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  • पूर्ण न्याय” के नाम से घोर अन्याय

    हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति का बयान, 25 नवम्बर, 2019

    9 नवम्बर, 2019  को सुप्रीम कोर्ट की 5 न्यायाधीशों वाली पीठ ने 1992 में बाबरी मस्जिद के तोड़े जाने से पहले वह मस्जिद जिस भूमि पर खड़ी थी, उस भूमि से संबंधित एक संपत्ति विवाद पर अपना फैसला दिया। अदालत ने ऐलान किया कि वह भूमि राम लल्ला विराजमान की संपत्ति है। अदालत ने केंद्र सरकार को आदेश दिया कि उसी स्थान पर मंदिर बनाने के लिए एक ट्रस्ट की स्थापना की जाये।

  • Oil workers convention

    20 नवम्बर को नई दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में बी.पी.सी.एल., एच.पी.सी.एल., ओ.एन.जी.सी. और ऑइल इंडिया लिमिटेड में हिन्दोस्तान भर में काम करने वाले तेल और पेट्रोलियम मज़दूरों का प्रतिनिधित्व करने वाली तीन फेडरेशनों ने संयुक्त आम अधिवेशन का आयोजन किया। ये तीनों फेडरेशनें थीं, ऑल इंडिया पेट्रोलियम वर्कर्स फेडरेशन (ए.आई.पी.डब्ल्यू.एफ.), नेशनल फेडरेशन ऑफ पेट्रोलियम वर्कर्स (एन.एफ.पी.डब्ल्यू.) तथा पेट्रोलियम एंड गैस वर्कर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (पी.जी.डब्ल्यू.एफ.आई.)।

     
  • मज़दूरों के भविष्य की सुरक्षा सट्टेबाज़ बीमा कंपनियों पर निर्भर

    देशभर के सरकारी कर्मचारी नई पेंशन योजना के ख़िलाफ़ सड़कों पर उतर रहे हैं। इसे राष्ट्रीय पेंशन योजना (एन.पी.एस.) के नाम से भी जाना जाता है, और 1 जनवरी, 2004 के बाद सरकारी नौकरी में नियुक्त किये गए सभी कर्मचारियों पर इसे अनिवार्य रूप से लागू किया गया है (सशस्त्र बलों में काम करने वाले कर्मचारियों को इसके बाहर रखा गया है)। 30 सितम्बर, 2019 को पुरानी पेंशन योजना के लिए राष्ट्रीय आंदोलन (नेशनल मूवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम - एन.एम.ओ.पी.एस.) के झंडे तले हजारों सरकारी कर्मचारियों ने नई पेंशन योजना का विरोध करने और पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने की मांग करते हुए संसद पर धरना प्रदर्शन आयोजित किया। देश की सभी केंद्रीय ट्रेड यूनियनों समेत विश्वविद्यालयों के शिक्षक, सरकारी स्कूलों के शिक्षक, बैंक, बीमा कंपनी, टेलिकॉम सेवा के संस्थाओं, इत्यादि के कर्मचारियों ने एक साथ मिलकर नई पेंशन योजना का ज़ोरदार विरोध किया।

  • Demo against electricity co loot

    14 अक्तूबर को हनुमानगढ़ जिले की नोहर तहसील सहित अनेक गांवों - रामगढ़, नरवाना, नेठराना, गोगामेढी, भादरा, रावतसर, टिब्बी और सांगरिया आदि के लोगों ने बिजली कंपनियों की लूट के खिलाफ़ उपभोक्ता संघर्ष समिति के बैनर तले ऊंट रैली निकाली और कलेक्टर का घेराव किया। इस रैली में इन सभी इलाकों के अलग-अलग गांवों के सैकड़ों लोगों ने हिस्सा लिया।

  • AIIMS Resident Doctors

    दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के रेजिडेंट डॉक्टरों की एसोसिएशन ने छात्रों की फीस और स्वास्थ्य सेवा के शुल्क को बढ़ाने के केंद्र सरकार के प्रस्ताव का विरोध किया है। केंद्र सरकार ने हाल में एक आदेश जारी किया कि एम्स में मेडिकल की पढ़ाई कर रहे छात्रों की फीस और मरीजों के इलाज के शुल्कों में वृद्धि की जाये।

