मज़दूर वर्ग का संघर्ष भरा साल

हिन्दोस्तान और दुनिया भर के मज़दूर वर्ग के तमाम तबके पिछले मई दिवस से अब तक, एक वर्ष में अपने अधिकारों की हिफाजत में बार-बार लड़ाई के मैदान में उतरे हैं। हिन्दोस्तान में “व्यवसाय को सुगम बनाने” के नाम पर हिन्दोस्तान के सरमायदारों ने मज़दूर वर्ग के अधिकारों पर हमला तेज कर दिया है। मज़दूर वर्ग ने इसका करार जवाब दिया और इसके खिलाफ कई सांझे कार्यक्रम और संघर्ष आयोजित किये। अर्थव्यवस्था के अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने वाले मज़दूरों ने सरमायदारों के निजीकरण-उदारीकरण कार्यक्रम का जमकर विरोध किया।

Terad union Satyagarh
All India trade union conference
PSU bank employees go on strike
Anganwadi workes' dharna in Chhattisgarh, April 2018
Government employees on dharna, November 2017
Teachers on the road to struggle, Delhi, 2018
Road transport workes on strike in Tamilnadu, January 2018
Public services employees protesting against privatisation
Hands off HRI
hamburggermany

30 जनवरी, 2018 को देश-भर के करोड़ों मज़दूर न्यूनतम वेतन, सामाजिक सुरक्षा बीमा के समर्थन में, निजीकरण और ठेका मज़दूरी को बंद करने, रेलवे, रक्षा, और बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को रोकने की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे। 

9-11 नवम्बर 2017 को संसद के बाहर आयोजित 3-दिवसीय महापड़ाव में 3 लाख से अधिक मज़दूरों ने जोर-शोर से हिस्सा लिया। अर्थव्यवस्था के हर एक क्षेत्र - बिजली पॉवर प्लांट, स्टील प्लांट, यातायात, रक्षा उत्पादन, शिक्षा सहित अन्य क्षेत्रों के मज़दूर इसमें शामिल हुए। देशभर से एक लाख से अधिक महिला मज़दूर - आंगनवाडी कर्मचारी, आशा, मध्यान-भोजन (एम.डी.एम) कर्मचारी, सभी ने इस महापड़ाव में हिस्सा लिया।

महाराष्ट्र में फेडरेशन ऑफ आई.टी. एम्प्लाइज (एफ.आई.टी.ई. या फाइट) ने आई.टी. उद्योग में बड़े पैमाने पर की जा रही छंटनी के खिलाफ संघर्ष को अगुवाई दी। तमिलनाडू और कर्नाटक में अपने संगठन को पंजीकृत करने के बाद, अब वे महाराष्ट्र में भी उसे पंजीकृत करने में कामयाब रहे। सरमायदारों द्वारा आई.टी. मज़दूरों को संगठित होने से रोकने की तमाम कोशिशों के बावजूद आई.टी. मज़दूरों की यह कामयाबी मज़दूर वर्ग के लिए एक बड़ी जीत है।

18-20 जनवरी, 2018 को भारतीय रेलवे के गार्डों ने रेलवे प्रशासन और केंद्र सरकार की मज़दूर-विरोधी नीतियों के खिलाफ देश भर में धरना-प्रदर्शन आयोजित किये। देशभर के हजारों लोको चालकों ने अपनी क्रू-लॉबी में आयोजित धरना प्रदर्शनों में हिस्सा लिया। इसके दो महीने पहले, 20 नवम्बर, 2017 को उन्होंने देशभर में “सर्व हिन्द मांग दिवस” के रूप में मनाया और धरना, रैली, जन-सभाएं आयोजित की। आल इंडिया स्टेशन मास्टर्स एसोसिएशन ने उनके इस कार्यक्रम का पूरा समर्थन करते हुए उसमें हिस्सा लिया। केंद्र सरकार द्वारा भारतीय रेलवे को निजी हाथों में सौंपने की योजना की उन्होंने कड़ी निंदा की। बिबेक देबरॉय समिति की सिफारिश पर सरकार रेलवे को कई हिस्सों में बांटने की योजना बना रही है और उनको कंपनी और कारपोरेशन में तब्दील करने, जमीन सहित अन्य स्थायी संपत्ति को एक ट्रस्ट के अधीन करने, स्कूल व स्वास्थ्य केन्द्रों को बंद करने और उन सभी को निजी कंपनियों के हाथों में देने की योजना बना रही है।

आल इंडिया बैंक एम्प्लाइज एसोसिएशन के बुलावे पर 22 अगस्त, 2017 को देशभर के 10 लाख से अधिक बैंक कर्मचारियों ने देश-व्यापी बंद का आयोजन किया। इसमें सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंकों के 9 यूनियनों के कर्मचारियों ने हिस्सा लिया और बैंकों के निजीकरण, विलीनीकरण, पूंजीपतियों के डूबते कर्जों को माफ करने और बैंकों की सेवाओं के शुल्क में बढ़ोतरी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। 

