स्टरलाइट के कॉपर प्लांट को बंद करने के लिए आंदोलन

तमिलनाडु के तुत्तुकुड़ी जिले के दसों हजारों लोग अपने इलाके में लगाये गए एक कॉपर (तांबा) प्लांट को बंद करने की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आये हैं। पिछले दो महीने से लोग लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं और यह संघर्ष आस-पास के इलाकों में और तमिलनाडु के कई शहरों में फैल गया है। मछुआरे, ऑटो रिक्शा चालक, मिनी बस चालक, नमक मज़दूर, चाय बेचने वाले, रेहड़ी-पटरी वाले, छोटे उद्योगों के संगठन आदि इस संघर्ष में हिस्सा ले रहे हैं। बड़े पैमाने पर लोग इस विषय को लेकर बेहद चिंतित हैं।

Sterlite Copper plantस्टरलाइट कंपनी प्रतिदिन 1200 टन यानी करीब 4,00,000 टन प्रति वर्ष तांबे का उत्पादन करती है। इसके अलावा यह कंपनी सल्फयुरिक एसिड और फास्फोरिक एसिड का भी उत्पादन करती है। यह प्लांट स्टरलाइट कॉपर द्वारा चलाया जा रहा है जो कि वेदांता लिमिटेड की एक इकाई है। वेदांता लिमिटेड इंग्लैंड में स्थित वेदांता रिसोर्सेज़ पी.एल.सी. का एक हिस्सा है।

1992 में स्टरलाइट कंपनी महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले में अपनी परियोजना शुरू करना चाहती थी। लेकिन उस इलाके के किसानों के विरोध की वजह से वह ये परियोजना शुरू नहीं कर पाई, जिससे वहां के पर्यावरण के प्रदूषित होने और खेती का नुकसान होने का ख़तरा था। 1993 में कंपनी को अपने निर्माण को बंद करके उस इलाके को छोड़कर जाने को कहा गया। आगे चल कर तमाम तरह के भ्रष्ट तरीकों का इस्तेमाल करते हुए, पर्यावरण की रक्षा के लिए बनाये गए तमाम कानूनों का उल्लंघन करते हुए, स्टरलाइट कंपनी ने 1996 में तुत्तुकुड़ी जिले में उत्पादन कार्य शुरू किया।

लोग बार-बार इस कंपनी का और उसके द्वारा फैलाये जा रहे प्रदूषण का विरोध करते आ रहे हैं। लेकिन सरकारी अधिकारियों ने स्टरलाइट के पूंजीपतियों का साथ दिया और इसका विरोध कर रहे लोगों पर हमले किये। अपने उत्पादन कार्य के दौरान स्टरलाइट कंपनी ने न केवल निर्धारित प्रदूषण सीमाओं का उल्लंघन किया बल्कि इजाज़त से अधिक उत्पादन किया और ऐसी चीजों का भी उत्पादन किया जिसकी उसको इजाज़त नहीं दी गयी थी। इसके ख़िलाफ़ अदालत में कई मुकदमे दायर किये गए, लेकिन स्टरलाइट कंपनी इन मुकदमों में भी अपने पक्ष में फैसला कराने में कामयाब हो गयी और उसने उत्पादन जारी रखा। अपने पैसों के बल पर कंपनी हिन्दोस्तानी राज्य से ज़रूरी इजाज़त और अपने पक्ष में फैसले हासिल करने में कामयाब रही। राज्य की कार्यकारिणी और न्यायपालिका और तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (टी.एन.पी.सी.बी.) जैसे सरकारी संस्थान कंपनी के साथ मिलीभगत में काम करते रहे और तमाम कानून और कायदे का उल्लंघन करते हुए, कंपनी के लिए अधिकतम मुनाफ़े के समर्थन में बड़ी बेशर्मी के साथ काम करते रहे।

1994 में टी.एन.पी.सी.बी. ने कंपनी को एक एन.ओ.सी. जारी किया और उसे पर्यावरण प्रभाव आंकलन करने को कहा। मन्नार खाड़ी के जैविक क्षेत्र की नजाकत को ध्यान में रखते हुए इस एन.ओ.सी. में यह शर्त शामिल की गयी कि कारखाने को मन्नार की खाड़ी से कम-से-कम 25 किलोमीटर दूर स्थित किया जाये। लेकिन इस रिपोर्ट का इंतजार किये बगैर ही पर्यावरण मंत्रालय व वन मंत्रालय ने 1995 में कंपनी को पर्यावरण मंजूरी दे दी। कंपनी ने मन्नार की खाड़ी से केवल 14 किलोमीटर की दूरी पर कारखाने को बनाया। टी.एन.पी.सी.बी. ने कंपनी को इस कारखाने में उत्पादन शुरू करने का लाईसेंस दे दिया। 1998 में मद्रास उच्च न्यायलय के आदेश पर राष्ट्रीय पर्यावरण प्रोद्योगिकी अनुसंधान संस्थान (नीरी) ने स्टरलाइट कंपनी द्वारा फैलाये गए प्रदूषण पर एक रिपोर्ट पेश की, जिसमें तमाम तरह से किये गए पर्यावरण के उल्लंघनों का सच सामने आया।

1998 को मद्रास उच्च न्यायलय के आदेश पर कंपनी को पहली बार बंद किया गया, और ऐसा कई बार हुआ। लेकिन हर बार कंपनी केवल कुछ ही दिनों के लिए बंद की गयी। एक सप्ताह के भीतर उच्च न्यायालय ने अपना फैसला बदलते हुए नीरी को फिर से रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा! 1999 और 2007 के बीच नीरी को तमाम तरह की रिपोर्टों के लिए 1.27 करोड़ रुपये के कॉन्ट्रैक्ट दिए गए, जिनमें हर बार स्टरलाइट कंपनी द्वारा की गयी कार्यवाहियों को सही बताया गया और पर्यावरण पर होने वाले दुष्परिणाम को कम करके दिखाया गया। यह साफ है कि स्टरलाइट द्वारा किये गए उल्लंघन को जायज़ साबित करने में राज्य की तमाम संस्थाओं की कंपनी के साथ मिली-भगत है।

