मई दिवस पर देशभर में मज़दूरों ने प्रदर्शन किये

कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के केन्द्रीय कार्यालय पर मई दिवस

1 मई, 2018 की सुबह, कम्युनिस्ट ग़़दर पार्टी के केन्द्रीय कार्यालय पर अंतर्राष्ट्रीय मज़दूर दिवस के अवसर पर लाल झंडा फहराकर मज़दूर वर्ग के शहीदों को याद किया गया। सभा में पार्टी के कार्यकर्ताओं, उनके परिवार के सदस्यों व स्थानीय मज़दूरों ने बड़े उत्साह के साथ भाग लिया।

Party office

कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के केन्द्रीय कार्यालय पर मई दिवस

सभास्थल लाल झंडों व नारे लिखे हुए बैनरों से सजाया गया था। सभा की शुरुआत पार्टी के एक वरिष्ठ साथी ने लाल झंडा फहरा कर की। जैसे ही झंडा फहराया गया, वैसे ही सभा स्थल, ‘इंक़लाब ज़िन्दाबाद!’, ‘अंतर्राष्ट्रीय मज़दूर दिवस ज़िन्दाबाद!’, ‘दुनिया के मज़दूरों एक हो!’, ‘निजीकरण, उदारीकरण और भूमंडलीकरण की मज़दूर व किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ़ एकजुट हो!’, ‘हम हैं इसके मालिक, हम हैं हिन्दोस्तान, मज़दूर-किसान, औरत और जवान!’ आदि नारों से गूंज उठा।

सभा की शुरुआत में कामरेड संतोष कुमार ने देश और दुनिया के संघर्षरत मज़दूरों को अंतर्राष्ट्रीय मज़दूर दिवस के अवसर पर सलाम किया। उन्होंने सरमायदारों के मज़दूर वर्ग पर बढ़ते हमले और उसके खिलाफ़ मज़दूर वर्ग के बढ़ते संघर्ष का विवरण दिया। उन्होंने समझाया कि मज़दूर वर्ग आज अपनी खुद की ताक़त नहीं पहचान पा रहा है। हमारा काम है मज़दूर वर्ग को अपनी ताक़त का एहसास दिलाना। जिस दिन देश के सारे मज़दूर अपनी ताक़त को समझेंगे, उस दिन पूंजीपतियों की ताक़त और ताज हिलने लगेंगे। आओ, मज़दूर वर्ग को जागृत करें, संगठित करें, उसे अपनी ताक़त का अहसास दिलायें।

कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के प्रवक्ता कामरेड प्रकाश राव ने अपने संबोधन में कहा कि आज के दिन पूर्व में जापान से पश्चिम में अमरीका तक, सारी दुनिया में मज़दूर साथी लाल झंडा फहराएंगे और संघर्ष को आगे बढ़ाने का संकल्प लेंगे। यह दिखाता है कि दुनिया के मज़दूर एक हैं।

उन्होंने बताया कि आज दुनिया के स्तर पर मज़दूर वर्ग पर हमले तेज़ हो रहे हैं। इसके खि़लाफ़ लाखों-लाखों मज़दूर सड़कों पर उतरकर अडिगता से लड़ाई कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि पूरी दुनिया में संघर्ष दो वर्गों के बीच चल रहा है - मज़दूर वर्ग और पूंजीपति वर्ग के बीच। पूंजीपति वर्ग की अगुवाई में पूंजीवादी व्यवस्था श्रम की लूट पर आधारित है। मज़दूर वर्ग अपने श्रम की लूट के खिलाफ़ और अपनी हुकूमत को क़ायम करने के लिए संघर्ष करता आ रहा है।

मज़दूर वर्ग के संघर्ष को कमजोर करने के लिए हमारे दुश्मन पूंजीपति वर्ग मज़दूर वर्ग को धर्म, जाति, भाषा व क्षेत्र इत्यादि के आधार पर बांटने की कोशिश करते हैं।

