तमिलनाडु के असंगठित क्षेत्र की महिलाओं द्वारा वेतन की मांग

5 मार्च, 2018 को पेन्न थोझिलालार संगम से जुडी 300 से भी अधिक महिलाओं ने तिरुवल्लुर रेलवे स्टेशन के पास बेहतर वेतन एवं लाभों के लिए एकजुट हुईं। इसमें असंगठित क्षेत्र में काम करने वाली घरेलू व निर्माण कामगार महिलाएं भी शामिल थीं, जो अलग-अलग जिलों से आयी थीं।

उनकी सबसे पहली मांग यह थी कि बजट का 5 प्रतिशत हिस्सा सामाजिक सुरक्षा के लिए आवंटित किया जाए तथा घरेलू मज़दूरों के लिए न्यूनतम वेतन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही, उन्होंने बेरोज़गार महिलाओं को रोज़गार मिलने तक, एक वर्ष के लिए बस यातायात के निःशुल्क पास जारी करने व सलाना 5000 रुपए भत्ता देने, मनरेगा को प्रभावपूर्ण रूप से लागू करने, विधवा मज़दूरों को समय पर पेंशन देने और उनके परिवार के सदस्यों के हित में अन्य सुविधाएं देने की मांग की।

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वेतन की मांग    Mar 16-31 2018    Struggle for Rights    Rights     2018   

पार्टी के दस्तावेज

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पूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि
उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई
विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है।
इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि
लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि
पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को।
यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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