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  • सरमायदारों के मज़दूर-विरोधी, किसान-विरोधी, समाज-विरोधी और राष्ट्र-विरोधी कार्यक्रम को हराने के लिए संगठित हो!

    पूंजीवादी पार्टियों के उम्मीदवारों को ठुकरायें!

    लोगों के अधिकारों के लिए लड़ने वाले उम्मीदवारों को चुनाव में जिताओ!

    हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केंद्रीय समिति का आह्वान, 5 अक्तूबर, 2019

    21 अक्तूबर, 2019 को 90 सदस्यों वाली हरियाणा राज्य विधानसभा के लिए चुनाव होंगे। पूंजीपति वर्ग की दो प्रमुख पार्टियां भाजपा और कांग्रेस इन चुनावों में हिस्सा ले रही हैं। इनके अलावा हरियाणा के पूंजीपति और बड़े ज़मीनदारों का प्रतिनिधित्व करने वाली कई अन्य पार्टियां भी हिस्सा ले रही हैं जिनमें इंडियन नेशनल लोक दल और जननायक जनता पार्टी शामिल हैं।

  • पूंजीवादी पार्टियों के उम्मीदवारों को ठुकरायें!

    केवल उनका चुनाव करें जो आपके अधिकारों के लिए लड़ते आये हैं!

    हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की महाराष्ट्र क्षेत्रीय समिति का बयान, अक्तूबर, 2019

    लोकसभा चुनाव में बड़े अंतर से भाजपा की जीत के 5 महीने बाद, 288 सदस्यीय महाराष्ट्र विधानसभा के चुनाव 21 अक्तूबर, 2019 को होने जा रहे हैं। पिछले दो दशकों से इस राज्य को गठबंधन सरकारें चला रही हैं। भाजपा-शिवसेना गठबंधन ने 1995 से 1999 के बीच और 2014 से शासन किया है। कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन 1999 से 2014 के बीच 15 वर्षों तक सत्ता में रहा है।

  • Comrade SK

    25 सितम्बर, 2019 की सुबह को कामरेड शेखर कापुरे का देहांत टिटवाला, मुबंई में उनके निवास स्थान पर हो गया। वे 59 वर्ष के थे और “एस.के.” के नाम से लोकप्रिय थे। 1998 में जब से वे पार्टी के साथ जुड़े थे, उस समय से 20 वर्ष से अधिक समय के लिए वे कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के लड़ाकू साथी बने रहे। उनका जन्म महाराष्ट्र के नांदेड जिले में खुशनूर में हुआ था। यहां से अपनी स्कूल की शिक्षा और स्नातक की पढ़ाई करने के बाद वे कानून की पढ़ाई करने के इरादे से मुंबई आए। यहां पर पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने एक गारमेंट फैक्ट्री में पार्ट टाइम काम करना शुरू कर दिया ताकि वे अपने कॉलेज की फीस और रहने-खाने का खर्चा पूरा कर सकें। लेकिन गारमेंट फैक्ट्री में मज़दूरों के काम की दयनीय हालत को देखते हुए, जल्द ही उन्होंने मज़दूरों को इन हालातों के ख़िलाफ संगठित करना शुरू कर दिया। वे इस काम में इतने व्यस्त हो गए कि उन्होंने पढ़ाई छोड़कर अपना पूरा समय मज़दूरों को संगठित करने में समर्पित कर दिया। अपने अन्य लड़ाकू साथियों के साथ मिलकर 1998 में उन्होंने लड़ाकू गारमेंट मज़दूर संघ (एल.जी.एम.एस.) की स्थापना की।

  • Workers convention

    हुक्मरान वर्ग के मज़दूर-विरोधी, समाज-विरोधी और राष्ट्र-विरोधी रास्ते को रोकने के लिए देश का मज़दूर वर्ग एकजुट विरोध संघर्ष कर रहा है। इस संघर्ष को आगे बढ़ाते हुए, देशभर के हजारों-हजारों मज़दूरों ने यह ऐलान किया है कि 8 जनवरी, 2020 को सर्व हिन्द आम हड़ताल आयोजित की जायेगी। 30 सितम्बर, 2019 को नई दिल्ली के संसद मार्ग पर हुए राष्ट्रीय मज़दूर अधिवेशन में यह फैसला घोषित किया गया। दस केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों - इंटक, एटक, एच.एम.एस., सीटू, ए.आई.यू.टी.यू.सी., टी.यू.सी.सी., सेवा, ए.आई.सी.सी.टी.यू., एल.पी.एफ. और यू.टी.यू.सी. - ने मज़दूर वर्ग के आगे के कार्यक्रम को तय करने के लिए, संयुक्त रूप से अधिवेशन का आह्वान किया था।

