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  • श्री लंका में 21 अप्रैल को हुए क्रमिक बम विस्फोट हाल में हुए भयानक हत्याकांडों में से एक था समाचारों के अनुसार, कम से कम 215 लोग मारे गए हैं और 450 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं।

    बड़े सोचे-समझे तरीके से, ईसाई लोगों को इन बम विस्फोटों का निशाना बनाया गया। 21 अप्रैल ईस्टर रविवार था, जिस दिन पर श्री लंका और सारी दुनिया में, ईसाई श्रद्धालू गिरजाघरों में प्रार्थना के लिए एकत्रित होते हैं। ठीक उस समय जब गिरजाघरों में प्रार्थना चल रही थी, राजधानी कोलोंबो और पूर्वी शहर बट्टीकालोया में कम से कम 4 गिरजाघरों में बम विस्फोट हुए। श्री लंका की राजधानी के 3 प्रमुख होटलों में भी बम विस्फोट हुए। श्री लंका के सरकारी अधिकारियों के अनुसार, इस कायरतापूर्ण हमले में मरने वालों में से कम से कम 35 लोग विदेशी थे, जिनमें 3 हिन्दोस्तानी थे।

  • हिन्दोस्तान के नव-निर्माण के संघर्ष को आगे बढ़ायें!

    हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति का आह्वान, 27 मार्च, 2019

    साथियों और दोस्तों, 11 अप्रैल से 19 मई तक, लोकसभा के चुनाव होंगे। अनुमान लगाया जा रहा है कि यह दुनिया के सबसे महंगे चुनावों में से एक है। टाटा, बिरला, अंबानी और दूसरी हिन्दोस्तानी इजारेदार पूंजीवादी कंपनियां तथा विदेशी पूंजीवादी कंपनियां चुनाव मैदान में खड़ी मुख्य पार्टियों के अभियानों का समर्थन करने के लिए ढेर सारे पैसे डाल रही हैं।

    हर राज्य में और पूरे हिन्दोस्तान में, पूंजीवादी पार्टियों के दो-तीन प्रतिस्पर्धी गठबंधन लोगों से वोट मांग रहे हैं। इन पार्टियों के बीते दिनों के काम से यह स्पष्ट है कि इन्होंने हमेशा ही उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम को लागू किया है। इन्हीं के प्रवक्ता टी.वी. चैनलों पर बार-बार दिखते हैं। अन्य पार्टियों और निर्दलीय उम्मीदवारों को पूरी तरह हाशिये पर रखा जाता है। 

  • 100 साल पहले, 13 अप्रैल, 1919 को, हमारे लोगों पर बरतानवी उपनिवेशवादी शासकों द्वारा किये गए अत्याचारों के सिलसिले में एक बेहद दर्दनाक काण्ड हुआ था। उस दिन, हजारों निहत्थे लोग एक बंद जगह पर, बरतानवी हुक्मरानों के जन-विरोधी क़दमों की खि़लाफ़त कर रहे थे। बरतानवी अफ़सर डायर की अगुवाई में एक सेना ने उन पर बेरहमी से गोलियां बरसाई थीं। वह काण्ड बदनाम जलियांवाला बाग का हत्याकांड था। 1857 के बाद, बरतानवी उपनिवेशवादी हुकूमत की बर्बरता उस काण्ड के साथ नयी ऊंचाइयों तक पहुंच गयी। उससे कुछ ही समय पहले, उपनिवेशवादी हुक्मरानों ने ऐलान किया था कि वे हिन्दोस्तानी लोगों को अपनी “ज़िम्मेदार सरकार” बनाने की इजाज़त दे

  • पाकिस्तान ने जब भारतीय वायु सेना के गिरफ़्तार किये गए पायलट को रिहा कर दिया, तो उसके कुछ ही क्षण बाद, प्रधानमंत्री मोदी ने ऐलान किया था कि “यह तो बस एक पायलट प्रोजेक्ट पूरा हुआ है। असली प्रोजेक्ट तो अब शुरू होगा। इससे पहले वाला तो सिर्फ प्रैक्टिस के लिए था।”
  • thumbदुनियाभर में अनेक स्थानों पर जंग के विरोध में और हिन्दोस्तान व पाकिस्तान के बीच मैत्री के समर्थन में लोग बहादुरी से खड़े हुए। कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी उन्हें सलाम करती है। पेश है एक संक्षिप्त रिपोर्ट