     
  • कॉग्नीज़ेंड कंपनी में मज़दूरों की छंटनी

    2019 की दुनिया की सबसे बड़ी 100 डिजिटल कंपनियों में से एक, कॉग्नीज़ेंड ने घोषणा की है कि वह अपने कन्टेंट मोडरेशन व्यवसाय को कम करेगी और करीब 7,000 आई.टी. मज़दूरों को नौकरी से निकालेगी। इस क्षेत्र के जानकार लोगों का मानना है कि करीब-करीब इतनी ही बड़ी छंटनी दूसरे राऊंड में जल्द ही की जायेगी। कन्टेंट मोडरेशन का मतलब है कि फेसबुक जैसे सोशल मीडिया में उपयोगकर्ता द्वारा डाली गयी सामग्रियों को पहचानना कि उनमें कोई आपत्तिजनक तो नहीं है।

  • Hanumangarh farmers

    लंबे संघर्ष के बाद शानदार जीत

    राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में ‘किसान, मज़दूर, व्यापारी संघर्ष समिति’ के बैनर तले, नोहर तहसील के अनेक गांवों के किसानों ने नोहर में उपखंड अधिकारी के कार्यालय के सामने लगातार 25 दिनों तक धरना दिया। धरने के 25वें दिन इस लंबे संघर्ष के बाद प्रशासन के कानों में जूं रेंगी और उसने किसानों के साथा वार्ता की। वार्ता के बाद प्रशासन ने किसानों की एक-एक मांग को समाधान सहित मान लिया।

     
  • किसान संघर्ष समिति के बैनर तले राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के कलेक्ट्रेट के सामने पिछले 173 दिनों से किसान धरने पर बैठे हैं। किसान अपनी भूमि के अधिग्रहण की एवज में ऊचित मुआवजे़ की मांग कर रहे हैं। उनकी मांगों पर अभी तक न तो राज्य सरकार ने और न ही केन्द्र सरकार ने कोई ध्यान दिया है।

  • AILRSA

    सरकार द्वारा भारतीय रेल में किये जा रहे निजीकरण के खि़लाफ़ देशभर में विरोध-प्रदर्शनों का दौर जारी है। इसी क्रम में 18 नवंबर, 2019 को आल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसियेशन तथा आल इंडिया गार्ड्स काउंसिल की अगुवाई में भारतीय रेल के चालकों और गार्डों ने नागपुर डिविज़न में लोको चालक लॉबी पर धरना प्रदर्शन किया और विरोध प्रकट किया। नागपुर डिविज़न के सैकड़ों रेल गार्डों और चालकों ने इस प्रदर्शन में हिस्सा लिया।

     
  • BSNL Workers on Strike

    इस भूख हड़ताल में बी.एस.एन.एल. की विभिन्न यूनियनों के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं जिनमें शामिल हैं बी.एस.एन.एल.ई.यू., नेशनल यूनियन ऑफ बी.एस.एन.एल. वर्कर्स, बी.एस.एन.एल. मज़दूर संघ, बी.एस.एन.एल. एसोसिएशन ऑफ टेलिकॉम मैकेनिक्स और बीस.एन.एल. ऑफिसर्स एसोसिएशन।

     
  • Honda Workers Strike

    27 नवंबर को होंडा मोटरसाइकिल एंड स्कूटर्स इंडिया (एच.एम.एस.आई.) के मानेसर प्लांट के हजारों मज़दूरों ने कारखाने के करीब एक हजार ठेके पर काम करने वाले मज़दूरों की छंटनी के खि़लाफ़, मानेसर और गुरुग्राम की सड़कों पर विरोध प्रदर्शन किया। एच.एम.एस.आई. के मज़दूरों के अलावा इस प्रदर्शन रैली में मानेसर और गुरुग्राम के ऑटो-कलपुर्जे के उद्योग के मज़दूरों ने होंडा मज़दूरों का समर्थन करने के लिये रैली में हिस्सा लिया।

