‘एक्ट ईस्ट’ नीति के पीछे हिन्दोस्तानी इजारेदार पूंजीपति वर्ग की साम्राज्यवादी महत्वाकांक्षाएं

आसियान के दस सदस्य देशों की सरकार के राज्य के प्रमुख - थाईलैंड, वियतनाम, इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर, म्यांमार, कंबोडिया, लाओस और ब्रुनई - 26 जनवरी, 2018 के गणतंत्र दिवस की परेड में मुख्य अतिथि थे।

दक्षिण पूर्व एशियाई राज्यों के दस नेताओं को गणतंत्र दिवस परेड में एक साथ खड़े करने के पीछे, हिन्दोस्तानी राज्य का मकसद इस क्षेत्र में अपने बढ़ते महत्व और उसके ‘एक्ट ईस्ट’ नीति का सन्देश देना था। रक्षा मंत्री सीतारमन के शब्दों में, “गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान आसियान के 10 नेताओं की मौजूदगी से, हिन्दोस्तान निश्चित रूप से अपनी ‘एक्ट ईस्ट’ नीति का प्रदर्शन करेगा।”

हिन्दोस्तानी राज्य की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति को एशिया प्रशांत क्षेत्र के बढ़ते सैन्यीकरण के संदर्भ में देखा जाना चाहिए जिसका नेतृत्व अमरीका द्वारा हो रहा है। सात साल पहले, अमरीकी साम्राज्यवाद ने चीन के घेरे के लिए एशिया प्रशांत क्षेत्र में अपने अधिकांश सशस्त्र बलों को पुनः नियुक्त करने का फैसला किया। उसने इसे अपनी एशिया की ओर बढ़ने की नीति बताया। चीन एक प्रमुख आर्थिक और सैन्य शक्ति है, जिसने दक्षिण पूर्व एशिया के कई राज्यों के साथ व्यापक व्यापारिक संबंधों को विकसित किया है। दक्षिण चीन सागर में समुद्री सीमाओं के मुद्दे पर अमरीका कई दक्षिण पूर्व एशियाई देशों और चीन के बीच विवाद भड़का रहा है।

चीन को घेरने के लिए अमरीका एक सैन्य गठबंधन का निर्माण कर रहा है। इन सबके चलते अमरीका ने जापान की सैन्यवादी महत्वाकांक्षाओं को भी प्रोत्साहित किया है। अमरीका सोचे-समझे तरीके से समय-समय पर हिंदोस्तानी शासक वर्ग को भी चीन के खिलाफ़ भड़का रहा है और इसलिए उसे जटिल हथियारों की पेशकश कर रहा है ताकि वह चीन को घेरे। अमरीका का पहले से ही जापान, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया के साथ एक सैन्य गठबंधन है। यह ‘क्वैड’ (चतुष्कोण) की धारणा को बढ़ावा दे रहा है जिसके तहत - अमरीका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और हिन्दोस्तान का एक चतुर्भुज सैन्य गठबंधन होगा जो हिन्दोस्तान प्रशांत क्षेत्र पर निगरानी रखेगा।

2015 में, हिन्दोस्तानी राज्य ने ‘लुक ईस्ट’ नीति के नाम को जानबूझकर बदलकर, ‘एक्ट ईस्ट’ नीति की घोषणा की। इस नाम में बदलाव का मकसद था, चीन की सेना का हिन्दोस्तान-एशिया प्रशांत क्षेत्र में आक्रामक रूप से विरोध कर, एशिया में प्रमुख शक्ति के रूप में पहचाने जाने के इरादे को घोषित करना। 2016 में हिन्दोस्तानी नौसेना के जहाजों ने वियतनाम के बंदरगाहों का नियमित दौरा करना शुरू किया। हिन्दोस्तान ने दक्षिण चीन सागर में अमरीका और जापान के साथ “मालाबार” अभ्यास में हिस्सा लिया। इन सबके चलते हिन्दोस्तान और चीन के बीच तनाव बढ़ गया है।

25 जनवरी को आयोजित हिन्दोस्तान- आसियान शिखर सम्मेलन के दौरान, ‘समुद्री सहयोग और सुरक्षा’ के मुद्दे पर एक अलग सत्र आयोजित किया गया, जिसको हिन्दोस्तानी राज्य ने आसियान के साथ अपने संबंधों के लिए प्राथमिकता क्षेत्र घोषित किया।

दक्षिण पूर्वी एशिया में हिन्दोस्तानी बड़े पूंजीपति वर्ग की साम्राज्यवादी महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए हिन्दोस्तानी राज्य की “एक्ट ईस्ट” नीति एक संकेत है। हिन्दोस्तानी बड़े पूंजीपति चीन को बाज़ार और प्रभाव के क्षेत्रों के नज़रिये से अपना प्रतिद्वंद्वी मानते हैं। वे अपनी साम्राज्यवादी रणनीति अमरीकी रणनीतियों के अनुसार आगे ले जा रहे हैं। हिन्दोस्तान प्रशांत क्षेत्र में हिन्दोस्तानी सैन्य गतिविधियों के विस्तार से हिन्दोस्तान, चीन और दक्षिण पूर्व एशिया के सभी देशों के लोगों के लिए गंभीर खतरे पैदा हो गए हैं।

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एक्ट ईस्ट    रक्षा मंत्री    “गणतंत्र दिवस    Feb 16-28 2018    World/Geopolitics    War & Peace     2018   

पार्टी के दस्तावेज

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इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


पी.डी.एफ. डाउनलोड करनें के लिये चित्र पर क्लिक करें

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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