शहीदी दिवस पर देशभर में जोशीले कार्यक्रम : शोषण मुक्त समाज के लिए संघर्ष तेज़ करेंगे!

23 मार्च, 1931 को शहीद भगत सिंह, शहीद सुखदेव और शहीद राजगुरु ने फांसी के फंदे को चूमा। देश के मज़दूर, किसान, औरत और नौजवान जो एक शोषण मुक्त समाज के लिए निरंतर संघर्ष करते आए हैं, इन शहीदों के दूरगामी विचारों से प्रेरणा लेते हैं।

23 मार्च, 2018 को देश के विभिन्न इलाकों में कम्युनिस्ट और प्रगतिशील लोगों ने रैलियां, सभाएं तथा गोष्ठियां आयोजित कीं। उन्होंने उपनिवेशवाद, साम्राज्यवाद और पूंजीवाद के खिलाफ़ हमारे लोगों के क्रांतिकारी संघर्ष से प्रेरणा ली। इस अवसर पर मज़दूरों, किसानों, महिलाओं, नौजवानों और छात्रों को एक ऐसे नये शोषण मुक्त हिन्दोस्तान के निर्माण के लिए लामबंध करने का उन्होंने प्रण लिया, जिसमें पूंजीवादी शोषण, साम्राज्यवादी लूट-खसोट, सामंती और जातिवादी दमन, महिलाओं का दमन और सांप्रदायिक हिंसा का नामो-निशान नहीं होगा।

नीचे हम इनमें से कुछ कार्यक्रमों का विवरण दे रहे हैं।

ग़दर पार्टी कार्यालय, नई दिल्ली

23 march shahidi diwash party office25 मार्च, 2018 को कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के केन्द्रीय कार्यालय पर शहीदी दिवस के अवसर पर एक सभा आयोजित की गई।

सभा की शुरुआत में, शहीद भगत सिंह, शहीद राजगुरु और शहीद सुखदेव की फोटो पर पुष्प अर्पित किए गए। ‘इंक़लाब-ज़िन्दाबाद!; ‘शहीद भगत सिंह, शहीद राजगुरु, शहीद सुखदेव अमर रहें!’, ‘शहीदों को लाल-सलाम!’, ‘पूंजीवाद-साम्राज्यवाद मुर्दाबाद!’, ‘समाजवाद-ज़िन्दाबाद!’ के नारों से माहौल जोशपूर्ण हो गया।

कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के वक्ता का. संतोष कुमार ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि शहीद भगत सिंह और उनके क्रांतिकारी साथी, हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसियेशन की अगुवाई में अंग्रेजों को भगाकर देश में समाजवाद की स्थापना करना चाहते थे। लेकिन 1947 में जब सत्ता का हस्तांतरण हुआ तब सत्ता अंग्रेजों के हाथों से निकलकर हिन्दोस्तान के पूंजीपतियों के हाथों में आ गयी और पूंजीवादी व्यवस्था को बरकरार रखा गया।

उन्होंने कहा कि हमारा समाज दो वर्गों में बंटा हुआ है। एक वर्ग है, पूंजीपति वर्ग जिसकी अगुवाई 150 इजारेदार घराने करते हैं। जो अपने खुदगर्ज हितों के लिए देश के अधिकतम मेहनतकशों के श्रम की लूट करते हैं। कांग्रेस पार्टी और भाजपा इस वर्ग की सेवा करती हैं। पूंजीपति वर्ग समय-समय पर अपनी हुकूमत को चलाने के लिये पार्टियां बदलते हैं और लोगों को बुद्धू बनाते हैं। मज़दूर वर्ग, जो देश की अधिकतम आबादी है, उसको शोषण-दमन और लूट का सामना करना पड़ता है। वह अपना श्रम बेचकर जीवन चलाता है।

उन्होंने कहा कि कम्युनिस्टों समेत अनगिनत क्रांतिकारियों ने इंसान द्वारा इंसान के शोषण से मुक्त समाज को बनाने के लिए संघर्ष किया।