  • File photo

    सितंबर 2019 में देशभर के अधिकांश शहरों में प्याज की खुदरा क़ीमतें 200 प्रतिशत से अधिक बढ़ गईं। सितंबर में ज्यादातर शहरों में दाम 80 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गये, जबकि जुलाई से अगस्त के दौरान प्याज 20 से 25 रुपये प्रति किलो पर था। इसके जवाब में सरकार ने सभी प्रकार के प्याज निर्यात पर रोक लगा दी, प्याज व्यापारियों के भण्डारण पर सीमा लगा दी और कुछ जगहों पर केंद्रीय भंडार में रखा गया भंडार भी बाज़ार में निकाल दिया गया।

  • Protest in Ghaziabad

    भारतीय रेल के निजीकरण की ओर एक और क़दम बढ़ाते हुये, निजी कंपनी द्वारा चलाई जाने वाली, तेजस नामक प्रथम ट्रेन का संचालन शुरू किया गया है। इसके विरोध में, 4 अक्तूबर को आल इंडिया लोको रिनंग स्टाफ ऐसोसियेशन (ए.आई.एल.आर.एस.ए.) के चालकों और गार्डों ने कश्मीर से कन्याकुमारी तक, पूरे देश में सभी रेलवे क्रू-लाबियों, चालक विश्रामगृहों, स्टेशनों, प्रशिक्षण केन्द्रों, आदि पर धरना प्रदर्शन करके काला दिवस मनाया। अपना विरोध प्रकट करने के लिये प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने काली पट्टी बांध रखी थी।

  • अमरीका हिन्दोस्तान के साथ अपना रणनैतिक गठबंधन मजबूत करना चाहता है ताकि एशिया पर अपना संपूर्ण वर्चस्व स्थापित करने के अपने उद्देश्य को हासिल कर सके। इसके लिए अमरीका चीन को आगे बढ़ने से रोकना चाहता है, रूस को कमज़ोर करना चाहता है और ईरान को अलग-थलग करना चाहता है। हिन्दोस्तान के बड़े सरमायदार खुद एशिया में सबसे बड़ी शक्ति बनना चाहते हैं। इस मंसूबे को हासिल करने में उनकी सबसे ज्यादा स्पर्धा चीन के साथ है। हिन्दोस्तान के हुक्मरान अमरीका के साथ रणनैतिक गठबंधन को मजबूत करके अपना उद्देश्य पूरा करना चाहते हैं।
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    हमारे देश की पूंजीवादी अर्थव्यवस्था सब-तरफा संकट में फंसती जा रही है। पिछले कुछ वर्षों से चल रही मंदी के बाद अब अनेक बड़े उद्योगों में वस्तुओं व सेवाओं का उत्पादन घटने लगा है। ... उपभोक्ता वस्तुओं की बिक्री में विस्तृत गिरावट का मूल कारण मज़दूरों और किसानों की क्रय-शक्ति में गिरावट है, जो कि जनसंख्या का 90 प्रतिशत भाग है।

  • 14 सितम्बर, 2019 को सऊदी अरब राज्य द्वारा चलायी जा रही अरामको कंपनी के दो प्रमुख तेल संयंत्रों पर ड्रोन द्वारा हमला हुआ जिसके बाद दोनों को बंद करना पड़ा। इन तेल संयंत्रों के बंद हो जाने से तेल उत्पादन में अस्थायी तौर पर भारी कटौती हुई है। ... अमरीका पश्चिमी एशिया में एक बड़ा ही ख़तरनाक खेल खेल रहा है। अपने रणनैतिक लक्ष्य को हासिल करने के लिए वह पूरे इलाके को खूनी जंग में धकेलने की कोशिश कर रहा है। जो राजनीतिक ताक़तें देशों की संप्रभुता और शांति के साथ खड़ा रहना चाहती हैं, उन्हें अमरीकी साम्राज्यवाद द्वारा ईरान के लोगों और उनकी सरकार को आतंकवाद का स्रोत करार देने की कोशिश का पर्दाफाश करना चाहिए और उसकी निंदा करनी चाहिए।
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    व्यवसायिक दुर्घटनाएं - जिनमें कार्यस्थल में हुईं “दुर्घटनाओं” में मज़दूर घायल हो जाते हैं या उनकी मौत हो जाती है - हमारे देश में इनकी संख्या बहुत अधिक है। रिपोर्ट की गई दुर्घटनाओं के अनुसार हर रोज 3 मज़दूरों की मौत हो जाती है और लगभग 50 मज़दूर घायल हो जाते हैं! एक अनुमान के अनुसार, कार्यस्थल में हुई “दुर्घटनाओं” की वजह से हर वर्ष करीब 80,000 मज़दूर अपनी जान गवां बैठते हैं। इन दुर्घटनाओं में लाखों मज़दूर घायल हो जाते हैं और कई जीवनभर के लिए विकलांग हो जाते हैं।

