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  • केन्द्रीय रिज़र्व पुलिस फोर्स (सी.आर.पी.एफ.) के लगभग 50 सैनिक 14 फरवरी, 2019 को कश्मीर में एक आत्मघाती कार बम विस्फोट में मारे गये। यह हमला उस अति-सुरक्षित महामार्ग पर हुआ, जो कश्मीर घाटी में तैनात सैनिकों के लिये सप्लाई का एक मुख्य रास्ता है। पलटन में लगभग 2,500 सैनिक जा रहे थे और जिस बस पर बम से हमला हुआ, उसमें 40 से ज्यादा सैनिक सवार थे। हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी इस कायराना आतंकवादी हमले की कड़ी निन्दा करती है। हम सभी मृत सी.आर.पी.एफ. सैनिकों के परिवारों को शोक और सहानुभूति प्रकट करते हैं।

  • Thumbदुनियाभर की महिलाएं 8 मार्च अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाने की तैयारी में जुटी हुई हैं। दुनियाभर में महिलायें अपने पर हो रहे दमन और भेदभाव का जमकर विरोध कर रही हैं। महिलाएं मौजूदा अर्थव्यवस्था की अमानवीय और पूंजी-केंद्रित दिशा का, एक आवाज़ में जमकर विरोध कर रही हैं। पहले से कहीं ज्यादा स्पष्टता के साथ वे एक महिला बतौर और एक इंसान बतौर अपने अधिकारों की हिफ़ाज़त में अपनी आवाज़ बुलंद कर रही हैं।

  • 2019-20 के अंतरिम बजट पेश करने के अवसर पर भाजपा सरकार ने दो नयी स्कीमों की घोषणा की। इन स्कीमों का ध्यान से परीक्षण करने से पता चलता है कि उनका मकसद ऐसा नहीं है जैसा कि आधिकारिक तौर पर बताया जा रहा है। मज़दूरों व किसानों की समस्याओं को संबोधित करना तो दूर, इन स्कीमों का उद्देश्य मज़दूरों को और लूटना है तथा किसानों से लूटे हुए धन के बदले में कुछ टुकड़े फेंककर उन्हें शांत करना है।

  • इस वर्ष के रक्षा बजट पर भारत सरकार 3,05,296 करोड़ रुपये खर्च करने जा रही है। वित्त मंत्री ने संसद में पेश किये गये अपने अंतरिम बजट में ये आंकड़े पेश किये। यह राशि पूरे सरकारी बजट खर्च की 11 प्रतिशत से अधिक है। सरकार द्वारा खर्च किये जा रहे मदों में, रक्षा पर खर्च सरकारी कर्ज़ों के ब्याज भुगतान के बाद दूसरे नंबर पर है।

  • Thumbदेश के गन्ना उगाने वाले 5 करोड़ किसान एक बार पुनः घोर संकट का सामना कर रहे हैं। कई महीनों से चीनी मिलों को भेजे गए गन्ने का उन्हें भुगतान नहीं मिला है। इस वर्ष जनवरी के अंत तक चीनी मिलों द्वारा किसानों की बकाया राशि 13,932 करोड़ रुपये तक पहुंच गयी। इसे चीनी मिलों के पूंजीपति मालिकों के संगठन, इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन ने स्वयं स्वीकार किया है। चीनी मिलों द्वारा किसानों की बकाया राशि उत्तर प्रदेश में 5,553 करोड़ रुपये, कर्नाटक में 2,714 करोड़ रुपये तथा महाराष्ट्र में 2,636 करोड़ रुपये हैं।

  • Thumbहनुमानगढ़ जिले में किसानों तथा व्यापक जनसमुदाय ने अपने अधिकारों को हासिल करने के लिये संघर्ष तेज़ किया है।

