रेल चालकों ने मनाया काला दिवस

आल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसियेशन की केन्द्रीय कार्यकारिणी के आह्वान पर, रेल चालकों ने 14 से लेकर 16 मई तक काला दिवस मनाया। इन तीन दिनों तक सभी रेल चालकों ने काली पट्टी बांधकर काम किया। पूरे देश के विभिन्न रेल मंडलों के मुख्यालयों पर धरना, प्रदर्शन किये गये और जुलूस निकाले गये। कई मंडलों में गार्ड काउंसिल के सदस्यों ने भी इनमें हिस्सा लिया।

AILRSA_Black day 14 to 16 may18

गौरतलब है कि केन्द्रीय कर्मचारियों के लिए सातवें वेतन आयोग को लागू हुए दो साल से अधिक समय हो चुका है। इस दौरान केन्द्रीय कर्मचारियों को मिलने वाले लगभग सभी भत्तों का पुनः निर्धारण नये वेतनमान के अनुसार किया जा चुका है। लेकिन रेल चालकों को मिलने वाले किलोमीटर भत्तों (माईलेज भत्ता) की दरों में अभी तक संशोधन नहीं किया गया है। इसके लिए 1980 से ही फार्मूला बना हुआ है, रेलवे को उक्त फार्मूले के तहत केवल नई दरों पर औपचारिक पत्र जारी करना है। इसी प्रकार सेवा निवृत्त रेल चालकों की पेंशन दरों का भी पुनः निर्धारण नए वेतनमान के अनुसार अभी तक नहीं किया गया है। इस वजह से रेल चालक बहुत गुस्से में हैं।

रेल चालकों ने अपनी मांगों को लेकर 16 मई को देशभर में स्थित रेल मंडलों के मुख्यालयों के सामने इकट्ठे होकर धरना, प्रदर्शन किये और रेलवे के प्रबंधकों के माध्यम से प्रधानमंत्री व रेलमंत्री के नाम अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा।

इनकी प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:

  • माइलेज दर आर.ए.सी.-1980 के सिद्धांत अनुसार शीघ्र निर्धारित की जाए।
  • 1 जनवरी, 2016 से पूर्व सेवानिवृत्त रेल चालकों को सातवें वेतन आयोग के अनुसार, तुलनात्मक पेंशन निर्धारण (आर.बी.ई. 13/2018) की विसंगतियों में शीघ्र सुधार किया जाए।
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पार्टी के दस्तावेज

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इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


पी.डी.एफ. डाउनलोड करनें के लिये चित्र पर क्लिक करें

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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