हिन्दोस्तान का मज़दूर वर्ग मई दिवस से प्रेरणा लेता आ रहा है!

हुक्मरान वर्ग के लगातार बढ़ते हमलों के ख़िलाफ़ हिन्दोस्तान का मज़दूर वर्ग बड़ी बहादुरी के साथ खुद से संगठित होने और अपने लिए काम की बेहतर हालत के अधिकार की हिफ़ाज़त में संघर्ष कर रहा है। यातायात, निर्माण, रेलवे, आई.टी. और अन्य सभी क्षेत्रों के मज़दूर, आंगनवाडी कर्मचारी, शिक्षक और डॉक्टर सभी मेहनतकश बड़े-बड़े प्रदर्शनों में सड़कों पर उतर रहे हैं। आने वाला मई दिवस सभी मेहनतकशों के लिये अपनी एकता को मज़बूत करते हुए, अपने संघर्ष को नयी ऊंचाई पर ले जाने का एक महान प्रेरणा स्रोत साबित होगा।

A scene of the 1886 Haymarket affair
A scene of the 1886 Haymarket affair, Chicago, USA

हिन्दोस्तान के हुक्मरान वर्ग द्वारा मज़दूरों के अंतर्राष्ट्रीय दिवस को, मई दिवस को कम करके आंकने की कोशिशों के बावजूद हिन्दोस्तान के मेहनतकश लोग इसके महत्व को पूरी तरह से समझते हैं। 

1 मई, 1886 को शिकागो शहर की सड़कों पर मज़दूरों का सैलाब उतर आया था। शहर के संगठित मज़दूर आंदोलन के बुलावे पर सभी उद्योगों के मज़दूरों ने अपने औजार छोड़ दिए और प्रदर्शन में सड़कों पर उतर आये। मज़दूर आंदोलन के इतिहास में मज़दूर वर्ग का वह सबसे प्रभावशाली प्रदर्शन था। अमरीका में 8 घंटे के कार्य दिवस का आंदोलन चोटी पर पहुंचकर 1 मई, 1886 की हड़ताल में तब्दील हुआ। मज़दूर वर्ग के संघर्ष के इतिहास में यह एक सुनहारा अध्याय साबित हुआ।

शिकागो के मज़दूरों के इस विजयी मोर्चे की टक्कर पूंजीपति मालिकों और पूंजीवादी राज्य की सांझा ताक़त के साथ थी, जो मज़दूर वर्ग के अगुवा नेताओं को ख़त्म कर डालना चाहती थी और उम्मीद कर रही थी कि इससे पूरे मज़दूर आंदोलन को ही ख़त्म किया जा सकेगा। 3-4 मई, 1886 की घटनायें जिनका नतीजा हे मार्केट मामले के नाम से जाना जाता है, ये घटनायें सीधे तौर पर 1 मई की हड़ताल का ही परिणाम थीं।

3 मई को शिकागो में मैक कोर्मिक रीपर वर्क्स के मज़दूरों की शांतिपूर्ण हड़ताल पर पुलिस ने बेरहमी से हमला किया। इस हमले में 6 मज़दूर मारे गए। पूरी तरह से शांतिपूर्ण हड़ताल पर पुलिस के इस भड़काऊ हमले के ख़िलाफ़ 4 मई को मज़दूरों ने हे मार्केट चैराहे पर प्रदर्शन आयोजित किया। यह सभा पूरी तरह से शांतिपूर्ण रूप से ख़त्म होने ही वाली थी कि पुलिस के लिए काम कर रहे एक उपद्रवी एजेंट ने जमा हुए लोगों के बीच एक बम फेंक दिया। पुलिस और उसके उपद्रवी एजेंट द्वारा सुनियोजित तरीके से आयोजित इस अराजकता और हिंसा में कई और मज़दूरों की जान गयी और सैकड़ों घायल हो गये।

इसके बाद अमरीका के पूंजीवादी मीडिया ने मज़दूरों के ख़िलाफ़ जबरदस्त अभियान शुरू किया, उनको अराजकतावादी और गुनहगार करार दिया तथा उनके लिये फांसी की सज़ा देने की मांग उठाई। 7 मज़दूरों को फांसी की सज़ा सुनाई गयी। इनमें से एक ने आत्महत्या कर ली और 4 मज़दूरों को फांसी पर चढ़ाया गया। कुछ समय बाद ही इस बात का पर्दाफाश हो गया कि यह पूरा मुकदमा ही फरेबी था। कुछ समय के लिए अमरीका का पूंजीपति वर्ग मज़दूर वर्ग के अधिकारों के आंदोलन को बेइन्तहा हमलों के बल पर कुचलने में कामयाब हो गया। लेकिन, वह मज़दूरों के लड़ाकू ज़ज़्बे को ख़त्म नहीं कर पाया और मज़दूरों ने 1 मई, 1890 को पूरे अमरीका में अपनी रैलियां आयोजित करने का फैसला किया।

