जे.एन.यू. के छात्रों और शिक्षकों पर पुलिस का क्रूर हमला

23 मार्च, 2018 को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के हजारों छात्रों और जे.एन.यू. टीचर एसोसिएशन (जनूटा) के शिक्षकों ने मिलकर विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार से संसद तक एक विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया।

प्रशासन द्वारा थोपी जा रही अनिवार्य उपस्थिति की आवश्यकता के ख़िलाफ़ तथा उच्च शिक्षा के निजीकरण के उद्देश्य से सरकार द्वारा उठाये गये कदमों का ये छात्र और शिक्षक विरोध कर रहे थे। वे उस प्रोफेसर की तत्काल गिरफ्तारी और निलंबन की मांग कर रहे थे, जिस पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न का आरोप है। उनकी यह भी मांग थी कि विभिन्न विभागों के जिन अध्यक्षों ने अनिवार्य उपस्थिति के नियम को छात्रों पर जबरन थोपने का विरोध किया, जिसके चलते अब उनकी बदली के आदेश जारी किए गए हैं, उन आदेशों को वापस लिया जाए। जनूटा यह भी मांग कर रहा है कि शिक्षकों के ख़िलाफ़ कार्यवाही करने के लिए JNU student Protestएक समिति के गठन पर कार्यकारी परिषद के फैसले को वापस लिया जाए।

दिल्ली विश्वविद्यालय, जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय और अम्बेडकर विश्वविद्यालय के छात्र और शिक्षक भी इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए।

दक्षिण दिल्ली के आईएनए मार्किट के पास दिल्ली पुलिस ने विरोध प्रदर्शन को रोक दिया। प्रदर्शनकारियों में ज्यादातर युवतियां थीं, उन पर पुलिस ने क्रूरता से लाठियां बरसाईं और उन पर शारीरिक हमले भी किए गये। उनके ख़िलाफ़ वाटर केनन का इस्तेमाल किया गया। हमले इतने बर्बर थे कि उनके कपडे़ तक फट गए। उनमें से कई युवतियां घायल हुईं। जब पत्रकारों ने विरोध को कवर करने की कोशिश की तो पुलिस ने उन्हें पीटा और उनके कैमरे ज़ब्त कर लिये। 23 छात्रों को पुलिस ने गिरफ्तार किया और उन्हें कई घंटों तक हिरासत में रखा।

इससे पहले 19 मार्च को, जेएनयू के छात्रों ने, यौन उत्पीड़न के आरोपी प्रोफेसर के ख़िलाफ़ कार्यवाही की मांग करते हुए, वसंत कुंज पुलिस थाने के सामने विरोध प्रदर्शन किया था। उस समय भी, पुलिस ने छात्रों पर हमला किया था। जनूटा ने अपनी मांगों को आगे रखने के लिए सबसे पहले तीन दिन का सत्याग्रह विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित किया था।

मज़दूर एकता लहर के संवाददाताओं से बात करते हुए, विरोध प्रदर्शन करने वाले छात्रों और जे.एन.यू. के शिक्षकों ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा जे.एन.यू. और अन्य विश्वविद्यालयों को स्वायत्तता देने के हाल ही में लिये गये निर्णय को छात्रों तथा शिक्षकों की ओर से कड़े विरोध का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने समझाया कि किस तरह स्वायत्तता मिलने के बाद इन विश्वविद्यालयों को स्व वित्तपोषित पाठ्यक्रम चलाने (सेल्फ फाइनेंस कोर्स) और अलग-अलग कोर्सेज के लिये शुल्क लागू करने की छूट मिल जाएगी। उच्च शिक्षा के निजीकरण की दिशा में यह एक कदम है, जो युवाओं के एक विशाल हिस्से को उच्च शिक्षा की पहुंच से बाहर ले जाएगा।

उन्होंने यह भी बताया कि वे अनिवार्य उपस्थिति की आवश्यकता का विरोध कर रहे हैं क्योंकि जे.एन.यू. मुख्य रूप से एक स्नातकोत्तर संस्था है, जिसमें शोध करने वाले छात्रों को कई बार विभिन्न जगहों पर यात्रा करनी पड़ती है। शोध करने वाले छात्र अक्सर जे.एन.यू. और अन्य केंद्रीय विश्वविद्यालयों में पढ़ाते भी हैं। इस सब के चलते छात्रों के लिए अनिवार्य उपस्थिति के मानदंड को पूरा करना असंभव है। उन्होंने बताया कि कई विभागों के अध्यक्षों तथा अन्य शिक्षकों को निशाना बनाने के लिए प्रशासन द्वारा नोटिस जारी किये गए हैं, जो छात्रों पर अनिवार्य उपस्थिति के नियम को लागू करने से असहमत हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय के अधिकारियों द्वारा, प्रशासन के निर्णयों पर सवाल उठाने वाले, शिक्षकों और छात्रों को पीड़ित करने के अन्य प्रयासों के बारे में भी बताया।

अपनी सही मांगों के लिए लड़ने वाले छात्रों एवं शिक्षकों पर पुलिस द्वारा किए गए हमले की हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी कड़ी निंदा करती है।

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पार्टी के दस्तावेज

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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