मज़दूर वर्ग के संघर्ष को गुमराह करने के लिये जोर-शोर से प्रचार किया जाता है कि चुनाव के ज़रिये इस या उस पार्टी या चेहरे को सत्ता में लाकर लोग अपने हालात को बदल सकते हैं। बीते 70 साल से यही चलता आ रहा है। वर्तमान ‘लोकतंत्र’ मज़दूरों-किसानों के ऊपर राज करने के लिये पूंजीपतियों का एक प्रमुख तंत्र है। कांग्रेस पार्टी, भाजपा इत्यादि पूंजीपतियों की हुक्मशाही के तंत्र ही हैं।

हमारा लक्ष्य पूंजीपतियों के राज्य को उखाड़ फेंककर मज़दूरों और किसानों को अपना राज्य स्थापित करना है। तभी मज़दूर वर्ग यह सुनिश्चित कर सकता है कि सबको सुख और सुरक्षा मिले। फौरी तौर पर हमें उदारीकरण और निजीकरण के खि़लाफ़ संघर्ष में मज़दूरों की एकता को मजबूत करना है। इसी दिशा में हमें हर औद्योगिक क्षेत्र में मज़दूर एकता समितियों को बनाने का प्रयास करना चाहिये।

कम्युनिस्ट पार्टी मज़दूर वर्ग की हिरावल पार्टी है जो मज़दूर वर्ग का मार्गदर्शन और अगुवाई करती है। आओ, हम सब मिलकर ग़दर पार्टी को मजबूत करें। ताकि हिन्दोस्तान में मज़दूरों-किसानों को अपनी हुकूमत क़ायम करने में पार्टी अपनी भूमिका निभाए।

सभा का समापन एक क्रांतिकारी गीत से हुआ, जिसके बोल थे - ‘कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी ने ललकार लगाई है, वर्षों से कुचली जनता की आस आई है...’।

दिल्ली के मज़दूरों ने संकल्प लिया

Delhi May Day - 1

दिल्ली में मई दिवस पर संयुक्त रैली

1 मई, 2018 को अंतर्राष्ट्रीय मज़दूर दिवस पर, दिल्ली की ट्रेड यूनियनों ने संयुक्त रूप से रामलीला मैदान से एक जोशीला जुलूस निकाला, जो चांदनी चैक स्थित टाउन हाल पहुंचकर एक जनसभा में तब्दील हो गया।

इसमें, विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले मज़दूरों ने हिस्सा लिया। इनके अलावा, रेलकर्मी, बैंककर्मी, बीमाकर्मी, विश्वविद्यालयों के कर्मी, शिक्षक व छात्र, नगर-निगम कर्मी, दिल्ली परिवहन निगम कर्मी, स्वास्थ्य कर्मी, इत्यादि मौजूद थे।

Delhi May Day - 2 कुर्बानी के प्रतीक लाल झंडों को पकड़कर चल रहे मज़दूरों के गगनभेदी नारे पुरानी दिल्ली की गलियों में गूंज रहे थे। मई दिवस के इस जुलूस को गुजरते हुए देखने के लिए हजारों की संख्या में लोग गलियों से निकलकर आये और मई दिवस का अभिवादन किया।

टाउन हाल में हुई सभा में जन संस्कृति, संगवारी और जन नाट्य मंच के साथियों ने प्रगतिशील गीत व नज़्म पेश किए। ट्रेड यूनियन नेताओं ने मई दिवस पर मज़दूरों का अभिवादन करते हुए कहा कि शिकागो के शहीदों की कुर्बानी ने दुनिया में 8 घंटे के काम के अधिकार को स्थापित किया। आज पूंजीपति वर्ग, उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण की नीतियों के ज़रिए मज़दूरों का शोषण लगातार बढ़ा रहा है और 8 घंटे की जगह पर 10-12 घंटे काम ले रहा है। देश में स्थापित श्रम कानूनों का उल्लंघन हो रहा है। हाल में, सरकार ने सभी सेक्टरों में 'फिक्स टर्म एम्प्लाएमेंट'अधिसूचित कर दिया है, जिसने सारे स्थापित श्रम कानूनों को महत्वहीन कर दिया है। चाहे केन्द्र सरकार हो या राज्य सरकारें हों, बडे़ पैमाने पर ठेकेदारी, न्यूनतम वेतन का भुगतान न करने व सामाजिक सुरक्षा का लाभ न देने, तालाबंदियों, छंटनी व अन्य तरीकों के ज़रिये पूंजीपति वर्ग के मुनाफ़ों को ज्यादा से ज्यादा बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं। इसके साथ ही, सबको सुख-सुरक्षा, रोज़ी-रोटी दे पाने में नकाम रहा यह राज, लोगों को बांटने व उनका ध्यान भटकाने के लिए सांप्रदायिकता का ज़हर खूब फैला रहा है। वक्ताओं ने बताया कि दिल्ली में वह न्यूनतम वेतन भी नहीं लागू हो रहा है जिसे सरकार ने खुद घोषित किया है।

