन सालों के लिए, मौजूदा श्रम कानूनों को रद्द करके, मज़दूरों के शोषण को खूब तेज़ करने के इरादे से, पूंजीपतियों को बहुत सारी छूट देने की घोषणा की है। उद्योगपतियों की मांगों के अनुसार, इन सभी राज्य सरकारों ने फैक्ट्री एक्ट 1948 में संशोधन करके, फैक्ट्रियों में काम के समय को 8 घंटे प्रतिदिन से बढ़ाकर 12 घंटे प्रतिदिन और 48 घंटे प्रति हफ्ते से बढ़ाकर 72 घंटे प्रति हफ्ते तक मज़दूरों से काम करवाने की छूट की घोषणा कर दी है। ठेका मज़दूरी के दायरे को बढ़ाने के लिए ठेका मज़दूरी कानून में और मज़दूरों के हायर एंड फायर को और आसान बनाने के लिए फैक्ट्री क़ानून में तथा औद्योगिक विवाद अधिनियम में संशोधन घोषित किये गए हैं। हड़तालों पर रोक लगाई गयी है। इसके अलावा, उत्तर प्रदेश की सरकार ने एक अध्यादेश पास किया है जिसके ज़रिये मज़दूरों के काम की शर्तों, वेतनों और औद्योगिक विवादों के निपटारे से सम्बंधित तकरीबन सभी कानूनों को तीन सालों के लिए रद्द किया जायेगा। पूंजीपतियों को फैक्ट्रियों के सरकारी इंस्पेक्शन से छूट दी जायेगी। कार्यस्थल पर मज़दूरों के स्वास्थ्य और सुरक्षा पर क़ानून में छूट दी जायेगी। ट्रेड यूनियन एक्ट में संशोधन करके, मज़दूरों के लिए अपने हक़ों का संघर्ष करने वाला यूनियन बनाना और मुश्किल बना दिया जायेगा।

बड़े इजारेदार पूंजीपतियों के हितों के अनुसार, केंद्र सरकार और विभिन्न राज्य सरकारें कोरोना महामारी के लॉकडाउन से कुछ समय पहले से ही, मौजूदा श्रम कानूनों को रद्द करके चार श्रम संहितायें स्थापित करने की कोशिश कर रही थीं। वे इस क़दम के द्वारा मज़दूरों को उन सभी मौलिक अधिकारों और शर्तों व सुरक्षाओं से वंचित करने की कोशिश कर रही थीं जिनके लिए मज़दूरों ने अनेक वर्षों से कठिन संघर्ष किये हैं। परन्तु मज़दूरों और उनके संगठनों के ज़बरदस्त विरोध के कारण उन्हें अपनी कोशिशें कुछ देर के लिए स्थगित करनी पड़ी थीं। अब कोरोना महामारी और लॉकडाउन के दौरान हड़तालों और प्रदर्शनों पर पाबंदी की हालतों का फायदा उठाकर, तथा देश की अर्थव्यवस्था को आर्थिक संकट से बचाने का बहाना देकर, बड़े पूंजीपति केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के ज़रिये, अपने इरादे को जल्दी से जल्दी पूरा करना चाहते हैं।   

कोरोना वायरस महामारी और लॉकडाउन के दौरान पूंजीपतियों के राज्य का मज़दूर-विरोधी रुख़ साफ़-साफ़ देखने में आया है। करोड़ों-करोड़ों मज़दूर रातों-रात अपनी रोज़ी-रोटी खो बैठे। उन्होंने अचानक खुद को और अपने परिवारों को बेघर-बार व बेसहारा और भूखे पेट सोने को मजबूर पाया। जब मज़दूर अपने गाँव और घर वापस जाना चाहे, तो राज्य ने यातायात के सारे साधनों को बंद करके, कठोर पाबंदियां लगाकर, यहाँ तक कि वहशी पुलिस हिंसा का भी प्रयोग करके, उन्हें जानवरों की तरह बंद कर दिया। जब इसके ख़िलाफ़ देश-विदेश में चर्चा होने लगी, तो केंद्र और राज्य सरकारों ने कहा कि मज़दूरों को अपने-अपने घर वापस भेजने के इंतज़ाम किये जायेंगे। परन्तु जैसे ही बड़े पूंजीपतियों ने इस पर आपत्ति दर्ज़ की, कि अगर मज़दूर वापस चले जायेंगे तो कारखानों और निर्माण स्थलों पर काम करने के लिए सस्ते श्रम की कमी होगी, तो सरकारों ने मज़दूरों के वापस जाने के रास्ते में फिर से रुकावटें खड़ी करनी शुरू कर दीं। मज़दूरों को अपना बकाया वेतन दिलाने और पुन: रोज़गार दिलाने की राज्य ने कोई ज़िम्मेदारी नहीं ली है। इससे फिर एक बार साफ़ ज़ाहिर हुआ कि हिन्दोस्तानी राज्य, उसकी केंद्र सरकार और राज्य सरकारें बड़े-बड़े पूंजीपतियों और देशी-विदेशी कॉर्पोरेट घरानों के मुनाफ़ों को सुरक्षित रखने व बढ़ाने के हित में ही काम करती हैं, जबकि समाज के असली उत्पादनकर्ताओं, मज़दूरों की खुशहाली को सुनिश्चित करना हुक्मरानों का उद्देश्य है ही नहीं!

