देशभर के किसान अपनी मांगों के संघर्ष में एकजुट हुए

देशभर के किसानों का आक्रोश और गुस्सा जो कि पिछले कई महीनों से अलग-अलग संघर्षों के रूप में फूट रहा था, 20-21 नवंबर, 2017 को एक विशाल एकजुट संघर्ष के रूप में दिल्ली की सड़कों पर उतर आया।

Peasant Rally in Delhi
Peasants march

20-21 नवंबर को देशभर के 184 किसान संगठनों ने एक साथ मिलकर दिल्ली में अखिल भारतीय किसान संसद का आयोजन किया। इस किसान संसद में कम्युनिस्ट पार्टियों और अन्य पार्टियों की अगुवाई में गठित किसान संगठनों ने भी हिस्सा लिया। पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, असम, ओड़िशा, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल से आये किसान संगठनों ने इसमें हिस्सा लिया। इस संसद में किसानों, कृषि मज़दूरों, मछुआरों, बागान मज़दूरों, इत्यादि मेहनतकश लोगों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बड़े फक्र के साथ अपने हाथों में अपने संगठन के बैनर और झंडे उठाये, अपने इलाके के पारंपरिक परिधानों में सजे हजारों किसान और मेहनतकश लोग रामलीला मैदान और अंबेडकर स्टेडियम से दो कतारों में पूरे अनुशासन के साथ वे जंतर-मंतर पहुंचे। वे अपने-अपने इलाकों की भाषाओं में अपनी मांगों को बुलंद कर रहे थे।

जंतर-मंतर का पूरा इलाका लाल झंडों और बैनरों से भरा हुआ था, जहां किसानों के 50,000 से अधिक प्रतिनिधि, किसान संसद के लिए इकट्ठा हुए। विभिन्न किसान संगठनों के नेताओं ने किसानों को संबोधित किया। जंतर-मंतर पर आये किसान प्रतिनिधियों की सहूलियत के लिए बड़े-बड़े एल.सी.डी. स्क्रीन और लाउड स्पीकर्स लगाये गए थे, ताकि सभी आसानी से किसान संसद की कार्यवाही को देख और सुन सकें।

सभी वक्ताओं ने देश में चल रहे कृषि संकट और बढ़ती गरीबी की निंदा की, जिसके चलते कई किसान बर्बाद हो गए हैं और कई अन्य आत्महत्या करने पर मजबूर हो गए हैं। राज्य द्वारा उनकी फसल को खरीदने से इंकार करने, खेती में लागत की बढ़ती कीमत और तेज़ी से बढ़ता कृषि कर्ज़ जिसने हजारों किसानों को आत्महत्या करने को मजबूर कर दिया है, इन सभी विषयों का सभी किसान नेताओं ने अपने-अपने भाषणों में जिक्र किया। इन नेताओं द्वारा उठाई गई तमाम मांगों को अखिल भारतीय किसान संसद द्वारा विधेयक के रूप में प्रस्तावित किया गया, जिसे आने वाले संसद सत्र में पेश किए जाने की योजना है। इस विधेयक में शामिल है कृषि कर्ज़ की बिना शर्त माफ़ी, न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी, दाल, अनाज और तमाम अन्य खाद्य वस्तुओं और खेती उत्पादों की राज्य द्वारा खरीदी, बाज़ार में अनाज की कीमतों के उतार-चढ़ाव पर राज्य का नियंत्रण और अनाज पैदा करने वालों को सहायता, राज्य की आयात और निर्यात नीतियों को किसानों के हितों को ध्यान में रखकर बनाया जाये और सभी उत्पादों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य को न्यायिक अधिकार बनाया जाये।

अखिल भारतीय किसान संसद की एक खास बात यह थी कि इस दौरान एक महिला संसद भी आयोजित की गयी, जिसमें ऐसी महिलाएं प्रतिनिधि के रूप में चुनी गयी थीं, जिनके घर का कोई सदस्य कर्ज़ के चलते आत्महत्या करने पर मजबूर हो गया था। ये महिलाएं देशभर से आई थीं। इन महिलाओं के दिल-दहला देने वाले बयानों से देश के किसानों के सामने कठिन हालतों की झलक साफ दिखाई दे रही थी। ऐसी 500 से अधिक महिलाओं ने महिला संसद में हिस्सा लिया। इस महिला संसद ने एक प्रस्ताव पारित किया जिसमें कर्ज़ माफ़ी, न्यूनतम समर्थन मूल्य, कृषि उत्पाद की खरीदी की गारंटी और जिन परिवारों ने अपने परिजनों को खोया है उनके लिए मुआवजे की मांग शामिल है।