उन्होंने बुलावा दिया कि देश के अधिकतम लोगों की दुखः तकलीफ़ों को दूर करने के लिए, वर्तमान पूंजीवादी व्यवस्था को ख़त्म करने के लिए, संगठित होकर संघर्ष करें और मज़दूरों, किसानों की राज्य सत्ता स्थापित करें।

सभा को अनेक वक्ताओं ने संबोधित किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि अंग्रेज हुक्मरानों की तरह हमारे हुक्मरान लोगों में फूट डालकर राज कर रहे हैं। पूंजीवादी व्यवस्था में मज़दूर नरक का जीवन जी रहे हैं। उन्हें पीने का पानी, घरों में शौचालय आदि बुनियादी ज़रूरतों की चीजें नहीं मिलती हैं। हम सभी को संगठित होकर इस व्यवस्था को बदलना है। हमें कांग्रेस पार्टी और महात्मा गांधी का इतिहास पढ़ाया जाता है। परंतु क्रांतिकारियों और उनके विचारों से अवाम को दूर रखा जाता है। यह एक सोची-समझी योजना है।

उन्होंने कहा कि मज़दूर बड़ी-बड़ी इमारतें बनाते हैं, लेकिन उनके सर पर छत नहीं है। किसान अनाज पैदा करते हैं लेकिन उन्हें खुदकुशी करनी पड़ती है। नौजवानों के पास नौकरी नहीं है। देश की संपत्ति को कौड़ियों के दाम पूंजीपतियों को बेचा जा रहा है। उन्होंने उपस्थित लोगों से आह्वान किया कि इस पूंजीवादी व्यवस्था को उखाड़कर समाजवादी व्यवस्था स्थापित करने के लिए आगे आएं। सभा का समापन क्रांतिकारी नारों के साथ हुआ।

मदनपुर खादर, दिल्ली

23 march shahidi diwashदक्षिण-पूर्वी दिल्ली स्थित, पुनर्वास कालोनी मदनपुर खादर में शहीदी दिवस के अवसर पर लोक राज संगठन द्वारा एक सभा आयोजित की गई।

सभा की शुरुआत शहीद भगत सिंह, शहीद सुखदेव और शहीद राजगुरु को पुष्पांजलि देकर की गई। सभास्थल ‘इंक़लाब ज़िन्दबाद!’, ‘समाजवाद ज़िन्दबाद!’, ‘पूंजीवाद मुर्दाबाद!’, ‘साम्राज्यवाद मुर्दाबाद!’ के नारों से गूंज उठा। इसके बाद एक क्रांतिकारी गीत गाया गया, जिसके बोल थे - रस्ते पे तुम्हारे चल के हम, आज़ाद अब देश करायेंगे, एक बार नहीं कई सैंकड़ों बार इस दार पर हम चढ़ जायेंगे...। सभा का संचालन कामरेड संतोष कुमार ने किया।

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के प्रवक्ता का. बिरजू नायक ने सभा को संबोधित करते हुये कहा कि आज़ादी से पूर्व हिन्दोस्तान की सत्ता के लिए तीन ताक़तें लड़ रही थीं। पहली ताक़त खुद अंग्रेज थे, जो देश पर कब्ज़ाकारी ताक़त थी, जो अपनी सत्ता को बनाए रखना चाहती थी। दूसरी ताक़त थे, देश के उभरते पूंजीपति और सामंत, जो अंग्रेजों को भगाकर खुद सत्ता पाना चाहते थे। तीसरी ताक़त थे, कम्युनिस्ट और क्रांतिकारी, जो अंग्रेजों को भगाकर, मज़दूरों-किसानों की सत्ता स्थापित करने के लिए लड़ रहे थे।

पूंजीपति वर्ग की नुमाइंदगी कांग्रेस पार्टी और मुस्लिम लीग करती थी। मोहनदास करमंचद गांधी, जवाहर लाल नेहरू, सरदार वल्लभ भाई पटेल, मोहम्मद अली जिन्ना, मौलाना आज़ाद, इत्यादि इस वर्ग के नेता थे। वे मज़दूरों और किसानों की मदद से अंग्रेजों को भगाकर सत्ता अपने हाथों में लेना चाहते थे। वे नहीं चाहते थे कि मज़दूर और किसान सत्ता को अपने हाथ ले लें। इसलिए पूंजीपति वर्ग अंग्रेजों के साथ लड़ता भी था और समझौता भी करता था।

