बी.ई.एस.टी. के मज़दूरों ने निजीकरण का विरोध किया

बृहन मुंबई इलेक्ट्रिक सप्लाई एंड ट्रांसपोर्ट (बी.ई.एस.टी.) दुनिया के सबसे बड़े शहरी यातायात उपक्रमों में से एक है। बृहन मुंबई महानगरपालिका उसका व्यवस्थापन करती है। 30 लाख से भी ज्यादा यात्री हर रोज़ बी.ई.एस.टी. की बसों से सफर करते हैं। 12 फरवरी, 2018 को बी.ई.एस.टी. की व्यवस्थापन कमेटी ने यह निर्णय घोषित किया कि 200 मिनी बसें, 200 वातानुकूलित मिनी बसें तथा 50 मिडी बसें निजी ठेकेदार से किराये पर ली जाएंगी। निजी ठेकेदार से ड्राईवर के साथ बसें किराये पर ली जाएंगी और उन बसों का रखरखाव भी वही ठेकेदार करेगा।

Striking BEST workers

इस निर्णय का बी.ई.एस.टी. में कार्यरत सभी मज़दूर यूनियनों की संयुक्त कृति समिति, बी.ई.एस.टी. संयुक्त कामगार कृति समिति ने विरोध किया है। कृति समिति ने ऐलान किया है कि प्रशासन के इस निर्णय के खिलाफ़ 15 फरवरी, 2018 से सभी मज़दूर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाएंगे। प्रशासन के इस तरह के कदमों का गत 2 वर्षों से बी.ई.एस.टी. के मज़दूर लगातार विरोध कर रहे हैं। पिछले वर्ष उन्होंने इससे असहमति प्रकट करने के लिये हड़ताल की थी।

हड़ताल का नोटिस मिलते ही बी.ई.एस.टी. प्रशासन ने औद्योगिक न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया। औद्योगिक न्यायालय ने तत्काल अंतरिम आदेश देकर बी.ई.एस.टी. के मज़दूरों पर, 5 मार्च को मुकर्रर अगली सुनवाई तक, हड़ताल न करने की पाबंदी लगा दी। मगर मज़दूरों की एकता तथा मुंबई के आम लोगों से उन्हें जो समर्थन मिल रहा है उसे देखकर इस वक्त न्यायालय ने बी.ई.एस.टी. प्रशासन को भी आदेश दिया है कि अगली सुनवाई तक वह किसी ठेकेदार से कोई समझौता न करे। हाल में कई बार देखा गया है कि देश के अलग-अलग न्यायालय दखलंदाज़ी करके किसी न किसी बहाने मज़दूरों से हड़ताल का आह्वान करने का हक़ छीन लेते हैं। मज़दूर एकता लहर मज़दूरों के हक़ों पर हो रहे इस तरह के हमलों की निन्दा करती है।

इस दरमियान, बी.ई.एस.टी. प्रशासन मज़दूरों पर अलग-अलग तरीकों से दबाव डाल रहा है। प्रशासन के निर्णय का मज़दूरों की एक यूनियन समर्थन कर रही है ऐसा दावा करके वह मज़दूरों की एकता को तोड़ने की कोशिश कर रहा है। बी.ई.एस.टी. प्रशासन ने 12 फरवरी, 2018 तक जनवरी 2018 के वेतन का भुगतान नहीं किया था जबकि गत वर्ष की हड़ताल के बाद बी.ई.एस.टी. प्रशासन ने यह वादा किया था कि हर महीने का वेतन अगले महीने की 10 तारीख के पहले दे दिया जायेगा।

बृहन मुंबई महानगरपालिका ने घोषित किया है कि अब वह बी.ई.एस.टी. को कोई भी आर्थिक मदद नहीं करेगी। 2018-19 के बजट में भी बृहन मुंबई महानगरपालिका ने बी.ई.एस.टी. के लिए कोई आर्थिक प्रावधान नहीं रखा है। बृहन मुंबई महानगरपालिका के कमिश्नर बार-बार यह मांग कर रहे हैं कि बी.ई.एस.टी. पहले उनके सुझाए गये “सुधार पैकेज” पर अमल करे जिसमें कई जन-विरोधी प्रावधान हैं जैसे: (1) यात्रियों के लिए बस का किराया बढ़ाना (2) कई बस रूटों को बंद करना (3) आंशिक निजीकरण (4) मज़दूरों के वेतनों में कटौती करना (डी.ए. हमेशा के लिए फिक्स करना, मेडिकल अलाउंस को ख़ारिज़ करना, मज़दूरों के लिए चलाई जा रही जारी कल्याणकारी योजनाएं बंद करना, आदि)। बी.ई.एस.टी. तथा बृहन मुंबई महानगरपालिका प्रशासन के इन हथकंडों का मज़दूर एकता लहर कठोर निन्दा करती है।

जिस बी.ई.एस.टी. पर मुंबई के लाखों मेहनतकश निर्भर हैं, उसको निजी ठेकेदार को किराये पर देना निजीकरण की दिशा में उठाया गया पहला निश्चित कदम है, इस सच्चाई को बी.ई.एस.टी. के मज़दूर बता रहे हैं। बृहन मुंबई महानगरपालिका देश की सबसे अमीर महानगरपालिकाओं में से एक है; जिसके 69 हजार करोड़ रुपये के फिक्स्ड डिपोजिट हैं!

बी.ई.एस.टी. या बृहन मुंबई महानगरपालिका के मज़दूर, अपनी जायज़ मांगों के लिए जब-जब हड़ताल करने की घोषणा करते हैं, तब-तब बृहन मुंबई महानगरपालिका का प्रशासन न्यायालय को भागता है और फिर न्यायालय दखलंदाज़ी करके मज़दूरों को हड़ताल करने से यह कहकर रोकता है कि “उनकी सेवा आवश्यक सेवा है”। मगर उसी “आवश्यक सेवा” को बेहतर बनाने के लिए जब धन की ज़रूरत होती है तब वे कहते हैं कि “पर्याप्त धन नहीं है”।

देश के सभी नागरिकों के लिये अच्छी गुणवत्तापूर्ण तथा किफ़ायती दरों पर सभी आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराना सरकार तथा उसके संस्थानों की प्राथमिक ज़िम्मेदारी है। मगर, केंद्र सरकार से लेकर महानगरपालिका व जिला परिषद, आदि सभी स्तर के सरकारी संस्थान अब हर प्रकार की सार्वजनिक सेवाओं का, जैसे कि पानी की अपूर्ति, यातायात, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, आदि का मूल्यांकन इस नज़रिये से कर रहे हैं कि क्या इन सेवाओं से सरकार को मुनाफ़ा हो रहा है या नहीं।

सभी मज़दूर यूनियनों तथा मेहनतकशों के सभी संगठनों को आवश्यक सेवाओं के प्रति इस जनहित विरोधी नज़रिये को चुनौती देनी चाहिये। उन सेवाओं के उपभोक्ताओं के साथ - सभी श्रमिकों तथा मेहनतकशों - को एकता बनाकर यह मांग उठानी चाहिये कि नागरिकों के प्रति इस प्राथमिक ज़िम्मेदारी को सरकार के सभी संस्थानों को निभाना चाहिए।

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पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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