11 जनवरी, 2018 को 430 रक्षा उत्पादन इकाइयों से जुड़े 4 लाख से अधिक मजदरों ने एक दिन की भूख हड़ताल की। उन्होंने रक्षा उत्पादन संबंधी इकाइयों और उद्यमों के निजीकरण को बंद करने मांग की। रक्षा मज़दूरों की 3 मान्यता प्राप्त फेडरेशन और 39 यूनियनों ने रक्षा मंत्री को चार सांझे ज्ञापन दिए।

12-13 दिसम्बर, 2017 को बी.एस.एन.एल. के लाखों मज़दूरों ने दो दिवसीय हड़ताल की। उन्होंने बी.एस.एन.एल. टावरों को निजी कंपनियों को किराये पर देने का विरोध किया और वेतन में संशोधन की मांग की। देशभर में सभी बी.एस.एन.एल. के दफ्तरों के सामने मज़दूरों ने धरना-प्रदर्शन किया और बी.एस.एन.एल. कॉन्ट्रैक्ट एंड कैजुअल वर्कर्स फेडरेशन के बुलावे पर अस्थायी और ठेका मज़दूर भी इन धरना-प्रदर्शनों में शामिल हुए।

20 नवम्बर, 2017 को राजस्थान राज्य के सरकारी कर्मचारियों ने अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त समिति की अगुवाई में अपने 15-सूत्री मांग-पत्र के समर्थन में राज्य भर में जिला मुख्यालयों पर विरोध-प्रदर्शन और धरने आयोजित किये। ठेकेदारी प्रथा, निजीकरण, पी.पी.पी. मॉडल को बंद करने और समान कार्य के लिए समान वेतन, अस्थायी मज़दूरों को स्थायी करने, पेंशन योजना इत्यादि लागू करने की मांगों को उन्होंने दोहराया। 

15 फरवरी, 2018 से बृहनमुंबई इलेक्ट्रिक सप्लाई एंड ट्रांसपोर्ट (बेस्ट) कंपनी के मज़दूरों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल की शुरुआत की। उन्होंने बेस्ट मैनेजमेंट के निजी-कंपनियों से बसों को किराये पर लेने की योजना का विरोध किया। उन्होंने अपने वेतन भुगतान में हो रहे देरी का भी मसला उठाया। 

तमिलनाडु, महाराष्ट्र और हरियाणा के राज्य परिवहन निगम के मज़दूरों ने पिछले साल कई बार बसों को सड़कों पर उतारने से मना कर दिया और लंबित मांगों को पूरा करने की मांग की।

तमिलनाडु के राज्य परिवहन निगम के 50,000 से अधिक मज़दूरों ने पूरे राज्य में 4 जनवरी, 2018 को हड़ताल कर दी। उन्होंने लम्बे समय से बकाया वेतन की अदायगी और दूसरे सरकारी विभागों के मज़दूरों को मिलने वाले वेतन के साथ बराबरी की मांग की। अक्टूबर, 2017 को महाराष्ट्र के राज्य परिवहन निगम के मज़दूरों ने 5-दिवसीय हड़ताल की। अप्रैल, 2017 में हरियाणा परिवहन निगम के मज़दूरों के एकजुट संघर्ष की वजह से हरियाणा सरकार को मज़दूरों की कुछ मांगों को मानना पड़ा, जैसे कि फरवरी 2017 में जारी नयी परिवहन नीति को वापस लेना और संघर्ष के दौरान बर्खास्त किये गए मज़दूरों की बहाली।

स्वास्थ्य सेवा के निजीकरण के खिलाफ और उचित वेतनमान के लिए डॉक्टरों, नर्सों और स्वास्थ्य कर्मचारियों का संघर्ष

2 अप्रैल, 2017 को देशभर के डॉक्टरों और डॉक्टरी की पढ़ाई कर रहे छात्रों ने विशाल विरोध प्रदर्शन आयोजित किया। वे डॉक्टरी की पढ़ाई और अस्पताल सेवाओं के निजीकरण और सरकारी अस्पतालों के भयानक हालातों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं।

जून, 2017 को केरल राज्य में निजी अस्पतालों में काम कर रही हजारों नर्सों ने हड़ताल कर दी और अगस्त तक इसे जारी रखा। सुप्रीम कोर्ट द्वारा नवम्बर 2016 में गठित समिति द्वारा की गयी सिफारिशों के अनुसार, वे 20,000 रुपये न्यूनतम वेतन की मांग कर रही है।

19 जनवरी, 2018 को 800 से अधिक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, और मध्यान भोजन कर्मचारियों ने दिल्ली में एक लड़ाकू धरना-प्रदर्शन आयोजित किया। अपने काम के लिए वेतन की जगह केवल मानधन दिए जाने के खिलाफ वे संघर्ष कर रही हैं। उन्होंने अपने लिए एक मज़दूर का दर्जा, न्यूनतम वेतन और अन्य सुविधाओं की मांग की।