मज़दूरों, किसानों और क्रांतिकारी बुद्धिजीवियों का नेतृत्व कम्युनिस्ट और विभिन्न क्रांतिकारी दल कर रहे थे। वे काले अंग्रेज यानी पूंजीपतियों और सामंतों के हाथों में सत्ता जाने के ख़िलाफ़ थे। वे क्रांति के ज़रिए, अंग्रेजी राज के ढांचे को ख़त्म करके, उसकी जगह पर मज़दूरों और किसानों का राज लाना चाहते थे।

कामरेड बिरजू नायक ने कहा कि मज़दूरों और किसानों का सपना आज भी अधूरा है। लेकिन हम आशावान हैं। हमें मज़दूरों, किसानों और नौजवानों को संगठित करना है एक नए शोषण-मुक्त हिन्दोस्तान की स्थापना करने के लिए।

सभा को कई अन्य वक्ताओं ने संबोधित किया। वक्ताओं ने कहा कि शहीद भगत सिंह, शहीद सुखदेव और शहीद राजगुरु आज भी नौजवानों के आदर्श हैं। उन्होंने बताया कि असेंबली में बम फेंकने के पीछे भगत सिंह और उनके साथियों का राजनीतिक मकसद था। वे देश की आवाम में पब्लिक सेफ्टी बिल और ट्रेड  डिस्प्यूट बिल का पर्दाफाश करना चाहते थे।

उन्होंने कहा कि आज काले अंग्रेजों यानी पूंजीपतियों का राज है। 1947 में सत्ता का हस्तांतरण अंग्रेजों के हाथों से पूंजीपतियों के हाथों में हुआ। इन 70 सालों में सरमायदार अलग-अलग पार्टी के ज़रिए अपना राज चलाते आए हैं। हमें लोगों को जागृत करना है कि पार्टी बदलने से समस्याओं का हल नहीं निकलेगा। हमें पूंजीपतियों के राज की जगह मज़दूरों और किसानों का राज स्थापित करना होगा।

23 march 2018 Ramgarhरामगढ़, राजस्थान

लोक राज संगठन तथा हिन्द नौजवान एकता सभा ने रामगढ़ स्थित कन्या विद्यालय में शहीदी दिवस के अवसर पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया। सैकड़ों की संख्या में नौजवानों, स्कूली छात्र-छात्राओं ने बड़े उत्साह से इसमें हिस्सा लिया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉक्टर कृष्ण नीमेरा, पशु चिकित्सा प्रभारी रामगढ; नथूराम होदकासिया, अध्यक्ष ग्राम विकास समिति रामगढ़; दयाराम सारण, प्रदेश उपाध्यक्ष पशु चिकित्सा कर्मचारी संघ राजस्थान और कामरेड हनुमान प्रसाद शर्मा ने की। कार्यक्रम का संचालन कामरेड अशोक वर्मा ने किया।

अध्यक्षमंडल सहित कार्यक्रम को संबोधित करने वालों में थे - का. ओमप्रकाश सेंगर, कुलदीप नोखवाल, प्रधानाध्यापक भगत सिंह उच्च प्राथमिक विद्यालय रामगढ; अध्यापक मुकेश सोनी, भीम सिंह सारण और कन्हैया लाल जैन।

वक्ताओं ने कहा कि हमें मज़दूरों और किसानों को लामबंध करके एक शोषण-विहीन समाज स्थापित करना होगा। जिसमें मनुष्य द्वारा मनुष्य के शोषण की कोई गुंजाइश नहीं होगी। सभी वक्ताओं ने आज के परिप्रेक्ष्य में शहीदों के विचारों की प्रासंगिकता पर जोर दिया।

कामरेड हनुमान प्रसाद शर्मा ने स्वतंत्रता संग्राम के बारे में बताते हुए 1857 से लेकर 1947 तक और 1947 के बाद, ब्रिटिश साम्राज्य द्वारा तैयार किए गए पूंजीपति वर्ग के बारे में बताया जो शक्ल-सूरत से हिन्दोस्तानी नज़र आता है, परंतु उसकी हुकूमत ब्रिटिश साम्राज्यवादियों की हुकूमत जैसी ही है। अपने शासन को चलाने के लिए उसने फूट डालो और राज करो की नीति अपनायी है।

