तमिलनाडु में परिवहन श्रमिकों के उत्पीड़न के खि़लाफ़ विरोध

6 मार्च, 2018 को तमिलनाडु राज्य परिवहन निगम (टी.एन.एस.टी.सी.) की विभिन्न यूनियनों ने संयुक्त रूप से मदुरै स्थित मुख्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया और बर्खास्त किये गये 11 मज़दूरों की पुनर्नियुक्ति करने और उन पर दर्ज़ मुकदमों को वापस लेने की मांग की।

ज्ञात रहे कि इन मज़दूरों को जनवरी महीने में सप्ताह भर चली राज्यव्यापी हड़ताल के दौरान बर्खास्त किया गया था।

TN Transport workersएटक से जुड़ी यूनियन का कहना है कि इन 11 मज़दूरों को बर्खास्त किये 60 दिन बीत चुके हैं। यह टी.एन.एस.टी.सी. के स्थायी आदेशों के विपरीत है। स्थायी आदेशों के अनुसार एक मज़दूर की बर्खास्त की अवधि 30 दिनों से अधिक नहीं हो सकती है। इसके अलावा, टी.एन.एस.टी.सी. की यह कार्यवाही मद्रास उच्च न्यायालय के आदेशों के विरुद्ध जाती है। न्यायालय के उन आदेशों में टी.एन.एस.टी.सी. को संबंधित मज़दूरों पर दंडात्मक कार्यवाही के लिए मनाही थी।

मज़दूरों ने यह भी बताया कि टी.एन.एस.टी.सी. ने उन सभी मज़दूरों को दंडित किया, जिन्होंने सक्रियता से हड़ताल में हिस्सा लिया था। इन्हें अनुचित कारण देते हुए अलग-अलग शाखाओं में तबादला किया गया।

उन्होंने बताया कि इस एकजुट हड़ताल की वजह से ही सरकार पर दबाव पड़ा और सेवानिवृत्त मज़दूरों की रुकी हुई 750 करोड़ की बकाया राशि जारी हुई।

एटक तथा एल.पी.एफ. आदि ने इस विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया और स्पष्ट किया कि उनकी मांगों को पूरा नहीं किया गया तो विरोध को और तेज़ किया जाएगा।

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पार्टी के दस्तावेज

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इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


पी.डी.एफ. डाउनलोड करनें के लिये चित्र पर क्लिक करें

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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