स्टरलाइट कंपनी फैक्ट्री के आस-पास के इलाकों की ज़मीन और हवा को आर्सेनिक, सीसा, लोहा, सेलेनियम, एल्युमीनियम, तांबा, सल्फर डाइऑक्साइड और जहरीली गैस से प्रदूषित कर रही है, जिसकी वजह से बड़े पैमाने पर ज़मीन के पानी के स्रोत प्रदूषित हो रहे हैं और हवा में जहरीले कण फैल रहे हैं। स्टरलाइट कंपनी की मुनाफ़े की लालच और गैर जिम्मेदाराना कार्य की वजह से पूरा इलाका बुरी तरह से प्रदूषित हो गया है। यह कारखाना पर्यावरण रूप से बेहद नाजुक इलाके, मन्नार की खाड़ी, से बेहद करीब है जिससे समंदर में रहने वाली यहां की मछलियों और जल-प्राणियों को ख़तरा पैदा हो गया है।

जब से यह कारखाना शुरू हुआ है उस वक्त से कंपनी के कई मज़दूर और आस- पास रहने वाले कई लोग की कारखाने से निकलने वाले जहरीले धुएं से मौत हो गयी है या वे गंभीर रूप से बीमार हो गए हैं। इसके अलावा इस कारखाने के आस-पास रहने वाले लोगों में कैंसर, फेफड़े और सांस संबंधी बीमारियां, गर्भपात, विकलांगता इत्यादि की घटनाये भी काफी बढ़ गयी हैं।

अब जैसे कि आग में घी डालते हुए, स्टरलाइट कंपनी ने मौजूदा परिस्थितियों में बिना किसी सरकारी इजाज़त के अपने कारखाने और उत्पादन का विस्तार करने की योजना का ऐलान कर दिया है।

तुत्तुकुड़ी के लोगों के लिए ज़मीन और पानी का प्रदूषण और स्वास्थ्य की बिगड़ती हालत अब बर्दाश्त से बाहर हो गयी है, और उन्होंने स्टरलाइट कंपनी को बंद करने के लिए अनिश्चितकालीन संघर्ष शुरू कर दिया है। 24 मार्च को 24 घंटे की हड़ताल के बुलावे पर पूरे इलाके में विशाल प्रदर्शन आयोजित किये गए और पूरे शहर को ठप्प पर दिया गया। हजारों लोग प्रदर्शन में जमा हुए और उन्होंने कारखाने को पूरी तरह से बंद करने की मांग की। लेकिन बड़े पूंजीपतियों की मीडिया ने इस आंदोलन की खबर को दबा दिया और लोगों तक पहुंचने नहीं दिया।

इसके बाद तमाम कॉलेज के कई छात्र इस आंदोलन में शामिल हो गए हैं और कारखाने को पूरी तरह से बंद करने की मांग कर रहे हैं। पूरे इलाके में तमाम लोग अलग-अलग तरीकों से स्टरलाइट कंपनी को बंद करने के लिए संघर्ष में हिस्सा ले रहे हैं, प्रदर्शन, हड़ताल और चक्का जाम इत्यादि आयोजित कर रहे हैं। इसके अलावा चेन्नई सहित तमिलनाडु के कई शहरों और जिलों में प्रदर्शन आयोजित किये जा रहे हैं। राज्य भर के कई ट्रेड यूनियन, किसान संगठन और जन-संगठनों ने तुत्तुकुड़ी के लोगों के इस जायज़ संघर्ष के लिए अपने समर्थन का ऐलान किया है। पूरे तमिलनाडु से कई संगठनों के कार्यकत्र्ता तुत्तुकुड़ी आकर प्रदर्शनों में हिस्सा ले रहे हैं। तमिझागा विवासैगल संगम और कई और सगंठनों ने तुत्तुकुड़ी में जिला न्यायाधीश के दफ्तर के सामने आयोजित धरने में हिस्सा लिया और लोगों की जायज़ मांगों के लिए पूरे समर्थन का ऐलान किया।

अमरीका, इंग्लैंड, यूरोप, मध्य पूर्व और सिंगापुर और कई अन्य देशों में बसे हिन्दोस्तानी लोगों ने भी इस संघर्ष के लिए अपने समर्थन का ऐलान किया है। इन देशों के कई शहरों में लोगों ने सभाएं आयोजित की हैं और स्टरलाइट की वातावरण प्रदूषित करने वाले कारखानों को तुरंत बंद करने की मांग उठाई।

हिन्दोस्तानी राज्य को हमारे देश के लोगों की रत्ती भर भी फिक्र नहीं है। यह राज्य मुनाफ़ों के लोभी इजारेदार पूंजीपतियों द्वारा लोगों के प्राकृतिक संसाधनों को - ज़मीन, नदियों, भूजल स्रोतों और तमाम अन्य स्रोतों के शोषण करने की रक्षा करता है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, लाइसेंसिंग अधिकारी, न्यायपालिका और सरमायेदारी राजनीतिक पार्टियां सभी इन इजारेदार पूंजीपतियों के हितों में काम करते हैं और लोगों के संसाधनों के “नियामक” और “रखवाले” होने का दावा करते हैं। लोग इन संस्थाओं पर हरगिज़ भरोसा नहीं कर सकते!

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पार्टी के दस्तावेज

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इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


पी.डी.एफ. डाउनलोड करनें के लिये चित्र पर क्लिक करें

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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