किसान संसद की कार्यवाही देर शाम तक चली और अगले दिन भी चलायी गयी, जहां कई किसान नेताओं ने देशभर से आये किसान प्रतिनिधियों को संबोधित किया। सभी वक्ताओं ने किसानों को अपनी आजीविका और अधिकारों के संघर्ष को और तेज़ करने का आह्वान किया। कई संगठनों के सदस्यों ने अपनी भाषाओं में संघर्ष के गीत पेश किये, ये गीत उनके संघर्षों को दर्शाते थे और हमारे शहीदों की कुर्बानियों से प्रेरणा लेने का बुलावा देते थे, जिन्होंने हमारे समाज को सभी प्रकार के शोषण और दमन से मुक्त करने के लिए बहादुरी से संघर्ष किया था।

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के सदस्यों और कार्यकर्ताओं ने इस दो दिवसीय किसान संसद में जोरदार तरीके से हिस्सा लिया। कर्ज़ माफ़ी और लाभकारी दाम पर राज्य द्वारा सभी फसलों की खरीदी की गारंटी, इन मांगों को दर्शाते कई बैनर मुख्य जगहों पर लगाये गए थे। इस अवसर पर हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केंद्रीय समिति की ओर से किसानों को संबोधित करते हुये, एक आह्वान भी प्रकाशित किया गया जिसका नारा था - “कर्ज़ माफ़ी और सार्वजनिक खरीदी की मांग पूरी तरह से जायज़ है!, किसानों की सुरक्षा और खुशहाली सुनिश्चित करना राज्य की जिम्मेदारी है!, यह कोई एहसान नहीं, जो करे हम पर कोई सरकार! सुरक्षित आजीविका है, हमारा बुनियादी अधिकार!”, इस आह्वान की दसों-हजारों प्रतियां हिंदी, पंजाबी, तमिल और मराठी भाषा में वितरित की गयीं। किसान संसद में आये प्रतिनिधियों ने ग़दर पार्टी के अख़बार मज़दूर एकता लहर की प्रतियों को बड़े उत्साह के साथ खरीदा और समाज के ज्वलंत मसलों पर ग़दर पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ पूरे जोश के साथ चर्चा भी की। इस किसान संसद का एक मुख्य आकर्षण था, ग़़दर पार्टी द्वारा लगाया गया माक्र्सवादी-लेनिनवादी साहित्य का स्टाल, जहां पार्टी के तमाम प्रकाशनों को रखा गया था। सैकड़ों लोगों ने इन प्रकाशनों को पढ़कर देखा और बहुत से लोगों ने इनको खरीदा। यह स्टाल राजनीतिक चर्चा का भी केंद्र बन गया, जहां कम्युनिस्टों और मज़दूरों के सामने आ रही समस्याओं पर राजनीतिक चर्चा चलती रही।

मज़दूर एकता लहर किसान संसद के सफल आयोजन के लिए आयोजकों को बधाई देती है। यह संसद किसानों के बीच बढ़ती एकता की राह में एक महत्वपूर्ण कदम है और साथ ही किसानों मज़दूरों के साथ-साथ सभी दबे-कुचले लोगों के साथ उनकी बढ़ती एकता और उस संघर्ष का भी प्रतीक है, जो हमारे देश के तमाम मेहनतकश लोग देश के बड़े इज़ारेदार पूंजीपतियों और उनके राज्य द्वारा किये जा रहे शोषण और लूट के खिलाफ़ चला रहे हैं।

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आक्रोश    184 किसान संगठनों    Dec 1-15 2017    Statements    Popular Movements     Privatisation    2017   

पार्टी के दस्तावेज

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पूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि
उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई
विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है।
इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि
लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि
पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को।
यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

पी.डी.एफ. डाउनलोड करनें के लिये चित्र पर क्लिक करें

 

5th Congress Documentहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन को यह रिपोर्ट पेश की गई। महाअधिवेशन में इस पर चर्चा की गयी और इसे अपनाया गया। पांचवें महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार, इस रिपोर्ट को सम्पादकीय शोधन के साथ, प्रकाशित किया जा रहा है।

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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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