Repeal Citizenship Amendment Act (CAA) Immediately!

No CAA ! No NRC!!

 

Berlin

Berlin, Germany

Frankfurt

Frankfurt, Germany

Cologne

Cologne, Germany

Munich

Munich, Germany

Helsinki, Finland

Helsinki, Finland

Helsinki, Finland

Helsinki, Finland

Dublin

Dublin, Ireland

Krakov, Poland

Krakov, Poland

Geneva

Geneva, Switzerland

 

There have been widespread protests in Europe against the violence targeting Muslims in North-east Delhi in the last week of February in which more than 40 people lost their lives and hundreds were injured. It is estimated that nearly 1500 people participated in these protests in major cities of Germany, France, Italy, Switzerland, Finland, Poland, Ireland, Scotland, UK, Austria, Netherlands and other countries of the European continent.

Protestors expressed solidarity with the victims of the state sponsored violence. They held placards and shouted slogans condemning the government for its 'gross failure' to maintain peace and to arrest the leaders who have been accused of instigating the violence.

Slogans in English and Hindi, poetry and speeches and a tribute to Shaheen Bagh marked the protest in the Netherlands where Indians gathered outside the Indian embassy in The Hague. Inclement weather could not stop members of the Indian diaspora and others to come together for a silent protest condemning the Delhi violence in Helsinki in Finland. Some of them taped their mouths with black cloth symbolizing the curbing of dissent. The protest ended with the poem ‘Sab Yaad Rakha Jayega’. In Paris, French citizens joined Indians to condemn the state-sponsored violence in Delhi, as the 43 victims of the violence last weekend were remembered: their names, professions and families mentioned. A minute silence was observed in their honor and white roses, a symbol of anti-fascist resistance in Europe, were laid near the consular office in Paris. The protest in Stockholm, Sweden, also observed a minute of silence for the victims of fascist violence in Delhi and other parts of India.

 
NY
Time Square, New York, USA

 

Washington DC
Washington, DC

 

Anti-CAA-London_Newham_march_4-Jan
Anti-CAA March Newham, London on 4 January 2020

 

US_out_of_Iraq_Phili.
Philadelphia, USA

 

 

 

Jadhavpur University, Kolkatta
Jadhavpur University, Kolkatta

 

Hyderabad Central University
Hyderabad Central University

 

Lucknow, Uttar Pradesh
Lucknow, Uttar Pradesh

 

Thiruvananthapuram, Kerala
Thiruvananthapuram, Kerala

 

Saidapet, Chennai, Tamil Nadu
Saidapet, Chennai, Tamil Nadu

 

Bhubneshwar, Orissa
Bhubneshwar, Orissa

 

Lakhimpur, Assam
Lakhimpur, Assam

 

Chandigarh
Chandigarh

 

 

पार्टी के दस्तावेज

8 जनवरी, 2020 की सर्व हिन्द आम हड़ताल को सफल करें!

मज़दूर एकता कमेटी का आह्वान

देश की दिशा पूंजीपतियों की अमीरी को बढ़ा रही है और मज़दूर, किसान व सभी मेहनतकशों को ग़रीबी में धकेल रही है। इस रास्ते का विरोध करने के लिए और देश की दौलत पर अपने अधिकार का दावा करने के लिए यह हड़ताल आयोजित की जा रही है।

मेहनतकशों का है यह नारा, हम हैं इसके मालिक! हिन्दोस्तान हमारा!

thumbपूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है। इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को। यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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5th Congress Documentहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन को यह रिपोर्ट पेश की गई। महाअधिवेशन में इस पर चर्चा की गयी और इसे अपनाया गया। पांचवें महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार, इस रिपोर्ट को सम्पादकीय शोधन के साथ, प्रकाशित किया जा रहा है।

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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब, मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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