  • शासक वर्ग और उसके द्वारा प्रशिक्षित राजनीतिक विद्वान और नेतागण इस झूठ को हमेशा दोहराते हैं कि वर्तमान राजनीतिक प्रक्रिया और व्यवस्था का कोई विकल्प संभव ही नहीं है। वे अमरीकी और दूसरे साम्राज्यवादी राज्यों के इस मंत्र को हमेशा दोहराते रहते हैं कि बहुदलीय प्रतिनिधित्ववादी लोकतंत्र के अलावा इससे बेहतर और कोई राजनीतिक व्यवस्था हो ही नहीं सकती। लेकिन हक़ीक़त तो यह है कि दुनिया के अधिकांश लोग इस व्यवस्था और राजनीतिक प्रक्रिया से संतुष्ट नहीं हैं।

  • thumbलगभग 20 अलग-अलग संगठनों से सैकड़ों महिलाओं, पुरुषों और नौजवानों, बड़ी संख्या में शिक्षकों, स्वास्थ्य कर्मचारियों, वकीलों और अलग-अलग क्षेत्रों के कार्यकर्ताओं ने 8 मार्च, अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर, नई दिल्ली में मंडी हाउस से जंतर-मंतर तक प्रदर्शन किया। उन्होंने अपने-अपने संगठनों के बैनरों के साथ जुलूस निकाला। अपनी मांगों के नारों से सुसज्जित बैनरों और प्लाकार्डों को हाथों में लिए, सभी कार्यकर्ताओं ने सुनियोजित तरीके से प्रस्थान किया।

  • thumbसाम्राज्यवादी यह तर्क देते हैं कि वेनेजुएला के मौजूदा संकट के लिए समाजवाद और मादुरो की गैर-जनतान्त्रिक सरकार ज़िम्मेदार है। लेकिन यह सरासर झूठ और फरेब है, क्योंकि यह साफ़ नज़र आता है कि असली समस्या अमरीकी साम्राज्यवाद द्वारा वेनेजुएला के मसलों में दखलंदाज़ी है। यह केवल अभी की बात नहीं है, बल्कि कई दशकों से ऐसा चलता आ रहा है और साम्राज्यवादियों की दखलंदाज़ी बार-बार वेनेजुएला को संकट की कगार पर खड़ा कर देती है।

  • हाल में यूरोप के बहुत से बड़े बैंकों को निगरानी में लाया गया है क्योंकि इन पर मनी लांडरिंग, यानी कि काले धन को सफेद करने का या अर्थशोधन करने का संदेह है। डॅन्स्के बैंक जो डेनमार्क का सबसे बड़ा बैंक है, उसे मानना पड़ा है कि आंतरिक जांच पड़ताल में उसकी एस्टोनिया शाखा में बहुत से संदेहजनक खाते और लेन-देन के मामले सामने आये हैं।
  • हमारे देश के सबसे बड़े गैर-बैंक वित्तीय संस्थानों में से एक इन्फ्रास्ट्रक्चर लीजिंग एंड फाइनेंशियल सर्विसेज़ (आई.एल. एंड एफ.एस.) है। आई.एल. एंड एफ.एस. का आर्थिक संकट लाखों मज़दूरों और सैनिकों की सेवानिवृत्ति निधि पर भारी नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है।
  • 6 मार्च, 2019 को देशभर की केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने दिल्ली में राष्ट्रीय अधिवेशन आयोजित किया और देशभर के मज़दूरों को संबोधित किया। आगामी आम चुनावों से ठीक पहले इन ट्रेड यूनियनों ने कई अन्य मांगों सहित सभी मज़दूरों के लिए एक राष्ट्रीय न्यूनतम वेतन, समान काम के लिए समान वेतन, ठेका मज़दूरी का अंत और सेवानिवृत्त मज़दूरों के लिए 6000 रुपये प्रति माह की न्यूनतम अनुक्रमित पेंशन की मांग रखी। अधिवेशन में यह फैसला किया गया कि आगामी चुनावों के दौरान सभी राजनीतिक पार्टियों के सामने “मज़दूरों का चार्टर” पेश किया जायेगा और उन सभी को इन मांगों पर अपनी ठोस भूमिका देने के लिए बाध्य किया जायेगा। उन्होंने मांग रखी कि केंद्र में सत्ता में चाहे जिस पार्टी की सरकार आये उनको मौजूदा मज़दूर-विरोधी नीतियों को वापस लेना होगा और वैकल्पिक मज़दूर-समर्थक और जन-समर्थक नीतियों को बनाना होगा।
  • thumbतमिलनाडु पर्यावरण संरक्षण आंदोलन के संयोजक मुगिलन, 15 फरवरी की रात को चेन्नई के एग्मोर रेलवे स्टेशन से मदुरई जाते समय लापता हो गए। 15 फरवरी की सुबह उन्होंने एक प्रेस वार्ता की जहां उन्होंने दो वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों पर आरोप लगाते हुए कहा कि ये पुलिस अधिकारी उन उपद्रवियों के साथ मिले हुए थे जिन्होंने मई 2018 को तूतूकुड़ी में सरकारी वाहनों को आग लगा दी थी और सीसीटीवी कैमरों को नष्ट किया था। यह घटना उस समय हुई जब लोग स्टरलाइट कॉपर के ख़िलाफ़ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। पुलिस द्वारा की गई गोलीबारी में कम से कम 13 लोगों की मौत हो गयी।