शिक्षा के निजीकरण के खिलाफ और शिक्षा के लिए बेहतर हालत पैदा करने के लिए कॉलेज और स्कूल के शिक्षकों का संघर्ष

28 मार्च, 2017 को दिल्ली यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन - फेडरेशन ऑफ सेंट्रल यूनिवर्सिटीज टीचर्स एसोसिएशन (डुटा-फेडकुटा) के बुलावे पर दिल्ली यूनिवर्सिटी के सैकड़ों हजारों शिक्षक और छात्रों ने जंगी प्रदर्शन में हिस्सा लिया। इसमें दिल्ली यूनिवर्सिटी, जवाहरलाल नेहरु यूनिवर्सिटी जामिया मिलिया इस्लामिया, आंबेडकर यूनिवर्सिटी। और अलीगढ मुस्लिम युनिवेर्सिटी के छात्रों और शिक्षकों ने भाग लिया। उन्होंने सरकार के ग्रेडेड ऑटोनोमी स्कीम जैसे कदमों का विरोध किया, जो उच्च शिक्षा के निजीकरण की दिशा उठाये जा रहे है।

राजस्थान के शिक्षकों और नागरिकों ने मिलकर सरकार द्वारा 300 से अधिक सरकारी स्कूलों को पी.पी.पी. मॉडल के तहत निजी संस्थानों को देने की योजना का विरोध किया। इनमें से कई स्कूल सबसे अच्छे स्कूलों में से हैं।

देश भर के गेस्ट टीचर (अतिथि शिक्षक) अपने लिए निर्धारित वेतन और मैटरनिटी सुविधा के लिए संघर्ष कर रहे है। अभी वे देहाड़ी पर काम कर रहे है। दिल्ली के 25,000 से अधिक अतिथि शिक्षकों ने कई बार दिल्ली के मुख्यमंत्री के सामने धरना प्रदर्शन किये हैं और अपने लिए स्थायी नौकरी की मांग की है।

दुनियाभर में मज़दूरों के संघर्ष

फ्रांस में मज़दूरों का संघर्ष तेज हो रहा है। 19 अप्रैल, 2018 को पेरिस के परिवहन मज़दूर, ऊर्जा और बिजली उद्योगों के मज़दूर, ऑटो उद्योग के मज़दूर, अस्पतालों में काम करने वाले मज़दूरों सहित अस्थायी मज़दूर, स्कूल और बच्चों की देखभाल करने वाले मज़दूरों ने धरना प्रदर्शन आयोजित किया। अगस्त 2017 में फ्रांस की सरकार द्वारा श्रम कानूनों में मज़दूर-विरोधी बदलाव लाने के खिलाफ चलाये गए संघर्ष को आगे बढ़ते हुए यह धरना-प्रदर्शन आयोजित किये गए।

22 मार्च, 2018 को फ्रांस में सैकड़ों हजारों ट्रेन ड्राईवर, शिक्षक, नर्स, एयर ट्रैफिक कंट्रोलर और सार्वजनिक क्षेत्र के अन्य मज़दूरों ने हड़ताल कर दी। इन प्रदर्शनों में पहली बार नागरिक-अधिकारों (सिविल सर्वेंट) और रेल के अधिकारिओं ने भी हिस्सा लिया। पूरे देशभर में 180 से अधिक धरना-प्रदर्शन आयोजित किये गए।

3 फरवरी को इंग्लैंड में सैकड़ों-हजारों प्रदर्शनकारी मज़दूरों ने लन्दन के बीचों-बीच प्रधानमंत्री के दफ्तर और संसद पर प्रदर्शन आयोजित किया। वे राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (एन.एच.एस.) में फंड की कमी के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे, क्योंकि कड़ाके की सर्दी से स्वास्थ्य की समस्या और भी गंभीर हो गयी है। “एन.एच.एस. से कोई छेड़खानी नहीं चलेगी” का नारा लगाते हुए उन्होंने प्रदर्शन किया। इससे पहले अक्टूबर, 2017 में एन.एच.एस. के निजीकरण के खिलाफ़ सैकड़ों-हजारों लोगों ने लंदन में और कई और केन्द्रों पर प्रदर्शन किया। सरकार द्वारा एन.एच.एस. के निजीकरण के लिए की जा रही कोशिशों के खिलाफ लोग लगातार धरना-प्रदर्शन और रैली आयोजित किये गए।

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पार्टी के दस्तावेज

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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ग़दर जारी है... हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की प्रस्तुति

सौ वर्ष पहले अमरिका में हिंदोस्तानियों ने हिन्दोस्तान की ग़दर पार्टी की स्थापना की थी. यह उपनिवेशवाद-विरोध संघर्ष में एक मिल-पत्थर था.

पार्टी का लक्ष था क्रांति के जरिये अपनी मातृभूमि को बर्तानवी गुलामी से करा कर, एक एइसे आजाद हिन्दोस्तान की स्थापना करना, जहां सबके लिए बराबरी के अधिकार सुनिश्चित हो.

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