मज़दूर एकता कमेटी के प्रवक्ता कामरेड संतोष कुमार ने अपने वक्तव्य में इस बात पर जोर दिया कि ‘जो सरकार निक्कमी है, वो सरकार बदलनी है’ का नारा फेल है। मज़दूर वर्ग की किस्मत सरकार बदलने से नहीं बदलेगी। कांग्रेस पार्टी आए या जाए, भाजपा आए या जाए, राज पूंजीपति वर्ग का रहता है। मज़दूर वर्ग का काम सरकार बदलना नहीं है। हमें यह फैसला करना होगा कि मज़दूर वर्ग अपने दम पर, पूंजीपतियों के वर्तमान शासन की जगह पर, मज़दूरों-किसानों का राज लाने के लिए लड़ेगा या पूंजीपतियों के राज को मान्यता देने के लिए, एक पार्टी की जगह दूसरी पार्टी को सत्ता में लेकर आता रहेगा।

देश की अदालतों में मज़दूरों और यूनियन कार्यकर्ताओं के जूते घिस जाते हैं, कानून होने के बावजूद, न्याय पाने के लिए। संसद में या विधानसभाओं में, कितने सांसद या विधायक मज़दूरों को कानूनन न्यूनतम वेतन न मिलने के मसले को उठाते हैं! दुनिया का सबसे बड़ा तथाकथित लोकतंत्र झूठा है। यह संविधान अपने प्रतिनिधियों का चयन करने और वापस बुलाने व कानून प्रस्तावित करने का अधिकार लोगों को नहीं देता है।

उन्होंने कहा कि उदारीकरण, निजीकरण के ज़रिए भूमंडलीकरण के तहत, देशवासियों के खून से पैदा की गई न जाने कितनी सार्वजनिक संपत्तियों को औने-पौने दामों पर पूंजीपतियों के हवाले कर दिया गया है। देश की दौलत पर टाटा, बिरला, अंबानी, जैसे कई बड़े पूंजीपति सांप की तरह कुंडली मार कर बैठे हुये हैं। जबकि देश के मज़दूर, किसान और मेहनतकश लोग दिन-ब-दिन गुरबत, कंगाली में धकेले जा रहे हैं। किसान आत्महत्या कर रहे हैं।

हम सभी को मिलकर, औद्योगिक क्षेत्रों में मज़दूर एकता समितियां बनानी होंगी और जो बनी हुई हैं उन्हें मजबूत करना होगा। वर्तमान पूंजीवादी व्यवस्था की जगह एक समाजवादी व्यवस्था का निर्माण करना होगा, जो सभी को सुख-सुरक्षा की गारंटी देगी।

सभा का समापन सरकार की जन-विरोधी, राष्ट्र-विरोधी, समाज-विरोधी और मज़दूर-विरोधी नीतियों के खि़लाफ़ संघर्ष तेज़ करने के संकल्प के साथ हुआ।

सभा को संबोधित करने वालों में थे - एटक से का. अमरजीत कौर, सीटू से का. अनुराग सक्सेना, हिन्द मजदूर सभा से का. राजेन्द्र सिंह, ए.आई.यू.टी.यू.सी. से का. मैनेजर चैरसिया, ए.आई.सी.सी.टी.यू. से का. संतोष राय, मज़दूर एकता कमेटी से का. संतोष कुमार, यू.टी.यू.सी. से का. आर.एस. डागर, टी.यू.सी.सी. से का. अरुण गुप्ता।