    • किसानों का संघर्ष
    • रेल रोको आंदोलन
    • रामगढ़ के ग्रामीण निवासियों ने आंदोलन का ऐलान किया
  • Thumbपश्चिम बंगाल के 2.5 लाख से ज्यादा जूट मिल के मज़दूरों ने 1 मार्च, 2019 से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का फैसला किया है। ... भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के लगभग 10,000 मज़दूर 20 फरवरी से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जायेंगे। एयरपोर्ट्स अथॉरिटी एम्प्लोईज़ यूनियन (ए.ए.ई.यू.) के झंडे तले संगठित ये मज़दूर 6 हवाई अड्डों के निजीकरण का विरोध कर रहे हैं। ... 10,000 मध्याह्न भोजन रसोई कर्मचारियों ने 12 फरवरी, 2019 को बिहार विधानसभा का घेराव किया। यह घेराव उनके 35 दिवसीय विरोध प्रदर्शन और आन्दोलन का हिस्सा था। ... हिमाचल प्रदेश के हज़ारों आउटसोर्स किये गए मज़दूरों ने 13 फरवरी, 2019 से शिमला में विधानसभा पर धरना देने की घोषणा की है।

  • Thumbअर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों में मज़दूरों को ठेक पर काम पर रखने की मज़दूर-विरोधी प्रथा साल दर साल बढ़ती ही जा रही है। हर क्षेत्र के मज़दूर यह मांग कर रहे हैं कि उनकी नौकरियों को नियमित किया जाये और उनकी स्थायी मज़दूर के तौर पर नियुक्ति की जाये। ठेका मज़दूरों को, स्थायी मज़दूर को मिलने वाली सभी सुविधाओं से वंचित किया जाता है। इस नाइंसाफी-भरी प्रथा के खि़लाफ़ मज़दूरों का आक्रोश बढ़ता ही जा रहा है। मज़दूर एकता लहर इस अंक में पंजाब में चल रहे संघर्षों पर रिपोर्ट प्रकाशित कर रही है।

  • Thumbउत्तर प्रदेश के 40 लाख राज्य कर्मचारियों ने 6 फरवरी, 2019 से 7 दिनों की हड़ताल पर जाने का ऐलान किया। सभी कर्मचारी मौजूदा पेंशन योजना को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। राज्य के तमाम शिक्षक, इंजिनीयर, तहसीलदार, और परिवहन विभाग के कर्मचारियों ने इस हड़ताल में हिस्सा लिया। मज़दूरों की हड़ताल के जवाब में राज्य सरकार ने 8 फरवरी से ज़रूरी सेवाएं कानून (एस्मा) लागू कर दिया और सभी विभागों और कारपोरेशनों में 6 महीने के लिए किसी भी तरह की हड़ताल और प्रदर्शन पर रोक लगा दी है।

  • “सब का विकास”, जिस नारे के साथ 2014 में नरेन्द्र मोदी की अगुवाई में भाजपा की सरकार बनी थी, वह एक खोखला वादा रह गया है। वह शहरों और गांवों के करोड़ों-करोड़ों मेहनतकशों के लिए एक क्रूर मज़ाक बन कर रह गया है। वह उतना ही खोखला साबित हुआ है जितना कि कांग्रेस पार्टी का “ग़रीबी हटाओ” का नारा था। जबकि मेहनतकश लोग देश की सारी दौलत को पैदा करते हैं, तो हमारी अर्थव्यवस्था मेहनतकशों की ज़रूरतों को पूरा नहीं करती है। आर्थिक संवर्धन से टाटा, बिरला, अम्बानी आदि की अगुवाई में मुट्ठीभर इजारेदार पूंजीवादी घरानों की लालच ही पूरी हो रही है।
  • Thumbहमारे पाठक जानते हैं कि महाराष्ट्र राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड (एम.एस..डी.सी.एल.) के मज़दूर कलवा, मुंब्रा और दिवा (ठाणे के उपनगरों) में बिजली वितरण के निजीकरण के ख़िलाफ़ एक बहादुर संघर्ष कर रहे हैं। जैसा कि अन्य क्षेत्रों के मज़दूरों के मामले में होता है, सरकार और इजारेदारों द्वारा नियंत्रित मीडिया ने उपयोगकर्ताओं को मज़दूरों के ख़िलाफ़ भड़काने की कोशिश की। हालांकि इस बार वे ऐसा करने में असफल रहे। ऐसा इसलिए हो पाया क्योंकि कई नागरिक संगठनों को इस तथ्य के बारे में पता था कि निजीकरण केवल मज़दूरों पर ही नहीं बल्कि उपयोगकर्ताओं पर भी हमला है; यह एक समाज-विरोधी हमला है। इन संगठनों ने नागरिकों को इसके प्रति जागरुक करने के लिए एक अभियान चलाया।