वर्तमान संकट से बच निकलने के लिए, साम्राज्यवादी ताक़तें और बड़े-बड़े कॉर्पोरेट घराने मज़दूर-मेहनतकशों के शोषण और लूट को कई गुना बढ़ाने के प्रयास कर रहे हैं। श्रम कानूनों में जो परिवर्तन किये जा रहे हैं, उनका उद्देश्य है मज़दूरों को अपने सभी मौलिक अधिकारों से वंचित करना, उनके शोषण और गुलामी को बेलगाम बढ़ाना, ताकि बड़े-बड़े पूंजीपतियों के मुनाफ़ों को सुरक्षित रखा जाये व बढ़ाया जाये। हुक्मरान वर्ग चाहता है कि बड़े-बड़े पूंजीपतियों के मुनाफ़ों पर कोई आंच न आये, बेशक उसके लिए मज़दूरों को इंसान लायक ज़िंदगी जीने का अधिकार भी न दिया जाये।

आज यह बहुत स्पष्ट नज़र आ रहा है कि पूंजीवाद एक बेहद अमानवीय व्यवस्था है। इसका मुख्य लक्ष्य है लाखों-लाखों मेहनतकश लोगों को बरबाद करके, बड़े-बड़े देशी-विदेशी कॉर्पोरेट घरानों की अमीरी को बढ़ाते रहना।

हुक्मरान पूंजीपति वर्ग अपने इन क़दमों से यह साफ़ दिखा रहा है कि वह एक समाज-विरोधी और राष्ट्र-विरोधी रास्ते पर चल रहा है।

पूंजीपति वर्ग अब समाज को चलाने के क़ाबिल नहीं रहा है।
सिर्फ मज़दूर वर्ग ही मानव समाज को तबाही से बचा सकता है!

मज़दूर एकता कमेटी सभी ट्रेड युनियनों, मज़दूर संगठनों, महिला संगठनों, नौजवान व छात्र संगठनों और अन्य जन संगठनों से आह्वान करती है कि बड़े पूंजीपति हुक्मरान वर्ग और उसकी सरकारों द्वारा मज़दूर वर्ग पर इन हमलों का जमकर विरोध करें। जैसे-जैसे लॉकडाउन के बाद फैक्ट्रियों में काम शुरू किया जायेगा, वैसे ही हमें एकजुट होकर ज़ोरदार हड़ताल-प्रदर्शन करके इनका विरोध करना होगा, ताकि पूंजीपतियों की इस साज़िश को हम नाकाम कर सकें। इसके साथ-साथ, हमें एकजुट होकर एक ऐसे भविष्य के लिए संघर्ष को तेज़ करना होगा, जिसमें अर्थव्यवस्था सभी श्रमिकों की खुशहाली सुनिश्चित करने के लिए काम करेगी, न कि चंद धन्नासेठों की तिजौरियां भरने के लिए। हमें एक ऐसे भविष्य के लिए संघर्ष को तेज़ करना होगा, जिसमें मज़दूर-मेहनतकश समाज के सारे मुख्य फैसले लेंगे, पूरे समाज के हित के लिए, न कि बड़े-बड़े कॉर्पोरेट घरानों की लालच पूरा करने के लिए।

हम मज़दूर हैं, किसी के गुलाम नहीं!

मज़दूरों के अधिकारों पर हमला मुर्दाबाद!

अपने अधिकारों की हिफ़ाज़त के लिए और समाज के उज्ज्वल भविष्य के लिए अपनी आवाज़ को बुलंद करें!

देश की दौलत को पैदा करने वाले देश के हुक्मरान बनें!

मज़दूर एकता ज़िंदाबाद!

इंक़लाब ज़िंदाबाद

Tag:   

Share Everywhere

May 16-31 2020    Struggle for Rights    Rights     2020   

पार्टी के दस्तावेज

8 जनवरी, 2020 की सर्व हिन्द आम हड़ताल को सफल करें!

मज़दूर एकता कमेटी का आह्वान

देश की दिशा पूंजीपतियों की अमीरी को बढ़ा रही है और मज़दूर, किसान व सभी मेहनतकशों को ग़रीबी में धकेल रही है। इस रास्ते का विरोध करने के लिए और देश की दौलत पर अपने अधिकार का दावा करने के लिए यह हड़ताल आयोजित की जा रही है।

मेहनतकशों का है यह नारा, हम हैं इसके मालिक! हिन्दोस्तान हमारा!

thumbपूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है। इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को। यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

(Click thumbnail to download PDF)

5th Congress Documentहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन को यह रिपोर्ट पेश की गई। महाअधिवेशन में इस पर चर्चा की गयी और इसे अपनाया गया। पांचवें महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार, इस रिपोर्ट को सम्पादकीय शोधन के साथ, प्रकाशित किया जा रहा है।

(Click thumbnail to download PDF)

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

(Click thumbnail to download PDF)

यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)

यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब, मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)


Fatal error: Call to undefined method Drupal::time() in /home/mazdoor8/public_html/cgpid8/modules/backup_migrate/src/Entity/Schedule.php on line 153