कठुआ व उन्नाव के बलात्कार कांडों के गुनहगारों को कड़ी से कड़ी सज़ा की मांग

महिला संगठनों और नौजवान संगठनों ने 12 अप्रैल, 2018 को नयी दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक जुझारू विरोध प्रदर्शन किया, जिसमें जम्मू के कठुआ और उत्तर प्रदेश के उन्नाव में हुये बलात्कार कांडों के गुनहगारों को कड़ी से कड़ी सज़ा देने की मांग उठाई गयी।

Protest action by women's groups
Protest action by women's groups at the Parliament on 12 April, 2018

सैकड़ों की संख्या में पुरुष, महिलाएं, छात्र और नौजवान जंतर-मंतर पर एकत्रित हुए और जलूस में संसद की ओर आगे बढे़। एडवा, एन.एफ.आई.डब्ल्यू., एपवा, पुरोगामी महिला संगठन, सी.एस.डब्ल्यू., स्वास्तिक महिला समिति, प्रगतिशील महिला संगठन, ए.आई.एस.ए., एस.एफ.आई और अन्य संगठनों ने विरोध प्रदर्शन में भाग लिया। संसद पर पहुंचकर, एक जनसभा हुयी, जिसे सहभागी संगठनों के नेताओं ने संबोधित किया।

वक्ताओं ने एक आवाज़ में, कठुआ में 8 वर्षीय बच्ची आसिफा के बेरहम बलात्कार और कत्ल तथा उन्नाव में युवती के सामूहिक बलात्कार और उत्पीड़न की कड़ी निंदा की। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इन दोनों कांडों में, राज्य के नेता और ऊंचे-ऊंचे अफ़सर और सुरक्षा बल के अफसर लिप्त हैं, इन बीभत्स अपराधों को करने में और फिर अपराधियों को बचाने में। उन्होंने राज्य और सत्ता पर बैठी सरकारों की कड़ी निंदा की, जो महिलाओं को सुरक्षा देने में तो पूरी तरह नाकामयाब हैं, परन्तु बलात्कारियों को बचाने में तत्परता से काम करते हैं। अनेक वक्ताओं ने इस बात पर हैरानी और नफ़रत प्रकट की कि हमारे हुक्मरान लगातार समाज में कितना सांप्रदायिक बंटवारा करते रहते हैं, जिसकी वजह से सत्ताधारी पार्टी के प्रश्रय के साथ गुंडों के गिरोह खुलेआम सड़कों पर निकलकर बलात्कारियों और कातिलों की हिफ़ाज़त कर रहे हैं। राज्य और हुक्मरानों पर लोगों के गुस्से को भटकाकर, इन अपराधों का विरोध करने वालों को सांप्रदायिक रंगों में रंगा जा रहा है और “पाकिस्तान से प्रेरित” बताया जा रहा है। वक्ताओं ने अपराधियों को कड़ी से कड़ी सज़ा देने की मांग की।

एडवा, एन.एफ.आई.डब्ल्यू., एपवा, पुरोगामी महिला संगठन, स्वास्तिक महिला समिति, सी.एस.डब्ल्यू., प्रगतिशील महिला संगठन तथा कई नौजवान संगठनों और छात्र संगठनों के नेताओं ने सहभागियों को संबोधित किया।

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पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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