सरकारी गोदाम अनाज से भरे होने के बावजूद मज़दूर भूखे हैं

आज करोड़ों अस्थायी और दिहाड़ी मज़दूर, ठेका मज़दूर और अपंजीकृत उद्योगों या सेवाओं में काम करने वाले मज़दूर भूखे मर रहे हैं या भुखमरी के कगार पर हैं। लॉकडाउन ने इन मज़दूरों को उनकी आजीविका के साधनों से वंचित कर दिया है और साथ ही उनकी जमा पूंजी भी अब ख़त्म हो रही है।

केंद्र सरकार ने आने वाले तीन महीनों के लिए हर एक इंसान को 5 किलो मुफ्त अनाज देने की घोषणा की है। लेकिन यह केवल उन्हीं परिवारों को उपलब्ध होगा जो पंजीकृत हैं और जिनके पास राशन कार्ड हैं। दिल्ली की तकरीबन 70 प्रतिशत जनता झुग्गियों में रहती है और उनमें से अधिकांश के पास राशन कार्ड नहीं है। या तो वे कहीं भी पंजीकृत नहीं हैं या फिर उस गांव में पंजीकृत हैं जहां से वे आए हैं।

दिल्ली की राज्य सरकार का दावा है कि उन्होंने दिल्ली में 12 लाख लोगों के बीच मुफ्त खाना वितरित किया है। हालांकि दिल्ली में अस्थायी और दिहाड़ी मज़दूरों की कुल संख्या 30 लाख से भी ज्यादा है।

सबसे चैकाने वाली बात यह है कि देश में खाने की कोई कमी न होने के बावजूद, आज करोड़ों मज़दूर भूखे मर रहे हैं या भुखमरी की कगार पर हैं। केंद्र सरकार के अनाज गोदामों में उपलब्ध चावल और गेहूं पहले से कहीं ज्यादा है।

रिपोर्ट के अनुसार मार्च 2019 तक भारतीय खाद्य निगम और अन्य राज्य एजेंसियों के गोदामों में लगभग 7.3 करोड़ टन चावल और गेहूं जमा थे। मार्च 2020 में यह मात्रा बढ़कर 7.8 करोड़ टन तक पहुंचने का अनुमान है। इसमें साबुत धान को जोड़ने पर ये आंकड़ा 9.8 करोड़ टन हो जाता है। यह मात्रा किसी भी वर्ष में अप्रैल महीने के लिए अधिकारिक रूप से तय की गई न्यूनतम मात्रा, यानी कि 2.1 करोड़ टन बफर स्टॉक से चार गुना ज्यादा है।

सरकारी गोदामों की अनाज रखने की अधिकतम क्षमता 8.4 करोड़ टन है। गोदाम अनाज से पूरी तरह भरे पड़े हैं जबकि इस वर्ष की रबी फसल की खरीद अब तक शुरू भी नहीं हुई है।

अगर 80 प्रतिशत लोगों (लगभग 100 करोड़) को आने वाले 6 महीनों के लिए हर महीने 5 किलो अनाज मुफ्त में दिया जाए तब भी उपलब्ध स्टॉक का आधा यानी कि 3 करोड़ टन अनाज ही ख़त्म होगा।

प्रश्न यह उठता है कि केंद्र सरकार बड़े पैमाने पर अनाज के मुफ्त वितरण का आयोजन क्यों नहीं कर रही है, जिसमें बिना राशन कार्ड वाले और सभी राज्य सरकारें जो सार्वजनिक रसोइयां चला रही हैं वे भी शामिल हों? इसका कारण यह है कि ऐसा करने से आने वाले महीनों में चावल और गेहूं के बाज़ार मूल्य में गिरावट आ जाएगी। यह उन एकाधिकारी पूंजीपतियों को मंजूर नहीं है जो अनाज के सबसे बड़े व्यापारी हैं, जिनमें टाटा, रिलायंस, आदित्य बिरला समूह, फ्यूचर रिटेल समूह, कारगिल, आई.टी.सी. और अन्य विदेशी पूंजीपति कम्पनियां भी शामिल हैं।

एकाधिकारी पूंजीपतियों की अनाज व्यापार से ज्यादा से ज्यादा मुनाफ़ा कमाने की लालच को पूरा करने के लिए, केंद्र सरकार अनुदान प्राप्त सार्वजनिक वितरण में कटौती कर रही है। खरीदे हुए अनाज की तुलना में वितरित किया हुआ अनाज पिछले 4 वर्षों में 103 प्रतिशत से घटकर 52 प्रतिशत हो गया है। (हेंडबुक ऑफ़ स्टेटिस्टिक्स ऑन इंडियन इकोनॉमिक्स (2019); 2019-20 के लिए अनुमान)

यह तथ्य कि इतना ज्यादा  अनाज जमा होने के बावजूद करोड़ों लोगों को भुखमरी का शिकार बनना पड़ रहा है, मौजूदा राज्य की मूलभूत समस्या का पर्दाफ़ाश करता है। मूलभूत समस्या यह है कि अर्थव्यवस्था के साथ राज्य की सभी नीतियों तथा संस्थाओं की दिशा पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने की तरफ है। और यह दिशा लोगों की ज़रूरतों को पूरा करने की या ”सबकों विकास“ प्रदान करने, जैसा कि बार-बार प्रधानमंत्री दोहराते हैं, उसकी दिषा में नहीं है। 

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May 16-31 2020    Struggle for Rights    Rights     2020   

पार्टी के दस्तावेज

8 जनवरी, 2020 की सर्व हिन्द आम हड़ताल को सफल करें!

मज़दूर एकता कमेटी का आह्वान

देश की दिशा पूंजीपतियों की अमीरी को बढ़ा रही है और मज़दूर, किसान व सभी मेहनतकशों को ग़रीबी में धकेल रही है। इस रास्ते का विरोध करने के लिए और देश की दौलत पर अपने अधिकार का दावा करने के लिए यह हड़ताल आयोजित की जा रही है।

मेहनतकशों का है यह नारा, हम हैं इसके मालिक! हिन्दोस्तान हमारा!

thumbपूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है। इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को। यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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5th Congress Documentहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन को यह रिपोर्ट पेश की गई। महाअधिवेशन में इस पर चर्चा की गयी और इसे अपनाया गया। पांचवें महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार, इस रिपोर्ट को सम्पादकीय शोधन के साथ, प्रकाशित किया जा रहा है।

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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब, मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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