1857 की क्रांति के सकारात्मक पहलू पर बात रखते हुए उन्होंने बताया कि किसानों, सन्यासियों, सैनिकों और देशभक्त राजाओं, रानियों ने एकजुट होकर बहादुर शाह जफर के नेतृत्व में ब्रिटिश साम्राज्य के ख़िलाफ़ विद्रोह किया था। बहादुर शाह जफर ने एक हुक्मनामा जारी किया था कि ब्रिटिश साम्राज्य को भगाने के बाद हिन्दोनी लोग खुद देश के मालिक बनेंगे। अंग्रेजों ने गद्दारों की मदद से इस ग़दर को बेरहमी से कुचल दिया।

एक अंग्रेज अफ़सर के नेतृत्व में 1885 में कांग्रेस पार्टी का गठन हुआ। तभी से हिन्दोस्तान में साम्राज्यवादी और पूंजीवादी राज्यसत्ता को चलाने वाला वर्ग पैदा करना प्रारंभ कर दिया। हिन्दोस्तान में पूंजीपति वर्ग फलने-फूलने लगा, जिसका नेतृत्व कांग्रेस पार्टी और मुस्लिम लीग करती थी।

इस बीच मज़दूरों और किसानों के अनेक संघर्ष हुए। हजारों की संख्या में क्रांतिकारी पैदा हुए। इन्हीं में भगत सिंह, सुखदेव व राजगुरु थे। क्रांतिकारियों का लक्ष्य था एक शोषण मुक्त हिन्दोस्तान की स्थापना करना। वे मार्क्सवाद-लेनिनवाद से प्रेरित हुये। वे मज़दूरों और किसानों को संगठित करने लगे। पब्लिक सेफ्टी बिल और ट्रेड डिस्प्यूट बिल के विरोध में भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने असेंबली में बम फेंका, पर्चे बांटे और अपनी गिरफ्तारी दी। जनता से बर्तानवी साम्राज्यवाद के ख़िलाफ़ खड़े होने का आह्वान किया।

कामरेड हनुमान प्रसाद ने जोर दिया कि एक शोषण विहीन समाज की स्थापना के लिए मज़दूरों, किसानों और नौजवानों को संगठित करना होगा। उन्होंने आह्वान किया कि मार्क्सवाद-लेनिनवाद से लैस होकर हम सबको पार्टी को मजबूत करके मज़दूरों, किसानों और नौजवानों को संगठित करना होगा।

पूंजीवादी ताक़तें आज क्रांतिकारी शहीदों को एक देवपुरुष के रूप में स्थापित करने पर लगी हुई हैं, ताकि उनके क्रांतिकारी विचारों को खत्म किया जा सके। हमें पूंजीपतियों के इस षड्यंत्र का पर्दाफाश करना होगा और मज़दूरों, किसानों तथा नौजवानों को राजनीतिक सत्ता अपने हाथों में लेने के लिये लामबंध करना होगा।

इस कार्यक्रम में भगत सिंह विद्यालय की छात्रों-छात्राओं ने क्रांतिकारी गीतों की प्रस्तुति देकर विचार गोष्ठी को और रोचक बना दिया। मुक्ता, संजू, सलोनी, कविता, आइना, गरिमा, प्रियंका, पायल, खुशी, तमन्ना, रमन, राज किरण, आदि छात्राओं ने क्रांतिकारी गीतों की प्रस्तुति से विचार गोष्ठी में चार चांद लगाए।

23 march shahidi diwash_kurushetraकुरुक्षेत्र, हरियाणा

शहादत दिवस के अवसर पर शहीद भगत सिंह दिशा ट्रस्ट, जन संघर्ष मंच हरियाणा व इसके सहयोगी संगठनों ने शहीद भगत सिंह दिशा संस्थान में स्थित शहीद भगत सिंह की कांस्य प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। उसके बाद, मज़दूरों, कर्मचारियों और नौजवानों व महिलाओं का विशाल जुलूस निकाला गया। यह जुलूस स्थानीय रामलीला ग्राउंड में पहुंचकर एक जनसभा में बदल गया। जिसकी अध्यक्षता कामरेड फूल सिंह जी ने की।