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    उत्तर प्रदेश के हजारों किसानों ने सरकार को अपनी मांगें प्रस्तुत करने के लिये, 21 सितम्बर को, भारतीय किसान संघ (बी.के.एस.) के झंडे तले, दिल्ली की तरफ कूच किया। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विभिन्न इलाकों से आये किसान 19 सितम्बर को नोएडा में इकट्ठा हुए। अगली सुबह उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गन्ना किसानों की बकाया राशि न देने व बढ़ते बिजली की दरों पर ध्यान दिलाने के लिये दिल्ली के किसान घाट तक जुलूस प्रदर्शन निकाला। वे ग़ाजियाबाद, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, शामली और बागपत से बी.के.एस. के बैनर तले आये थे। उनकी मांग है कि गन्ने की बकाया राशि चार दिनों में मिलनी चाहिये, किसानों के लिये बिजली का बिल घटाकर 100 रुपये प्रति माह किया जाये और खेती के लिये लिया गया पूरा ऋण माफ़ किया जाना चाहिये।

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    ऑल इंडिया कोल वर्कर्स फेडरेशन के नेतृत्व में, कोल इंडिया लिमिटेड (सी.आई.एल.) और सिंगरेनी कोलियरीज के 5 लाख से भी ज्यादा मज़दूरों ने हड़ताल की। यह हड़ताल कोयला खनन में केन्द्र द्वारा 100 प्रतिशत एफ.डी.आई. की अनुमति देने के 24 सितंबर के फैसले के ख़िलाफ़ थी। असम से सिंगरेनी तक सभी खादानों से कोयले के उत्पादन, परिवहन और प्रेषण के कामों में लगे सभी कर्मचारी हड़ताल में शामिल हुये।

     

     

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    15 सितम्बर को यूनाइटेड ऑटो वर्कर्स यूनियन (यू.ए.डब्ल्यू.) ने पूरे अमरीका में जनरल मोटर्स (जी.एम.) के खि़लाफ़ हड़ताल का आह्वान किया। हड़ताल के इस आह्वान पर देशभर में जनरल मोटर्स के करीब 46,000 मज़दूरों ने मध्य रात्रि से काम पर जाना बंद कर दिया और हड़ताल शुरू कर दी। अखबार के प्रेस में जाने तक यह हड़ताल जारी थी। ... 9 सितम्बर को दक्षिण कोरिया में जी.एम. के कारखाने में काम करने वाले यूनियन में संगठित मज़दूरों ने सम्पूर्ण हड़ताल का ऐलान किया। पिछले दो दशक में इस तरह की यह पहली हड़ताल है। मज़दूर उच्चतर वेतन की मांग कर रहे हैं और इस अमरीकी कार उत्पादक कंपनी द्वारा पूर्वी एशियाई देश में उत्पादन के पुनर्गठन की योजना का विरोध कर रहे हैं।

  • दक्षिण अफ्रीका की सबसे बड़ी यूनियन सास्बो (जो पहले साउथ अफ्रीकन सोसायटी आॅफ बैंक आॅफिशियल्स थी) एक बहुत बड़ी हड़ताल की तैयारी कर रही थी जिससे देश का बैंकिंग उद्योग अस्त-व्यस्त होने वाला था। यूनियन अपने 73,000 सदस्यों को 27 सितम्बर की हड़ताल के लिये लामबंध करने में अगुवाई दे रही थी, जो शताब्दी की सबसे बड़ी औद्योगिक कार्यवाई होने वाली थी। देश के बड़े शहरों में - जोहानेसबर्ग, डर्बन, ब्लोएम्फोंटेन, पोर्ट एलिज़ाबेथ व केप टाउन में बड़े जुलूस प्रदर्शन आयोजित किये जा रहे थे।

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    राजस्थान के हनुमानगढ़ की नोहर तहसील में बिजली कंपनियों की लूट के खि़लाफ़ चलाया जा रहा संघर्ष अब और तेज़ हो गया है। अब बिजली उपभोक्ता संघर्ष समिति की अगुवाई में 13 सितंबर से एस.डी.एम. कार्यालय के समक्ष क्रमिक भूख हड़ताल शुरू कर दी गई है। समिति ने निर्णय लिया है कि गांव-गांव में घर-घर जाकर हस्ताक्षर अभियान चलाया जायेगा। पहले चरण में 10,000 हस्ताक्षरों के साथ मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा जायेगा।

     

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    कपड़ा मज़दूरों और यूनियनों ने 12 सितंबर को बेंगलुरू में गारमेंट एंड टेक्सटाइल वर्कर्स यूनियन (जी.ए.टी.डब्ल्यू.यू.) द्वारा आयोजित एक लड़ाकू विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया। जी.ए.टी.डब्ल्यू.यू. और मज़दूरों ने दिखा दिया है कि यह अस्वीकार्य है। मज़दूरों के रोज़गार और न्यूनतम वेतन के अधिकारों को सुनिश्चित करना सरकार का कर्तव्य है।

     

     

पार्टी के दस्तावेज

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पूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि
उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई
विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है।
इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि
लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि
पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को।
यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

पी.डी.एफ. डाउनलोड करनें के लिये चित्र पर क्लिक करें

 

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इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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