इंग्लैंड में नेशनल हेल्थ स्कीम को नई दिशा देने की मांग को लेकर हजारों लोगों ने विशाल प्रदर्शन किये

शनिवार 3 फरवरी, 2017 को इंग्लैंड के कोने-कोने से सैकड़़ों हजारों लोग सड़कों पर प्रदर्शन में उतर आये। इस दिन को नेशनल हेल्थ स्कीम (एन.एच.एस.-राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा) को नई दिशा देने और निजीकरण को बंद करने की मांग के दिन के रूप में घोषित किया गया। लंदन में भारी ठंड और बारिश के बावजूद 60,000 से अधिक लोगों ने शहर के बीचों-बीच डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर एक विशाल रैली में हिस्सा लिया। डाउनिंग स्ट्रीट पर इंग्लैंड के प्रधानमंत्री का कार्यालय स्थित है।

NHS

हेल्थ कैंपेन टुगेदर और पीपल्स असेंबली ने मिलकर लंदन में और इंग्लैंड की 54 अन्य जगहों पर इन प्रदर्शनों को आयोजित किया। इसके समर्थन में, उसी समय स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड में प्रदर्शन आयोजित किये गए। 

लंदन में आयोजित प्रदर्शन खास तौर से बहुत ही लड़ाकू थे, जोशपूर्ण भाषणों के साथ शुरू होते हुए, ये प्रदर्शन वाइटहॉल में एक रैली में तब्दील हो गए। कई वक्ताओं ने और स्वास्थ्य सेवा के मज़दूरों ने इस रैली को संबोधित करते हुए अपने अनुभव बताये और एन.एच.एस. के भविष्य को सुरक्षित करने, निजीकरण को बंद करने और एन.एच.एस. को बरकरार रखने के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन मुहैया कराने की मांग का समर्थन करने की सभी से अपील की।

“सभी के लिए स्वास्थ्य” और “एन.एच.एस. किसका? एन.एच.एस. हमारा!” यह नारा पूरे प्रदर्शन के दौरान गूंजता रहा। एन.एच.एस. की आगे की राह, निजीकरण की कोशिश और उसे अमीरों के लिए मुनाफ़े की मशीन बनाये जाने के मसले पर कई चर्चायें और गोष्ठियां आयोजित की गईं। इस प्रदर्शन में कई स्थानीय संघर्ष अभियानों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और ऐसे ही प्रदर्शन अपने इलाकों में आयोजित किये।

देशभर में स्वास्थ्य सेवा व्यवस्था में कई बड़े जन-विरोधी बदलाव किये जाने की ख़बर सुनकर ये प्रदर्शन आयोजित किये गए हैं। प्रेस में आई ख़बरों के अनुसार, इन बदलावों में एन.एच.एस. के स्थानीय अस्पतालों में दाखिल मरीजों को कठिन इलाज की विशेष (स्पेशलिस्ट) सेवा के लिए किसी अन्य अस्पताल में भेजे जाने का प्रस्ताव भी शामिल है। ऐसा करने से स्वास्थ्य सेवा अधिकतर मरीजों के लिये पहुंच से बाहर हो जाएगी और उनकी जान को ख़तरा भी बढ़ जायेगा। स्थानीय अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं कम करने के नाम पर कर्मचारियों की छंटनी की वजह से बाकी कर्मचारियों पर काम का बोझ बढ़ जायेगा।

नेशनल हेल्थ स्कीम (एन.एच.एस.-राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा)

एन.एच.एस. को 1948 में शुरू किया गया था। इसका गठन इस असूल के आधार पर किया गया था कि सभी के लिए अच्छी स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध होनी चाहिए, फिर भले ही उसकी आर्थिक स्थिति कैसी भी हो। प्रिस्क्रिप्शन देने, आंखों की जांच और दांतों की जांच जैसे अपवादों को छोड़कर अन्य सभी सेवाएं इंग्लैंड में रहने वाले सभी लोगों के लिए मुफ्त दी जाती हैं।

लेकिन हाल के कुछ वर्षों में इंग्लैंड की तमाम सरकारें एन.एच.एस. के लिए दी जाने वाली राशि में कटौती करती आई हैं। एन.एच.एस. अस्पतालों में लगातार डॉक्टरों, नर्सों, बेड्स और वृद्ध मरीजों के लिए स्वास्थ्य देखभाल पैकेज में कमी होती रही है। इंग्लैंड के एन.एच.एस. अस्पतालों ने पहले से तय किये गये दसों हजारों ऑपरेशन रद्द कर दिए हैं।

यह तो तय है कि एन.एच.एस. के लिए वित्तीय संसाधनों में और भी कटौती करने और उसका निजीकरण करने की तैयारी चल रही है।

“कीप अवर एन.एच.एस. पब्लिक, नार्थ ईस्ट” (हमारी स्वास्थ्य सेवा को सार्वजनिक ही रहने दो, नार्थ ईस्ट) अभियान की एक नर्स और संयोजक का कहना है कि “हमारी चिंताएं बहुत बढ़ी हैं। पिछले कई वर्षों से एन.एच.एस. के लिए कम वित्तीय संसाधनों का प्रावधान किया गया है। एन.एच.एस. की हालत के लिए नर्सों को दोष दिया जाता है, मरीजों को दोष दिया जाता है, आप्रवासियों को दोष दिया जाता है, तो कभी फ्लू को दोष दिया जाता है, जबकि हक़ीक़त यह है कि इसके लिए पूरी तरह से सरकार दोषी है। सभी के लिए स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित करना सरकार की ज़िम्मेदारी है। एन.एच.एस. के लिए सरकार को पर्याप्त वित्तीय संसाधन देना होगा और यह हर एक ब्रिटिश नागरिक का अधिकार है। बढ़ते पैमाने पर लोग एन.एच.एस. के मसले के बारे में जागरुक हो रहे हैं और इसको हरगिज कमज़ोर नहीं होने देंगे। पिछले 6 महीनों में हमने एन.एच.एस. के समर्थन के जनसमुदाय को बढ़ते हुए पैमाने पर आगे आते हुए देखा है।”

पिछले एक वर्ष से यह अभियान चल रहा है और तमाम इलाकों में लोगों ने अपनी मांगों को साफ तौर से सामने रखा है - “यह हमारा अस्पताल है, एन.एच.एस. हमारा है, और इन सेवाओं पर हमारा अधिकार है। लेकिन इसके बावजूद सरकार और उसके कमिश्नर इसमें लोगों से राय नहीं पूछ रहे हैं, जबकि यह सब कुछ अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवा देने के लिए बेहद ज़रूरी है।”

 

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