सभा की अध्यक्षता, ए.आई.बी.ई.ए, ए.आई.आर.एफ., बी.ई.एफ.ई., जी.आई.ई.ए.आई.ए. और एन.जेड.आई.ई.ए. के प्रतिनिधियों ने की।

मुंबई में मई दिवस जोशपूर्ण तरीके से मनाया गया

May Day Mumbai

मुम्बई में मई दिवस पर रैली

1 मई, 2018 को मई दिवस के अवसर पर, सुबह 9 बजे से ही पूरे महाराष्ट्र से हजारों मज़दूर दक्षिण मुंबई के आज़ाद मैदान में आने लगे। केंद्र सरकार और राज्य सरकारों द्वारा चलाई जा रही मज़दूर-विरोधी नीतियों के ख़िलाफ़ एकजुट होकर अपने गुस्से को प्रदर्शित करने के लिए महाराष्ट्र का मज़दूर वर्ग मुंबई में इकट्ठा हो गया था। पिछले कई सालों में यह पहली बार हुआ था। इस प्रदर्शन को ट्रेड यूनियन जॉइंट एक्शन कमेटी (टी.यू.जे.ए.सी.) ने आयोजित किया था। यह कमेटी केंद्रीय ट्रेड यूनियनों जैसे कि ए.आई.टी.यू.सी., सी.आई.टी.यू., आई.एन.टी.यू.सी., एच.एम.एस., एन.टी.यू.आई., के.ई.सी., ए.आई.सी.सी.टी.यू., टी.यू.सी.आई., बी.के.एस., और बैंकों, एल.आई.सी., राज्य सरकार, बी.एम.सी., बंदरगाह, एयर इंडिया, बी.ई.एस.टी., बी.पी.सी.एल., सीमेंस एवं एन.पी.एल. के औद्योगिक मज़दूरों की यूनियनों तथा असंगठित मज़दूरों जैसे आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, घरेलू काम करने वाले मज़दूर, आशा कार्यकर्ता, सुरक्षा कर्मी, निर्माण मज़दूर इत्यादि को प्रतिनिधित्व दे रही थी।

10,000 से अधिक मज़दूरों ने इस रैली में हिस्सा लिया। महाराष्ट्र के मज़दूर वर्ग की इस जोशपूर्ण भावना को नेताओं ने मंच से बुलंद आवाज़ दी। उन्होंने केंद्र सरकार और राज्यों में शासकों की निंदा की जो टाटा, बिरला और अम्बानी जैसे घरानों की अगुवाई में बड़े इजारेदार पूंजीपति वर्ग के साथ मिले हुए हैं। वे सिर्फ उनके मुनाफे़ बढ़ाने का काम करते हैं। वे मज़दूर वर्ग को गुमराह करने के लिए उन्हें नारे देते हैं और उनसे झूठे वादे करते हैं।

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन में पूरे जोश के साथ हिस्सा लिया। उन्होंने पार्टी द्वारा जारी मई दिवस के बयान और कॉमरेड लाल सिंह के सन्देश के हजारों पर्चे बांटे। इन पर्चों में मज़दूर वर्ग को सत्ता को अपने हाथों में लेने का बुलावा दिया गया, यह समझाते हुए कि इस परजीवी पूंजीवादी व्यवस्था को ख़त्म करने का यह एकमात्र रास्ता है। कार्यकर्ताओं ने मज़दूर एकता लहर अख़बार की प्रतियां बेचीं जिसे वहां आये महाराष्ट्र के सभी मज़दूरों ने दिलचस्पी से पढ़ा।