  • thumbदिन-ब-दिन ट्रैकमेनों की हालत बद से बदतर होती जा रही है। आये दिन ट्रैकमेन रेल की पटरियों पर मरने को मजबूर हैं। वर्ष 2012-13 से 2015-16 में प्रतिवर्ष 600 ट्रैकमेन ट्रेन दुर्घटना के शिकार हुए हैं। वर्ष 2017-18 व 2018-19 में प्रतिवर्ष तकरीबन 1000 ट्रैकमेन ट्रेन दुर्घटना के शिकार हुए हैं। यानी प्रतिदिन 3 ट्रैकमेन रन ओवर से मुत्यु के शिकार होते हैं। यह आंकड़ा अपने आप में अचंभित करने वाला है।

  • thumb28 फरवरी को मकान तथा पुर्नवास के सवाल को लेकर मुंबई के कपड़ा मिल मज़दूरों तथा उनके वारिसों का विशाल मोर्चा मुंबई मे संपन्न हुआ। मोर्चे में करीब 4 हजार मज़दूर शामिल हुए। महाराष्ट्र सरकार के निर्णय के अनुसार 1 लाख, 71 हजार मिल मज़दूरों और उनके वारिसों में से केवल 17 हजार मिल मज़दूरों तथा उनके वारिसों को ही मकान मिल सकते हैं।

  • Thumbदिल्ली के सैकड़ों गेस्ट टीचर अपनी लंबित मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। इस सिलसिले में 4-7 मार्च के बीच दिल्ली के उपराज्यपाल के यहां धरना दिया है। इससे पूर्व, 1-3 मार्च को उपमुख्यमंत्री व शिक्षामंत्री के आवास पर धरना दिया। विदित रहे कि पूर्व के वर्षों में गेस्ट टीचर्स का कॉन्ट्रैक्ट मई 10 तक चलता रहा है परंतु इस बार गेस्ट टीचर्स की सेवा फरवरी मे ही समाप्त कर दी गयी और गेस्ट टीचर्स का रिन्यूअल भी नही हुआ, जिस कारण लगभग 25000 गेस्ट टीचर्स बेरोज़गार हो गए हैं।

  • मुंबई महानगर पालिका की 4000 आरोग्य सेविकाओं ने अपनी मांगों के लिए 28 जनवरी, 2019 से काम-बंद आंदोलन शुरू किया। बुह्नमुंबई महानगर पालिका द्वारा 4 हजार आरोग्य सेविकाओं को 20 सालों से महानगर पालिका का कर्मचारी न मानकर उनका शोषण किया जा रहा है। 25 जनवरी, 1999 से उनकी मांगों पर मुंबई महानगर पालिका प्रशासन कोई ध्यान नहीं दे रहा है। 2002 में इंडस्ट्रीयल कोर्ट ने फैसला दिया था कि आरोग्य सेविकाएं बुह्नमुंबई महानगर पालिका की ही कर्मचारी हैं।

पार्टी के दस्तावेज

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पूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि
उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई
विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है।
इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि
लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि
पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को।
यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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