जनसभा के मुख्य वक्ता कामरेड श्याम सुंदर ने कहा कि शहीद भगत सिंह और उनके साथियों ने देश के मज़दूरों को चेतावनी दी थी कि यदि उनके द्वारा एकजुट होकर अंग्रेजों के राज को उखाड़ा नहीं गया तो किसी दिन पता चलेगा कि देश आज़ाद हो गया और वह मज़दूरों, किसानों, दलितों व महिलाओं के लिए मनहूस आज़ादी होगी। उनकी यह चेतावनी बिल्कुल सच साबित हुई है। उन्होंने सच्ची आज़ादी के लिए कार्ल मार्क्स व लेनिन की विचारधारा के आधार पर देश में इंक़लाब ज़िंदाबाद का नारा दिया था। जिसका अर्थ था कि मौजूदा पूंजीवादी शोषण मूलक व्यवस्था को ध्वस्त करके देश में समाजवाद की स्थापना की जाए। देश में गरीबी, बेरोज़गारी, भ्रष्टाचार, महिलाओं पर जुल्म और दलितों पर अत्याचार ख़त्म करने का यही एकमात्र रास्ता है।

श्रमजीवी संघर्ष मोर्चा के संयोजक पाल सिंह ने कहा कि शहीद भगत सिंह आज़ादी आंदोलन में मेहनतकश जनता के सच्चे प्रतिनिधि थे। जब अंग्रेजों की सरकार द्वारा जन-विरोधी व मज़दूर-विरोधी ट्रेड डिस्प्यूट बिल व पब्लिक सेफ्टी बिल पास किया जा रहा था, तो शहीद भगत सिंह व उनके साथियों ने इसका डटकर विरोध किया था। आज मौजूदा सरकार भी अंग्रेजों की तरह मज़दूर-विरोधी कानून बनाती जा रही है और जनता को धर्म और जाति के नाम पर लड़ा रही है। प्राध्यापक मलखान सिंह ने कहा कि वर्तमान शोषण और जुल्म पर आधारित व्यवस्था को ख़त्म करने के लिए आगे बढ़ना होगा।

समता मूलक महिला संगठन की संयोजिका डा. सुनीता त्यागी ने महिलाओं पर बढ़ते हुए अत्याचारों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पूंजीवादी ढांचे में महिलाओं पर हर दिन वीभत्स घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। अन्ध राष्ट्रवादी सोच व महिलाओं के प्रति रूढ़िवादी विचारों को नकारकर वर्गीय समाज के ख़िलाफ़ समतामूलक समाज बनाने का उन्होंने आह्वान किया।

मंच के सलाहकार डाक्टर सी.डी. शर्मा ने कहा कि हमें इस शोषण मूलक पूंजीवादी व्यवस्था को ध्वस्त करने के लिए शहीद भगत सिंह के वैज्ञानिक रास्ते को अपनाना होगा व जन-जन में ले जाना होगा।

मज़दूर सहयोग केन्द्र गुड़गांव के प्रधान रामनिवास ने कहा कि अपने अधिकारों के लिए संघर्षरत मज़दूरों का दमन पूंजीपति वर्ग और सरकार मिलकर करते हैं और झूठे केस बनाकर जेलों में बंद कर देते हैं। 13 मारुति मज़दूरों को कत्ल जैसे झूठे केसों में फंसाकर आजीवन कारावास की सज़ा देकर जेल में बंद करना इसका उदाहरण है। उन्होंने कहा कि चाहे जो भी सरकार आए वह मज़दूरों के शोषण-दमन को तेज़ करने का ही काम करती है, क्योंकि पूंजीवादी शासन में सरकार पूंजीपति वर्ग के तमाम हितों का प्रबंधन करने वाली कमेटी के सिवाय और कुछ नहीं होती।