14 जुलाई, 1889 को बेस्टाइल किले पर फतह की 100वीं सालगिरह पर दुनियाभर के संगठित मज़दूर वर्ग आंदोलन के नेता पेरिस में जमा हुए और उन्होंने द्वितीय इंटरनेशनल नामक संगठन का गठन किया। हालांकि फ्रेडरिक एंगेल्स इस सभा में खुद शामिल नहीं हो पाए लेकिन उन्होंने इसकी कार्यवाही को दिशा देने में अहम भूमिका अदा की। कार्ल मार्क्स और फ्रेडरिक एंगेल्स द्वारा गठित प्रथम इंटरनेशनल के समय से मार्क्सवाद ने मज़दूर आंदोलन में मौजूद अराजकतावाद पर और अन्य टटपूंजिया धाराओं पर निर्णयात्मक जीत हासिल की थी। यूरोप और अमरीका के सभी पूंजीवादी देशों में मज़दूर वर्ग की पार्टियां उभर कर आई और मजबूत हुईं। कई देशों में राजनीतिक अधिकारों के लिए चल रहा मज़दूर वर्ग का आंदोलन मजबूत हुआ। इन हालतों में द्वितीय इंटरनेशनल के पेरिस महाअधिवेशन ने ऐलान किया कि 1 मई, 1890 को दुनियाभर में अंतर्राष्ट्रीय मज़दूर दिवस के रूप में मनाया जायेगा। 

पेरिस महाअधिवेशन ने यह प्रस्ताव पारित किया कि “यह महाअधिवेशन दुनियाभर में एक अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शन आयोजित करने का फैसला लेता है, ताकि दुनियाभर में एक निर्धारित दिन, निर्धारित समय पर दुनियाभर के सभी मेहनतकश अपने हुक्मरानों से यह मांग करें कि वे कानूनी तौर से 8 घंटे के काम का दिन निर्धारित करें और पेरिस महाअधिवेशन के अन्य फैसलों को लागू करें। चूंकि अमेरिकन फेडरेशन ऑफ लेबर ने 1888 में सैंट लुइस में आयोजित अपने अधिवेशन में 1 मई, 1890 के दिन को अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शन दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया है, हम इस फैसले को स्वीकार करते हैं। दुनियाभर के सभी देशों के मज़दूरों को अपने देश में मौजूद हालतों के अनुसार प्रदर्शन का आयोजन करना चाहिए”।

मई दिवस के इतिहास का कम समय के कार्य दिवस के संघर्ष के साथ करीबी रिश्ता है। यह मांग मज़दूर वर्ग के लिए राजनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण मांग है। ब्रिटेन, अमरीका और यूरोपीय देशों में फैक्ट्री व्यवस्था के साथ इस संघर्ष की शुरुआत हुई।

1 मई, 1890 को कम्युनिस्ट घोषणापत्र के चैथे जर्मन संस्करण की प्रस्तावना में अंतर्राष्ट्रीय मज़दूर वर्ग संगठनों के इतिहास की समीक्षा करते हुए एंगेल्स के पहले अंतर्राष्ट्रीय मई दिवस के महत्व के बारे में यह लिखा :

“जब मैं यह वाक्य लिख रहा हूं, यूरोप और अमरीका के श्रमजीवी अपनी ताक़त का जायज़ा ले रहे हैं। इतिहास में पहली बार श्रमजीवी एक सेना, एक झंडे के तले और एक फौरी लक्ष्य के लिए लामबंध हुए हैं: वह लक्ष्य है कानूनी तौर पर 8 घंटे का कार्य दिवस... आज जो नज़ारा हम देख रहे हैं वह दुनियाभर के तमाम पूंजीपतियों और ज़मीनदारों को यह अहसास दिलाएगा की हक़ीक़त में दुनियाभर के सारे मज़दूर एकजुट हुए हैं। काश इस नज़ारे को अपनी आँखों से देखने के लिए आज माक्र्स मेरे साथ होते”!

उस समय से दुनियाभर के मजदूर 1 मई को पूंजीवाद के ख़िलाफ़ और तमाम तरह के शोषण से मुक्ति पाने के अपने सांझा संघर्ष में एजुटता के दिवस के रूप में मनाते आये हैं।

Tag:   

Share Everywhere

मई दिवस प्रेरणा    1886 की हड़ताल    Apr 16-30 2018    Struggle for Rights    Rights     2018   

पार्टी के दस्तावेज

thumbnail

इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


पी.डी.एफ. डाउनलोड करनें के लिये चित्र पर क्लिक करें

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

(Click thumbnail to download PDF)

यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)

यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)

हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)