कोरिया में “शांति ओलंपिक” : कोरिया के लोगों ने शांति और एकीकरण के लिए अपने प्रयास का ऐलान किया

फरवरी 2018 में दक्षिण कोरिया के प्योंगचांग में आयोजित शीतकालीन ओलंपिक (विंटर ओलंपिक) को दुनियाभर में एक ऐसी घटना के रूप में याद किया जायेगा, जब उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया के लोगों और सरकारों ने दुनिया को यह दिखा दिया कि वे किस कदर अपने देशों के बीच एकीकरण की तमन्ना रखते हैं। वे ऐसे हालात पैदा करना चाहते हैं जिसमें तमाम तरह की साम्राज्यवादी दखलंदाजी और धमकी तथा सैन्यीकरण से मुक्त अपने मुल्क में शांति के साथ रह सकें।

Korea winter olympics

प्योंगचांग ओलंपिक के उद्घाटन समारोह में उत्तर और दक्षिण कोरिया की टीमें कोरिया के एकीकरण की आकांक्षा के साथ, संयुक्त झंडे तले परेड में शामिल हुयीं

उत्तर कोरिया (डेमोक्रेटिक पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया) से आये उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल के नेतृत्व में 280 सदस्यीय खेल और सांस्कृतिक दल ने दक्षिण कोरिया में आयोजित शीतकालीन ओलंपिक में हिस्सा लिया।

8 फरवरी को आयोजित शीतकालीन ओलंपिक के उद्घाटन समारोह में उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया दोनों ही देशों की टीमें कोरिया के एकीकरण की आकांक्षा के साथ, एक ही संयुक्त झंडे के तले, परेड के लिए मैदान में उतरीं। पूरे स्टेडियम में लोगों ने खड़े होकर संयुक्त कोरियाई टीम का ज़ोरदार स्वागत किया। कोरियाई महिला आइस हॉकी टीम में उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया दोनों ही देशों के खिलाड़ी मौजूद थे।

उत्तर कोरिया के प्रतिनिधिमंडल ने दक्षिण कोरिया के नेतृत्व के साथ चर्चा की और उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन की ओर से दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जे-इन को उत्तर कोरिया का जल्दी से जल्दी दौरा करने का निमंत्रण दिया, ताकि मित्रता को मजबूत करने और इस इलाके में शांति सुनिश्चित करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके।

इस “शांति ओलंपिक” ने सारी दुनिया को दिखा दिया कि अमरीकी साम्राज्यवाद और उसके मित्र देशों द्वारा उत्तर कोरिया की सैनिक घेराबंदी और उस पर थोपे गए आर्थिक प्रतिबंध कोरियाई लोगों के अपराजय हौसले को कुचल नहीं पाए हैं। दक्षिण कोरिया के लोगों ने उत्तर कोरिया से आये अपने भाई-बहनों का जिस गर्मजोशी के साथ स्वागत किया उससे यह साफ नज़र आता है कि दोनों ही देशों के लोग शांति और एकीकरण के लिए एक जैसे तरस रहे हैं। 

“शांति ओलंपिक” अमरीकी साम्राज्यवाद और उसके जंग-फरोश मित्र देशों के मुंह पर एक करारा तमाचा है। अमरीकी साम्राज्यवाद और उसके मित्र देश उत्तर कोरिया के बारे में दुनियाभर में झूठा प्रचार करते आये हैं, और उत्तर कोरिया को एक “शैतान देश” तथा दुनिया के लिए एक ख़तरे के रूप में पेश करते आये हैं। उत्तर कोरिया के लोगों के खि़लाफ़ बर्बर आर्थिक प्रतिबंधों को जायज़ साबित करने के लिए ऐसे प्रचार का इस्तेमाल करते आये हैं। कोरियाई प्रायद्वीप में सैन्यीकरण को बढ़ाने और परमाणु जंग का ख़तरा भड़काने को जायज़ साबित करने के लिए इसका इस्तेमाल करते आये हैं। उत्तर कोरिया के इस बेहद बहादुर कदम ने दक्षिण कोरिया के लोगों और दुनियाभर के लोगों के सामने इस बात का पर्दाफाश कर दिया है कि इस इलाके में शांति के लिए ख़तरा कोरियाई लोगों के किसी भी तबके से नहीं बल्कि अमरीकी साम्राज्यवाद और उसके मित्र देशों से है।