जन संघर्ष मंच हरियाणा की महासचिव सुदेश कुमारी एडवोकेट, शहीद भगत सिंह दिशा ट्रस्ट की सचिव चन्द्र रेखा व ट्रस्ट के वरिष्ठ सदस्य डाक्टर लहना सिंह, एस.ओ.एस.डी. संयोजिका कविता विद्रोही, आंगनवाड़ी वर्कर एण्ड हैल्पर्स यूनियन की जिला प्रधान परमजीत कौर और जिला सचिव कलावती, निर्माण कार्य मिस्त्री यूनियन के प्रधान करनैल सिंह ने भी अपने विचार रखे। सभा का समापन कामरेड फूल सिंह के वक्तव्य से हुआ।

23 March_Madhosinghanaमाधोसिंघाना, सिरसा, हरियाणा

शहीदी दिवस के अवसर पर, माधोसिंघाना गांव में लोक राज संगठन ने एक विचार गोष्ठी आयोजित की। इस गाष्ठी में नौजवानों ने उत्साह से भाग लिया। सभा का संचालन का. कुलदीप ने किया। शहीद भगत सिंह, शहीद राजगुरु और शहीद सुखदेव को श्रद्धांजलि देकर सभा आरंभ हुई।

सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने शहीदों की जीवनी पर प्रकाश डाला व क्रांति के रास्ते का जिक्र किया। उन्होंने पूंजीवाद पर कठोर चोट करते हुये, राज्य की मज़दूर-विरोधी व किसान-विरोधी नीतियों के खिलाफ़ एकजुट होने के लिए आह्वान दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि पूंजीवाद को उखाड़कर मज़दूरों और किसानों को समाजवाद का निर्माण करना होगा। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने एक इंकलाबी गीत पेश किया।

वक्ताओं ने हिन्दोस्तान की वर्तमान हालत से उपस्थित लोगों को अवगत कराया। उन्होंने पूंजीवाद का पर्दाफाश करते हुये नौजवानों से क्रांतिकारी बनने का आह्वान किया।

का. दुनीचन्द ने वर्तमान राज्य व्यवस्था पर अपनी बात रखी। उन्होंने समझाया कि सिर्फ एक कम्युनिस्ट पार्टी ही मज़दूरों, किसानों और तमाम शोषित-पीड़ित लोगों को क्रांति का रास्ता दिखा सकती है। उन्होंने सभी साथियों से आह्वान किया कि लोगों को अपने अधिकारों के लिये लामबंध करें। मज़दूर-विरोधी, किसान-विरोधी और समाज-विरोधी हमलों के ख़िलाफ़ ‘एक पर हमला सब पर हमला’ के नारे के इर्दगिर्द एकजुट होना होगा। राज्य को मुंहतोड़ जवाब देना होगा।

Jakhal Public Meeting 23 marchजाखल, हरियाणा

जन चेतना मंच जाखल ने जाखल मंडी में ‘एक शाम शहीदों के नाम’ शीर्षक से एक कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें जिले के विभिन्न गणमान्य लोगों के साथ सैकड़ों की संख्या में लोगों ने भाग लिया। मंच का संचालन सेंट जोजेफ स्कूल के प्रवक्ता प्रेम सिंह नेगी ने किया।

सेंट जोजेफ स्कूल टोहाना के छात्र सिमरप्रीत सिंह ने ‘मेरा रंग दे बसंती चोला...; गीत गाया। के.एम. सरस्वती स्कूल जाखल और देशभगत यादगार मंच के कलाकारों ने एक जोशीला सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किया।

शहीद उधम सिंह क्लब तलवाडा, अंबेडकर अधिकार मंच, भगत सिंह नौजवान सभा, श्री संगतसर गुरुद्वारा चांदपुरा साहिब, शहीद भगत सिंह क्लब और प्रेस क्लब जाखल के सदस्यों ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया।

इसके पहले सुबह तलवाडा में शहीद उधम सिंह तथा शहीद भगत सिंह, शहीद सुखदेव व शहीद राजगुरु को याद करते हुए एक कार्यक्रम हुआ।

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सांप्रदायिक हिंसा    प्रगतिशील    23 मार्च    1931    शहीद भगत सिंह    Apr 1-15 2018    Struggle for Rights    Rights     2018   

पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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