विशाखापट्टनम में गैस के रिसाव से एक दर्जन की मौत

आन्ध्र प्रदेश के विशापट्टनम में स्थित एक रसायन कारखाने में जबरदस्त गैस रिसाव हुआ। शहर के वेंकटापुरम इलाके में स्थित एल.जी. पॉलिमर्स इंडिया के कारखाने से 7 मई, 2020 की रात 3 बजे स्टायरीन गैस का तेज़ी से रिसाव हुआ जब लोग नींद में थे। गैस लगने से प्रत्यक्ष रूप से 12 लोगों की मौत हो गयी। अनुमान लगाया गया है कि लगभग 5000 लोग गैस के प्रभाव से बीमार हुए। 500 से 800 लोगों को हस्पतालों में दाखिल करना पड़ा।

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9 मई को आसपास के गांवों से हजारों लोग कारखाने के फाटक पर जमा हो गये। उनकी मांग थी कि कारखाने को तुरंत बंद किया जाये। उन्होंने कंपनी प्रबंधन से जानकारी मांगी कि उस रात क्या हुआ था। परन्तु कंपनी के प्रबंधन ने लोगों की काई परवाह नहीं की और उसने बाहर आकर लोगों को समझाने की कोई कोशिश नहीं की। लोगों ने एल.जी. प्रबंधन के ऐसे घमंडी और असंवेदनशील बर्ताव की भत्र्सना की और सरकार से मांग की कि वह कंपनी के उच्च प्रबंधन के ख़िलाफ़ कड़ी कार्यवाही करे। परन्तु ऐसा करने की जगह, पुलिस ने प्रदर्शन करने वाले लोगों पर ही लाठियां बरसाईं और अनेक लोगों को गिरफ़्तार किया।

आज तक गैस रिसाव के लिये कंपनी में किसी को ज़िम्मेदार नहीं ठहराया गया है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एन.जी.टी.) ने गैस रिसाव के बारे में जांच-पड़ताल करने के लिये एक कमेटी का गठन किया है और 18 मई तक अपने निष्कर्ष देने को कहा है। अब तक जो मालूम है वह यह है कि गैस का रिसाव तब हुआ जब लाकडाऊन के बाद निमायक अनुमति के बिना कारखाने को शुरू करने की तैयारी की जा रही थी। इसके पहले कारखाने के मालिकों ने कारखाने की क्षमता 450 टन प्रतिदिन से बढ़ाकर 650 टन कर दी थी और बाद में पर्यावरण की अनुमति के लिये आवेदन दिया था। राज्य के प्रधिकारियों ने नवम्बर 2019 को कंपनी को सूचना भेजी थी कि उनके पास पर्यावरण की अनुमति नहीं है। अतः कारखाने को शुरू करने की कोशिश स्पष्ट रूप से कानून का उल्लंघन था।

विशाखापट्टनम गैस रिसाव, 36 साल पहले हुए भोपाल गैस रिसाव के सबसे भयानक औद्योगिक हादसे की याद दिलाता है जिसकी वजह से पिछले दशकों में 35,000 से भी अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। अपने देश में एक के बाद एक औद्योगिक हादसे होते रहते हैं पर इनमें लोगों के प्रति कोई जिम्मेदारी नहीं होती है। सुरक्षा के सारे नियमों का खुल्लम-खुल्ला उल्लंघन होता है। सुरक्षा नियमों के उल्लंघनों में लाईसेंस व निगरानी रखने वाले अधिकारियों की पूंजीपति मालिकों के साथ मिलीभगत होती है। आगे, अगर कोई हादसा हो जाता है तो जांच के लिये गठित कमेटियां असलियत में तथ्यों को छुपाने का काम करती हैं।

यह ध्यान देने योग्य है कि केन्द्र सरकार ने हाल ही में एन्वायरंमेंट इम्पेक्ट आसेसमेंट अधिसूचना-2020 का मसौदा तैयार किया है, जिसमें यह प्रस्ताव रखा गया है कि अगर कोई कंपनी पर्यावरण अनुमति का उल्लंघन कर के उत्पादन की प्रक्रिया में या उत्पादन क्षमता में बदलाव लाती है तो उस पर कोई दण्डात्मक कार्यवाई नहीं होगी और सिर्फ कुछ जुर्माना ही लगेगा। हिन्दोस्तान में सुरक्षा नियमों के उल्लंघनों और विभिन्न आपदाओं के पीड़ितों के पुनर्वासान के प्रति एकदम उदासीनता और लापरवाही स्पष्ट रूप से दिखाती है कि हिन्दोस्तानी राज्य मज़दूरों व आम लोगों की हालतों के बारे में अपराधिक तरीके से बेपरवाह है।

एल.जी. एक दक्षिण कोरियाई बहुराष्ट्रीय कंपनी है। विदेशी पूंजी के लिये हिन्दोस्तान को आकर्षक गंतव्य बनाने के नाम पर, हिन्दोस्तानी राज्य ने पर्यावरण सुरक्षा संबंधी व उन सभी कानूनों के उल्लंघनों को बढ़ावा दिया है जो मज़दूरों के लिये सुरक्षित कामस्थल सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बनाये गये हैं।

मज़दूर एकता लहर मेहनतकश लोगों के प्रति राज्य की अपराधिक बेपरवाही की कड़ी निंदा करती है और सरकार से मांग करती है कि एल.जी पॉलिमर्स कारखाने के गैस रिसाव के सभी पीड़ितों को तात्कालिक सहायता दे और उनका पुनर्वासान करे। सभी ट्रेड यूनियनें व मज़दूर संगठन एकजुट होकर कारखानों में पर्यावरण सुरक्षा मानकों व सुरक्षा नियमों के बढ़ते उल्लंघनों के ख़िलाफ़ आवाज़ उठायें।

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पार्टी के दस्तावेज

8 जनवरी, 2020 की सर्व हिन्द आम हड़ताल को सफल करें!

मज़दूर एकता कमेटी का आह्वान

देश की दिशा पूंजीपतियों की अमीरी को बढ़ा रही है और मज़दूर, किसान व सभी मेहनतकशों को ग़रीबी में धकेल रही है। इस रास्ते का विरोध करने के लिए और देश की दौलत पर अपने अधिकार का दावा करने के लिए यह हड़ताल आयोजित की जा रही है।

मेहनतकशों का है यह नारा, हम हैं इसके मालिक! हिन्दोस्तान हमारा!

thumbपूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है। इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को। यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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5th Congress Documentहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन को यह रिपोर्ट पेश की गई। महाअधिवेशन में इस पर चर्चा की गयी और इसे अपनाया गया। पांचवें महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार, इस रिपोर्ट को सम्पादकीय शोधन के साथ, प्रकाशित किया जा रहा है।

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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब, मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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