  • Thumbनागरिकता संशोधन विधेयक (2019) को 8 जनवरी, 2019 को लोक सभा में पास किया गया। इससे पहले और बाद में, असम तथा सभी पूर्वाेत्तर राज्यों में बड़े-बड़े विरोध प्रदर्शन हुये। राज्य सभा में इस विधेयक का पास होना नामुमकिन लगता है, क्योंकि भाजपा के अलावा बाकी लगभग सारी राजनीतिक पार्टियां इसके प्रावधानों का विरोध कर रही हैं।

  • Thumb10 जनवरी को, असम पुलिस ने 80 वर्ष केएक सम्मानित कवि व लेखक हिरेन गोहैन, आर.टी.आई. किसान कार्यकर्ता अखिल गोगोई और एक वरिष्ठ पत्रकार मंजीत महंता पर राजद्रोह का इलज़ाम लगाया है। ये तीनों नागरिक समाजनामक संस्था के सदस्य हैं और इस संस्था के एक कार्यक्रम में उन्होंने नागरिकता (संशोधन) विधेयक के ख़िलाफ़ अपने विचार रखे थे, जिसके लिए उन पर यह मामला दर्ज किया गया।

  • Thumb23 जनवरी, 2019 को वेनेजुएला के विपक्ष के नेता ने अपने समर्थकों की एक रैली के सामने, वहां के निर्वाचित राष्ट्रपति मादुरो को नकारते हुये, खुद को देश का अंतरिम राष्ट्रपतिघोषित कर दिया। इस घोषणा के चंद मिनटों के बाद ही अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस व्यक्ति को वेनेजुएला का वैधराष्ट्रपति को स्वीकृति दे दी। अमरीका के विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने ऐलान किया कि वेनेजुएला में शासन परिवर्तन करने के लिए अमरीका अपनी तमाम आर्थिक और कूटनीतिक शक्तियों का इस्तेमाल करेगा।

  • Thumbबांग्लादेश में करीब 50,000 वस्त्र मज़दूर लगातार दो सप्ताह हड़ताल पर थे। अपना विरोध व्यक्त करने के लिये, अपना काम बंद करके वे फैक्टरी से बाहर निकल गये थे। उन्हें पुलिस का सामना करना पड़ा परन्तु उन्होंने अपनी हड़ताल वापस नहीं ली। पुलिस ने बड़ी संख्या में इकट्ठे हुये लोगों को, जिन्होंने राजधानी ढाका के करीब एक वस्त्र उत्पादन केन्द्र के पास महामार्ग का चक्का जाम कर दिया था, उन्हें तितर-बितर करने के लिये पुलिस ने वाॅटर केनन और अश्रु गैस का सहारा लिया। हड़ताल के कारण हजारों फैक्टरियों को बंद करना पड़ा।

  • Thumb22 जनवरी, 2019 से तमिलनाडु की ज्वाइंट एक्शन कमेटी आॅफ टीचर्स आर्गनाइजेशन - गवरमेंट एम्प्लाइज़ आर्गनाइजेशन (जे..सी.टी..-जी...) के सदस्य अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। राज्य सरकार द्वारा दी गई तमाम तरह की धमकियों कि काम नहीं, तो वेतन नहींकी घोषणा के बावजूद तमिलनाडु के शिक्षक और सरकारी कर्मचारी अपनी हड़ताल को जारी रखे हुए हैं। इस हड़ताल से पूरे राज्य के सरकारी स्कूल प्रभावित हुए हैं।

पार्टी के दस्तावेज

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इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


पी.डी.एफ. डाउनलोड करनें के लिये चित्र पर क्लिक करें

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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