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  • हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति का आह्वान, 26 मार्च, 2020

    कोरोना वायरस, जो बीते कुछ हफ्तों में पूरी दुनिया में फैलता जा रहा है, सभी लोगों की ज़िंदगियों के लिए बहुत बड़ा ख़तरा है। इस वायरस की वजह से, अब तक दुनिया में 21,000 से ज्यादा लोग मर चुके हैं। कई देशों में मृतकों की संख्या बढ़ती जा रही है। हिन्दोस्तान में अब तक सक्रमित व्यक्तियों की संख्या कम है परन्तु अगर वायरस फैल जाता है तो इस का अंजाम तबाहकारी होगा।
  • ‘न्याय दिलाने’ के नाम पर राजकीय आतंकवाद

    12 मार्च को, जब संसद में फरवरी 2020 के अंतिम हफ्ते में दिल्ली में हुई वहशी हिंसा पर चर्चा चल रही थी, तो केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने ऐलान किया कि दिल्ली में जो कुछ हुआ था, वह एक “सुनियोजित साज़िश” थी, जिसकी तहक़ीक़ात की जा रही है।

  • आधुनिक लोकतंत्र का एक असूल यह है कि राज्य किसी भी नागरिक को बिना कारण गिरफ़्तार नहीं कर सकता है। हिन्दोस्तानी राज्य इस असूल का सरासर हनन करता है। हिन्दोस्तानी संविधान विधायिकी को निवारक निरोध के कानून लागू करने की पूरी इज़ाज़त देता है। सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम (ए.एफ.एस.पी.ए.), राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) और अवैध गतिविधि निरोधक अधिनियम (यू.ए.पी.ए.) कुछ ऐसे केन्द्रीय कानूनों के उदाहरण हैं, जो सरकारी सुरक्षा बलों को मनमानी से लोगों को गिरफ़्तार करने और बंद करने की पूरी छूट देते हैं। राज्यों के स्तर पर भी तमाम ऐसे कानून हैं, जैसे कि जन सुरक्षा कानून और संगठित अपराधों को निशाना बनाने का दावा करने वाले कानून। इन सभी कानूनों को निवारक निरोध के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
  • भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की शहादत की वर्षगाँठ पर हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट गदर पार्टी की केन्द्रीय समिति का आह्वान, 23 मार्च, 2020

    23 मार्च, 2020 को भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की शहादत के हुए, 90वां साल शुरू होगा। बरतानवी हुक्मरानों ने उन तीनों नौजवानों को इसलिए फांसी पर चढ़ाया था क्योंकि उन्होंने एक नए हिन्दोस्तान के लिए संघर्ष करने की जुर्रत की थी, जो उपनिवेशवादी गुलामी और हर प्रकार के शोषण और दमन से मुक्त होगा। उस समय जब पूरे उपमहाद्वीप में उपनिवेशवाद-विरोधी, आजादी का संघर्ष चल रहा था, तो वे हिन्दोस्तान के नौजवानों के सर्वोत्तम प्रतीक थे। 

  • इस हिंसा के लिए हुक्मरान ज़िम्मेदार

    उत्तर-पूर्व दिल्ली में सांप्रदायिक हिंसा के बाद से पिछले दो सप्ताह में हुक्मरानों ने इसकी हक़ीक़त को छुपाने की पूरी कोशिश की है। मीडिया और सोशल मीडिया के द्वारा तमाम तरह की कहानियां फैलाई जा रही हैं, जहां इस हिंसा के लिए एक या दूसरे समुदाय को या और लोगों को ज़िम्मेदार बताया जा रहा है।

  • International Women's Day 2020 Delhi

    8 मार्च, 2020 को करीब 20 संगठनों की महिला कार्यकर्ताओं के साथ अन्य कार्यकर्ताओं, स्कूलों और विश्वविद्यालयों के छात्रों, सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं, वकीलों, नर्सों, शिक्षकों, गृहिणियों और विभिन्न व्यवसायों से महिलाओं ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की एक जोशपूर्ण रैली में हिस्सा लिया।

  • कब्ज़ाकारी सेना के ख़िलाफ़ अफ़गानिस्तान के लोगों के बहादुर संघर्ष को सलाम

    29 फरवरी को, अमरीकी सरकार और तालिबान के प्रतिनिधियों ने क़तर के दोहा में एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। तालिबान अफ़गानी लोगों के उन संगठनों में से एक है जो अपने देश पर अमरीकी साम्राज्यवादी कब्जे़ के ख़िलाफ़ लगभग दो दशकों से लड़ता आ रहा है।

  • विश्व और हिन्दोस्तान के स्तर पर पूंजीवाद गहरे संकट में है। इस कारण सभी मुख्य अंतर्विरोध और तीव्र हो रहे हैं। विभिन्न राजनीतिक नेताओं द्वारा बार-बार किये जा रहे दावों के बावजूद कि अर्थव्यवस्था का पुनरुत्थान नजदीक है, उत्पादक गतिविधियों ने अभी वह ज़ोर नहीं पकड़ा है जो 2008 के संकट से पूर्व था
  • धारा 144 - एक बस्तीवादी अवशेष जिसे तुरंत हटाया जाना चाहिए!