मई दिवस के अवसर पर चेन्नई में कई इलाकों में जुलूस निकाले गए

At VHS Hospital Adyar

वी.एच.एस. अस्पताल में मई दिवस की सभा

Aviation workers

चेन्नई में ए.सी.ई.यू. की मई दिवस पर सभा

अड्यार में वी.एच.एस अस्पताल वर्कर्स यूनियन के मज़दूरों ने अस्पताल के गेट पर मई दिवस की सभा आयोजित की। अलग-अलग तबकों के मज़दूरों ने सभा में हिस्सा लिया। मज़दूरों ने पूरे सभास्थल को लाल झंडों से सजाया था। एक वरिष्ठ मज़दूर साथी ने मज़दूरों का लाल झंडा फहराया। वर्कर्स यूनिटी मूवमेंट के कामरेड मनिदासन ने मज़दूरों का स्वागत करते हुए मई दिवस के इतिहास के बारे में बताया। उन्होंने वी.एच.एस. के मज़दूरों द्वारा चलाये गए संघर्षों को याद करते हुए उनकी आज की मांगों और चुनौतियों को दोहराया। उनके बाद कामरेड राजीया ने सभा को संबोधित किया और मई दिवस पर सभी मज़दूरों को बधाई दी।

वर्कर्स यूनिटी मूवमेंट के का. कबीलन ने सभी मज़दूरों को मई दिवस की क्रांतिकारी शुभकामनायें देते हुए हिन्दोस्तान के मज़दूरों की मौजूदा हालतों के बारे में बताया और कहा कि सरकार सभी मज़दूरों के अधिकारों पर हमले कर रही है। श्रम कानूनों में बदलाव लाकर सरकारें मज़दूरों को उनके अधिकारों से वंचित रखने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने वी.एच.एस. के मज़दूरों की बहादुर हड़ताल और लड़ाकू संघर्ष को याद किया। वी.एच.एस. के मज़दूरों ने फिर से अपनी मांगों को पेश किया है लेकिन मैनेजमेंट ने उनकी जायज़ मांगों को नामंजूर कर दिया है। उन्होंने कहा कि हमें अपनी इन जायज़ मांगों को हासिल करने के लिए एकजुट होकर संघर्ष करना होगा।

एयर कारपोरेशन एम्प्लाइज यूनियन (ए.सी.ई.यू.) ने मीनामबक्कम एयरपोर्ट पर ए.आई. सर्विस सेंटर में मई दिवस के अवसर पर एक सभा का आयोजन किया। यूनियन के सभी पदाधिकारियों और कई कर्मचारियों ने इस सभा में हिस्सा लिया। ए.सी.ई.यू. के भूतपूर्व अध्यक्ष कामरेड के. मनोहरन ने सभा की अध्यक्षता की। ए.सी.ई.यू. के भूतपूर्व अध्यक्ष आर. युवराज और गोपीनाथ ने मज़दूरों का झंडा फहराया। कामरेड मनोहरन ने मई दिवस के इतिहास के साथ-साथ सरकार द्वारा एयर इंडिया के निजीकरण के ख़िलाफ़ मज़दूरों के संघर्ष का भी जिक्र किया। वर्कर्स यूनिटी मूवमेंट के कामरेड कबीलन ने सरकार द्वारा एयर इंडिया के निजीकरण की कोशिश की निंदा की। उन्होंने कहा कि हिन्दोस्तान के बड़े पूंजीपतियों की नज़र एयर इंडिया की बेशकीमती संपत्तियों पर है, जो कि देश विदेश में फैली हुयी है। ए.सी.ई.यू. के अध्यक्ष तथा दक्षिणी क्षेत्रीय सचिव का. उदयषंकर ने बताया कि एयर इंडिया को दुनिया की सबसे बड़ी हवाई सेवा बनाने में एयर इंडिया के मज़दूरों का सबसे बड़ा योगदान रहा है। एयर इंडिया के भारी कर्जे़ के लिए एयर इंडिया के मज़दूर ज़िम्मेदार नहीं हैं। यह कर्ज़ा एयर इंडिया के प्रबंधन और देश के हुक्मरानों ने लिया है। पांच साल की अवधि तक रहने वाली किसी भी सरकार को एयर इंडिया की संपत्तियों को बेचने का क्या अधिकार है? ए.सी.ई.यू. ए.आई.ए.टी.एस.एल के अध्यक्ष कामरेड जयशंकर ने धन्यवाद भाषण दिया और लड़ाकू माहौल में सभा का समापन किया।

