टिकट चेकिंग कर्मचारियों का रेल प्रशासन के खि़लाफ़ धरना

26 मई को भारतीय रेल के पंडित दीन दयाल उपाध्याय रेलवे स्टेशन (मुगल सराय) पर टिकट चेकिंग कर्मचारियों को रेल प्रशासन के खि़लाफ़ धरना देना पड़ा।

Mughal Sarai

बात उस समय बिगड़ गयी जब स्टेशन निर्देशक ने टिकट चेकिंग कर्मचारियों और अन्य रेल कर्मियों को अपमानित किया और अभद्र शब्दों का प्रयोग किया दरअसल, जो भी श्रमिक स्पेसल रेलें चलाई जा रही हैं, उनमें कार्यरत रेलकर्मी अपने श्रमिक प्रवासी भाइयों-बहनों के लिए भोजन बनाकर उनको खिलाने का प्रबंध दिनों-दिन करते आ रहे हैं। सभी रेलकर्मी आज इस महामारी में ज़रूरत पड़ने पर चैबीस-चैबीस घंटे की ड्यूटी भी पूरी तत्परता से करते हैं। रेलकर्मी अपने चंदे से भोजन सामग्री इकट्ठा करके चाय-पानी तथा खाने की सामग्री का वितरण 4 मई से कर रहे हैं और भोजन बनाकर सभी प्रवासी मज़दूर भाइयों-बहनों को खिला रहे हैं।

परन्तु रेल प्रशासन के आला अधिकारी भूखे-प्यासे मज़दूरों की मदद करने के बजाय, इन रेल कर्मियों को प्रवासी मज़दूरों के सामने अपमानित करते हैं। इस बात से नाराज होकर, सभी टिकट चेकिंग कर्मचारी और अन्य रेल कर्मचारी स्टेशन निर्देशक के ख़िलाफ़ सैकड़ों की तादाद में प्लेटफार्म पर धरने पर बैठ गए। स्टेशन निर्देशक का कहना था कि रेल कर्मी मज़दूरों की मदद न करके अपनी ड्यूटी करें। धरने पर बैठे सभी रेलकर्मियों ने मंडल रेल प्रबंधक पूर्व-मध्य रेल को एक पत्र लिखकर, सभी रेलकर्मियों के हस्ताक्षर लेकर, यह मांग पेश की कि इस तरह का अमानवीय व्यवहार करने वाले निर्देशक को फौरन निलंबित किया जाये और इस महामारी के दरमियान सभी रेल मज़दूरों के साथ उचित व्यवहार किया जाये।

ये मज़दूर रोज़ी-रोटी की खोज में अपने घर से दूर गए थे और अब लॉक डाउन के कारण फंस गए हैं, अपने घर वापस नहीं जा पा रहे हैं। लेकिन केंद्र सरकार ने उनकी समस्याओं को हल करने की अपनी ज़िम्मेदारी नहीं निभाई। इन हालतों में, एक मज़दूर, दूसरे मज़दूर की मदद और सहारे से ही खुद को जीवित रख पा रहा है। केंद्र सरकार, राज्य सरकार, राजनेता और रेल प्रशासन सभी ने इन मज़दूरों के प्रति उदासीनता दिखाई है।

हम मज़दूरों की श्रम शक्ति से ही रेल का निर्माण किया गया है लेकिन हमें अपने घर पहुंचाने के बजाय, रोज़ नए-नए सरकारी फरमान जारी किये जाते हैं। मज़दूर वर्ग रेल प्रशासन से बहुत नाखुश है।

महीनों के इंतजार के बाद भूखे प्यासे मज़दूर जब अपने घर पहुंचने के लिए सफर करते हैं तो रेल कर्मी भाईचारे की भावना के साथ, उन्हें भोजन और पानी से नवाजते हैं। प्रशासन द्वारा नियुक्त अधिकारी रेल कर्मियों और मज़दूरों के खि़लाफ़ अमानवीय व्यवहार करते हैं। यह हम मज़दूर वर्ग को हरगिज मंजूर नहीं है। प्रशासन को फौरी तौर पर मज़दूर भाई-बहनों के हक़ में ठोस क़दम उठाने चाहियें।

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Jun 1-15 2020    Struggle for Rights    Rights     2020   

पार्टी के दस्तावेज

8 जनवरी, 2020 की सर्व हिन्द आम हड़ताल को सफल करें!

मज़दूर एकता कमेटी का आह्वान

देश की दिशा पूंजीपतियों की अमीरी को बढ़ा रही है और मज़दूर, किसान व सभी मेहनतकशों को ग़रीबी में धकेल रही है। इस रास्ते का विरोध करने के लिए और देश की दौलत पर अपने अधिकार का दावा करने के लिए यह हड़ताल आयोजित की जा रही है।

मेहनतकशों का है यह नारा, हम हैं इसके मालिक! हिन्दोस्तान हमारा!

thumbपूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है। इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को। यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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5th Congress Documentहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन को यह रिपोर्ट पेश की गई। महाअधिवेशन में इस पर चर्चा की गयी और इसे अपनाया गया। पांचवें महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार, इस रिपोर्ट को सम्पादकीय शोधन के साथ, प्रकाशित किया जा रहा है।

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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब, मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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