फसल बीमा

संपादक महोदय, मज़दूर एकता लहर के 16-28 फरवरी, 2018 के अंक में बजट के खि़लाफ़ किसानों के विरोध पर प्रकाशित रिपोर्ट के संदर्भ में मैं यह पत्र लिख रहा हूं। हिन्दोस्तान के किसानों और लोगों के साथ किये गए एक बड़े फरेब का पर्दाफाश मैं आपके अख़बार के माध्यम से करना चाहता हूं।

जब भी हम किसान अपनी मांगों के लिए संघर्ष करते हैं, तब सरकार बड़े शोर-शराबे के साथ किसी योजना की घोषणा कर देती है। ऐसी ही एक योजना है “फसल बीमा योजना”। यदि सरकार के प्रचार तंत्र पर विश्वास किया जाये, तो ऐसा महसूस होगा कि सरकार ने किसानों पर एक बड़ा एहसान कर दिया है और अब किसानों को अपनी फसल बर्बाद हो जाने के मामले में कोई भी चिंता करने की ज़रूरत नहीं है। लेकिन हक़ीक़त कुछ और है। पिछले वर्ष महाराष्ट्र के वर्धा जिले के 97 हजार किसानों ने रिलायंस बीमा कंपनी के पास 14 करोड़ 85 लाख रुपये बीमा के प्रीमियम के रूप में जमा किये। इतनी ही रकम केंद्र और राज्य सरकार ने रिलायंस बीमा कंपनी को दी। इस तरह से कुल मिलाकर 30 करोड़ रुपये इस कंपनी को दिये गए हैं। इस वर्ष खरीफ फसल बुरी तरह से बर्बाद हो गयी है और 987 किसानों ने बीमा कंपनी से शिकायत की और बीमे की राशि की मांग की है। लेकिन आज तक एक भी किसान को बीमे की राशि नहीं दी गयी है।

फसल की कितनी बर्बादी हुई है और उसके लिए कितना बीमा बनता है इसका सर्वेक्षण करना बीमा कंपनी और सरकारी अधिकारियों के हाथों में होता है, और आम तौर पर बीमा के अधिकतर दावे खारिज कर दिए जाते हैं। रिपोर्टों के मुताबिक पिछले वर्ष महाराष्ट्र सरकार ने 3 हजार करोड़ रुपये की राशि प्रीमियम के रूप में जमा की थी लेकिन केवल 900 करोड़ रुपये की ही बीमा अदायगी की गयी। यह भी सूचना प्राप्त हुई है कि पिछले वर्ष केंद्र सरकार ने बीमा प्रीमियम के रूप में 20,700 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया था। लेकिन बीमा कंपनियों ने किसानों को केवल 4,000 करोड़ रुपये दिए थे। इससे यह साफ हो जाता है कि फसल बीमा योजना किसानों की सहायता करने के लिए नहीं बल्कि बीमा कंपनियों को मोटा फायदा पहुंचाने के लिए लायी गयी है। यह योजना हिन्दोस्तान के सभी मेहनतकश लोगों और किसानों के साथ एक बड़ा धोखा है।

आपका पाठक

एक किसान कार्यकर्ता, वर्धा, महाराष्ट्र

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बीमा कंपनी    खरीफ फसल    सर्वेक्षण    Mar 1-15 2018    Letters to Editor    Rights     2018   

पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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