     
  • 23 अक्तूबर को उत्तरांचल रोडवेज वर्कस यूनियन (यू.आर.डब्ल्यू.ए.) के कार्यकर्ताओं ने अपने अक्तूबर के वेतन का भुगतान न करने के ख़िलाफ़ देहरादून, हल्दवानी और पिथौरागढ़ सहित उत्तराखंड के 20 बस स्टेषनों पर दोपहर 12 बजे से दोपहर 1 बजे तक विरोध प्रदर्षन किया।

  • मेघालय में अस्थायी सरकारी मज़दूरों का संघर्ष

    मेघालय में अस्थायी सरकारी मज़दूर लंबे समय से ऑल मेघालय मस्टर रोल प्रोग्रेसिव वर्कर्स यूनियन (ए.एम.एम.आर.पी.डब्ल्यू.यू.) के बैनर तले अपनी मांगों के लिये लड़ते आये हैं। अस्थायी मज़दूरों की मांग है कि उन्हें अवकाश, अर्जित अवकाश, मातृत्व व कौशल विकास की सुविधायें मिलनी चाहियें और सभी बकाया वेतन मिलना चाहिये तथा योग्यता के अनुसार उनकी सेवा नियमित की जानी चाहिये।

  • Meeting in Jantar Mantar

    1984 में हुए सिखों के जनसंहार को न तो हम कभी भूलेंगे और न ही कभी माफ़ करेंगे! गुनहगारों को सज़ा मिलनी ही चाहिए!

    “1984 में हुए सिखों के जनसंहार को न तो हम कभी भुलाने देंगे और न ही कभी माफ़ करेंगे!” यह ऐलान हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के प्रवक्ता कामरेड प्रकाश राव ने दिल्ली में आयोजित जनसभा में किया। वह 1984 में हुए सिखों के जनसंहार की 35वीं बरसी पर 1 नवम्बर, 2019 को दिल्ली में जंतर-मंतर पर आयोजित जनसभा को संबोधित कर रहे थे।


  • आओ हम हिन्दोस्तान में मज़दूरों और किसानों की हुकूमत स्थापित करने के लिए काम करें!

    7 नवंबर, 1917 को रूस के क्रांतिकारी मज़दूरों, किसानों, सैनिकों और नाविकों ने विंटर पैलेस पर धावा बोला और अल्पकालीन सरकार के प्रतिनिधियों को गिरफ़्तार कर लिया। उन्होंने मंत्रालयों, राज्य के केंद्रीय बैंकों के साथ-साथ रेलवे स्टेशनों, पोस्ट एवं टेलीग्राफ ऑफिसों पर कब्ज़ा कर लिया। बोल्शेविक पार्टी की अगुवाई में मज़दूर वर्ग ने रूस में राजनीतिक सत्ता अपने हाथों में ले ली। इस घटना से पूरी दुनिया हिल उठी। दुनियाभर के पूंजीपतियों के दिलों में दहशत फैल गयी। इस घटना ने दुनियाभर के दबे-कुचले लोगों को प्रेरित किया और उन्हें एक उम्मीद दी।

  • BPCL workers demonstration

    भारत पेट्रोलियम के निजीकरण के फैसले की हम निंदा करते हैं!

    26 अक्तूबर, 2019 को मुंबई में हुए अधिवेशन में सरकार द्वारा तेल एवं पेट्रोलियम, रक्षा, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, बीमा कंपनियों, रेल, पोर्ट, सार्वजनिक परिवहन इत्यादि का निजीकरण करने के फैसले की निंदा की।


पार्टी के दस्तावेज

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पूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि
उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई
विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है।
इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि
लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि
पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को।
यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

पी.डी.एफ. डाउनलोड करनें के लिये चित्र पर क्लिक करें

 

5th Congress Documentहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन को यह रिपोर्ट पेश की गई। महाअधिवेशन में इस पर चर्चा की गयी और इसे अपनाया गया। पांचवें महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार, इस रिपोर्ट को सम्पादकीय शोधन के साथ, प्रकाशित किया जा रहा है।

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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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