एयर इंडिया एम्प्लाइज यूनियन (ए.आई.ई.यू.) ने भी मई दिवस का आयोजन किया। ए.आई.ई.यू. के प्रदेश सचिव कामरेड पांडियन, किरुबकरण, वरदराजन, उमापति और वर्कर्स यूनिटी मूवमेंट के कामरेड कबीलन ने सभा को संबोधित किया। सभी वक्ताओं ने सरकार द्वारा एयर इंडिया के निजीकरण की कोशिश की घोर निंदा की।

IT workers

बंगलुरू में आई.टी. मज़दूरों की मई दिवस रैली

एयर इंडिया नेशनल एविएशन वर्कर्स यूनियन ने भी एयर इंडिया एडमिन ऑफिस की इमारत के सामने मई दिवस का आयोजन किया। इस सभा को कामरेड रमेश, अर्मुगम, नंदगोपाल और वर्कर्स यूनिटी मूवमेंट के कामरेड कबीलन ने संबोधित किया। तमाम वक्ताओं ने सभी मज़दूरों के लिए नियमित मज़दूर जैसे रोज़गार और नियमित वेतन की मांग के लिए लड़ने का प्रण लिया।

बदरा घरेलू और अन्तर्राष्ट्रीय टर्मिनल के हाउसकीपिंग विभाग, ट्राली ए.एस.आर.एस. और अन्य विभागों के ए.आई.टी.यू.सी. से जुड़े मज़दूरों ने एयर पोर्ट के कार्गो कॉमप्लेक्स पर मई दिवस के अवसर पर मीटिंग का आयोजन किया। ए.आई.टी.यू.सी. के नेता कामरेड रवि, कामरेड जहांगीर, शंमुगानाथान, पच्चिअप्पन, वीरन, पेरूमल और अन्य मज़दूर नेताओं ने सभा को संबोधित किया।

फोरम फॉर आई.टी. एम्प्लाइज (फाईट) ने मई दिवस का आयोजन किया। इस अवसर पर उन्होंने एक पुस्तिका जारी की जिसमें आई.टी. मज़दूरों से संबंधित अक्सर पूछे जाने वाले सवालों पर सही जानकारी दी गयी है। इस मीटिंग की अध्यक्षता फाईट के अध्यक्ष वसुमती ने की उनके साथ-साथ सभा में विनोद, राजन गांधी, अरुनागिरी, के अलावा कई अन्य पदाधिकारियों, सदस्यों और समर्थकों ने हिस्सा लिया।

केंद्रीय मज़दूर यूनियन के मज़दूरों ने पूरे शहर में बड़े पैमाने पर मई दिवस रैलियों का आयोजन किया, जिसमें सैकड़ों मज़दूरों के हिस्सा लिया। इन रैलियों को कई मज़दूर यूनियनों के नेताओं ने संबोधित किया।

मदनपुर खादर पुनर्वास कालोनी में मई दिवस

May  Day Madanpur Khadar

मदनपुर खादर पुनर्वास कालोनी में मई दिवस

30 अप्रैल, 2018 को मई दिवस की पूर्व संध्या पर, दिल्ली के मदनपुर खादर पुनर्वास कालोनी में मई दिवस पर एक सभा आयोजित की गई थी। इसके आयोजक थे - लोक राज संगठन व मज़दूर एकता कमेटी।

इस अवसर पर स्थानीय निवासियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। इसमें मई दिवस के इतिहास पर छोटी फिल्म दिखाई गई और उस पर चर्चा की गई। चर्चा में स्थानीय लोगों ने सक्रियता से भाग लिया।

रामगढ़ में मई दिवस

राजस्थान के जिला हनुमानगढ़ की रामगढ़ तहसील में स्थित कुम्हार धर्मशाला में लोक राज संगठन ने मई दिवस पर सभा आयोजित की।