    केंद्र और राज्य सरकारें बिना किसी जांच पड़ताल के लोगों को शांतिपूर्वक सभा करने के बुनियादी अधिकार से वंचित करने के लिए लगातार भारतीय दंड संहिता (आई.पी.सी.) की धारा का इस्तेमाल करती आई हैं।

  • पाकिस्तान में हिंदू धर्म के लोगों ने होली का त्योहार नहीं मनाया

    8 मार्च, 2020 को पाकिस्तान में रहने वाले हिन्दू लोगों ने उत्तर पूर्व दिल्ली की हिंसा में पीड़ित मुसलमान लोगों से सहानुभूति में एक विरोध प्रदर्शन आयोजित किया। पिछले महीने राज्य द्वारा आयोजित साम्प्रदायिक हिंसा में दिल्ली के मुसलमान लोगों को निशाना बनाया गया था। उन्होंने घोषणा की कि मुसलमान भाइयों पर हिन्दोस्तान में हिंसा का विरोध करने के लिये वे इस साल 10 मार्च को होली का त्यौहार नहीं मनायेंगे।

  • औद्योगिक और कृषि मज़दूरों, किसानों, नौजवानों और छात्रों के कई संगठनों से जुड़े हजारों लोगों ने 10 मार्च को लुधियाना में जालंधर बाई-पास पर एक विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने सी.ए.ए., एन.आर.सी. और एन.पी.आर. तथा हाल में दिल्ली में मुसलमानों पर राज्य द्वारा आयोजित हिंसा का विरोध किया।

  • 2 मार्च, 2020 को दिल्ली की ट्रेड यूनियनों ने केन्द्र सरकार द्वारा पेश किए गए बजट के विरोध में कनाट प्लेस स्थित बैंक ऑफ़ बड़ौदा से लेकर जंतर-मंतर तक जुलूस निकाला। यह जुलूस लाल बैनरों और झंडों से सजा हुआ था।

  • हम नयी पीढ़ी को ढालते हैं पर हमारा खुद का भविष्य अंधकार में है

    राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के सरकारी स्कूलों में काम करने वाले अतिथि शिक्षक पिछले कई वर्षों से नियमित नौकरी और बेहतर काम की शर्तों के लिये संघर्ष करते आये हैं। वर्तमान में 20,000 से भी अधिक अतिथि शिक्षक राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के विभिन्न स्कूलों में काम करते हैं।

  • हरियाणा के कुरुक्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर जन संघर्ष मंच हरियाणा ने जुलूस निकाला और जन सभा की। इस जुलूस में सैकड़ों महिलाओं ने भाग लिया। सभी लोग कुरुक्षेत्र के थानेसर रेलवे स्टेशन पर इकट्ठा हुये ...

  • 6 मार्च को सैकड़ों की तादाद में वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट से चलते हुए जंतर-मंतर तक एक विरोध प्रदर्शन आयोजित किया। फरवरी के अंतिम सप्ताह में दिल्ली में राज्य द्वारा आयोजित हिंसा के खि़लाफ़ वकीलों ने यह प्रदर्शन किया। इस हिंसा में खास तौर से मुस्लिम समुदाय के लोगों को निशाना बनाया गया था ...

  • 12 फरवरी, 2020 को आल इंडिया गाड्र्स कौंसिल (ए.आई.जी.सी.) की ई.सी.आर. जोनल सभा धनबाद डिवीज़न की गोमोह लाबी में संपन्न हुई।

पार्टी के दस्तावेज

8 जनवरी, 2020 की सर्व हिन्द आम हड़ताल को सफल करें!

मज़दूर एकता कमेटी का आह्वान

देश की दिशा पूंजीपतियों की अमीरी को बढ़ा रही है और मज़दूर, किसान व सभी मेहनतकशों को ग़रीबी में धकेल रही है। इस रास्ते का विरोध करने के लिए और देश की दौलत पर अपने अधिकार का दावा करने के लिए यह हड़ताल आयोजित की जा रही है।

मेहनतकशों का है यह नारा, हम हैं इसके मालिक! हिन्दोस्तान हमारा!

thumbपूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है। इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को। यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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5th Congress Documentहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन को यह रिपोर्ट पेश की गई। महाअधिवेशन में इस पर चर्चा की गयी और इसे अपनाया गया। पांचवें महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार, इस रिपोर्ट को सम्पादकीय शोधन के साथ, प्रकाशित किया जा रहा है।

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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब, मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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