जब शीतकालीन ओलंपिक चल रहे थे, उसी वक्त अमरीकी साम्राज्यवादियों ने उत्तर कोरिया की सैनिक घेराबंदी को और तेज़ कर दिया। उसने अपने परमाणु युद्धपोत कार्ल विन्सन और परमाणु रणनैतिक हवाई जहाजों को कोरियाई प्रायद्वीप में तैनात किया। इसके अलावा अमरीका ने जापान के साथ मिलकर एक सैनिक अभ्यास भी आयोजित किया जिसमें जापानी हवाई दल ने उत्तर कोरिया पर हमले का अभ्यास किया।

31 जनवरी को संयुक्त राष्ट्र के महासचिव को लिखे एक पत्र में उत्तर कोरिया के विदेश मंत्री ने कहा कि अमरीका कोरियाई प्रायद्वीप में अपनी सैनिक गतिविधियां तेज़ करके शीतकालीन ओलंपिक से शांति के लिए तैयार हुए सकारात्मक माहौल को पलटने की कोशिश कर रहा है। इस पत्र में कहा गया है कि उत्तर कोरिया की पहल की वजह से ही “शांति और स्थिरता, राष्ट्रीय सुलह और सहकार्य और कोरियाई प्रायद्वीप के एकीकरण के लिए हमने एक महत्वपूर्ण मोड़ लिया है, जहां कुछ ही दिन पहले जंग ख़तरा मंडरा रहा था”।

पत्र में आगे बताया गया है कि “अमरीकी प्रशासन लोगों के बीच यह झूठा प्रचार कर रहा है कि कोरियाई देशों के बीच आपसी-संवाद अमरीका द्वारा हमारे देश पर थोपे गए कड़े प्रतिबंधों और दबाव का नतीजा है, और कोरियाई प्रायद्वीप में हालातों को बिगाड़ने के लिए जानबूझकर परमाणु युद्धपोत की टुकड़ियां ऐसे समय पर तैनात कर रहा है, जब उत्तर और दक्षिण कोरिया एक साथ मिलकर शांति की राह पर चल पड़े हैं।”

पत्र में आगे कहा गया है कि “अमरीकी राज्य ने खुल्लम-खुल्ला धमकी दी है कि वह शीतकालीन ओलंपिक खेलों के तुरंत बाद उत्तरी कोरिया के खि़लाफ़ बड़े पैमाने पर आक्रामक संयुक्त सैनिक अभ्यास आयोजित करेगा।”

पत्र में आगे लिखा गया है कि “कोरियाई प्रायद्वीप में और आस-पास के इलाकों में हालातों को खराब करने और पूरी दुनिया को तबाहकारी परमाणु जंग में घसीटने की अमरीका की ख़तरनाक कार्यवाहियों के चलते संयुक्त राष्ट्र को चुप नहीं रहना चाहिए।”

पिछले कई दशकों से उत्तर कोरिया की सरकार शांति और राष्ट्रीय एकीकरण के लिए लगातार प्रयास करती आई है। कोरियाई लोगों की तमन्ना के चलते दक्षिण कोरिया के नेतृत्व ने भी कई बार शांति और मित्रता को मजबूत करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की तैयारी दिखाई है। लेकिन हर बार अमरीका ने इसमें बर्बर तरीके से दखलंदाज़ी की है, जानबूझकर सैनिक कार्यवाहियों के द्वारा तनाव को बढ़ाया है, ताकि शांति प्रक्रिया को नाकाम किया जा सके। इस समय भी अमरीकी साम्राज्यवाद यही काम करने पर तुला हुआ है, ताकि शांति प्रक्रिया अधूरी ही छोड़ दी जाये।   

इन घटनाओं से यह साफ हो जाता है कि कोरियाई प्रायद्वीप में शांति के लिए सबसे बड़ा ख़तरा अमरीकी साम्राज्यवाद और उसके मित्र देश हैं। अमरीकी साम्राज्यवाद कोरियाई लोगों के शांतिपूर्ण

एकीकरण के सख़्त खि़लाफ़ है। बाहरी साम्राज्यवादी दखलंदाज़ी से मुक्त शांति और पुनर्मिलन के लिए कोरियाई लोगों का संघर्ष पूरी तरह से जायज़ है।

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