सभा की शुरुआत में, लोक राज संगठन के सर्व हिंद उपाध्यक्ष हनुमान प्रसाद शर्मा ने मई दिवस की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि 8 घंटे के काम के अधिकार की मांग को लेकर 1 मई, 1886 को अमरीका के शिकागो शहर में मज़दूर उमड़ पड़े। इस आंदोलन को कुचलने के लिए पूंजीपतियों ने बेरहमी से मज़दूरों को मौत के घाट उतारा। मज़दूरों ने अपने हाथों में जो सफेद झंडे लिये हुये थे, वे खून से लाल हो गए। अपनी कुर्बानी से मज़दूरों ने 8 घंटे के कार्य दिवस को मान्यता देने के लिए पूंजीपतियों व उनकी सरकार को मजबूर कर दिया।

उन्होंने बताया कि आज देश और दुनिया में हालात बड़े विकट होते जा रहे हैं। मेहनतकश लोगों को सोलह-सोलह घंटे काम करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। हाल ही में, सरकार ने पूंजीपतियों का ढाई लाख करोड़ रुपए का कर्ज़ माफ़ किया है। लेकिन दूसरी ओर, किसान जो बैंकों और साहूकारों के कर्जे़ के दबाव में आत्महत्या कर रहे हैं। उन्हें न तो उपज का पूरा मूल्य मिल रहा है, न सिंचाई के साधन ही मिल रहे हैं। उन्हें न तो समय पर बीज व खाद तथा कीटनाशक ही मिलते हैं। आज दुनिया में सबसे ज्यादा बेरोज़गार हिन्दोस्तान में हैं। ऐसी हालत में, आज मज़दूर वर्ग को एकजुट होकर, वर्ग संघर्ष को तेज़ करना पड़ेगा और इस पूंजीवादी लोकतंत्र की जगह वैज्ञानिक समाजवाद पर आधारित मज़दूर वर्ग की सत्ता स्थापित करके, शोषण मुक्त समाज की रचना करनी होगी।

सभा में, लोक जन समिति के सचिव मनीराम लकेसर, अध्यक्ष बलवंत भाम्बू सहित अनेक साथियों ने अपने विचार रखे।

‘दुनियाभर के मेहनतकशों एक हो!’, ‘इंक़लाब ज़िंदाबाद!’, ‘समाजवाद ज़िंदाबाद!’ और ‘साम्राज्यवाद मुर्दाबाद!’ के नारों के साथ सभा का समापन हुआ।

मई दिवस पर ट्रेड यूनियनों की संयुक्त मांगें

  • मासिक न्यूनतम वेतन 20,000 रुपये घोषित करो और घोषित न्यूनतम वेतन लागू करो!
  • ठेका प्रथा को समाप्त करो व ठे­का मज़दूरों को पक्का करो और फिक्स टर्म एप्वाइंटमेंट की घोषणा वापस लो!
  • समान काम का समान वेतन दो और कार्यस्थल पर मज़दूरों की सुरक्षा को सुनिश्चित करो!
  • श्रम कानूनों में मज़दूर-विरोधी बदलावों पर रोक लगाओ!
  • सार्वजनिक क्षेत्र के निजीकरण पर रोक लगाओ!
  • निर्माण मज़दूरों के हितलाभों का समयबद्ध भुगतान करो!
  • एफ.डी.आई. पर रोक लगाओ! रेहड़ी-पटरी-खोमचा वालों को लाइसेंस दो और सभी को सस्ता राषन दो, महंगाई पर रोक लगाओ!
  • स्कीम वर्कर्स को कर्मचारी घोषित करो, सभी को पेंषन व बोनस दो!
  • मज़दूर वर्ग को जाति, धर्म, भाषा के आधार पर बांटने की साज़िश बंद करो!

 

Tag:   

Share Everywhere

May 16-31 2018    Struggle for Rights    Rights     2018   

पार्टी के दस्तावेज

thumbnail

इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


पी.डी.एफ. डाउनलोड करनें के लिये चित्र पर क्लिक करें

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

(Click thumbnail to download PDF)

यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)

यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)

हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)