तूतीकोरिन गोली कांड : लोगों के संघर्षों को कुचलने के लिए बल प्रयोग की कड़ी निंदा करें!

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केंद्रीय समिति का बयान, 28 मई, 2018

Massive protests against Sterlite company

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी 22 मई, 2018 को तमिलनाडु के तूतीकोरिन शहर में पुलिस द्वारा लोगों पर किये गए बर्बर हमले की कड़ी निंदा करती है। इस हमले में कम से कम 13 बेगुनाह लोगों की मौत हुई है। गोलियों से गंभीर रूप से घायल 65 से अधिक लोगों को शहर के अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। ख़बरों के अनुसार, युद्ध में इस्तेमाल होने वाली स्नाइपर बंदूकों का इस्तेमाल किया गया है। ऐसा करते हुए, न तो किसी नियम का पालन किया गया और न ही किसी कानून का। अधिकतर लोगों को कमर से ऊपर के हिस्से में गोली मारी गयी है। इससे यह साफ है कि गोली चलाने का मकसद जान लेना या गंभीर रूप से घायल करना था।

हत्याकांड में इतने सारे लोगों की जान लेने के बाद, स्टरलाइट के कारखाने को बंद करना, लोगों के प्रति सत्ताधारियों की गुनहगार उदासीनता को दिखाता है। लोगों का गुस्सा शांत करने के लिए यह दिखावा किया जा रहा है। यदि सरकार यही कदम पहले उठाती तो इतने सारे बेगुनाह लोगों की जानें नहीं जातीं।

पिछले 20 साल से तूतीकोरिन के लोग, इस तांबे के कारखाने द्वारा प्रदूषण फैलाए जाने के विरोध में, अपनी आवाज़ उठाते आये हैं। 1995 में जबसे तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (टी.एन.पी.सी.बी.) ने इस कारखाने को स्थापित करने के लिए “अनुमति पत्र” जारी किया, ठीक उसी समय से इस इलाके के आस-पास के लोग टी.एन.पी.सी.बी. और तमिलनाडु सरकार के सामने इस कारखाने के बारे में गंभीर चिंता और सवाल उठाते आये हैं। लेकिन अधिकारियों तथा पर्यावरण और वन मंत्रालय ने लोगों की चिंताओं और सवालों पर कोई ध्यान नहीं दिया है। इसके ठीक विपरीत, ये अधिकारी पर्यावरण सुरक्षा से संबंधित हर एक कानून और नियम का उल्लंघन करने में स्टरलाइट कंपनी का साथ देते आये हैं।

कांग्रेस पार्टी नीत संप्रग सरकार और भाजपा नीत राजग सरकार, दोनों ने स्टरलाइट कंपनी को सार्वजनिक सुनवाई से छूट दी। इन सरकारों ने पहले इस कंपनी की स्थापना होने दी और उसके बाद इसका विस्तार करने की भी इजाज़त दी।

तूतीकोरिन में हुए इस हत्याकांड से इस बात का पर्दाफाश हो गया है कि किस तरह से राज्य के अधिकारी लोगों के हर एक सामूहिक प्रतिरोध को “कानून और व्यवस्था” की समस्या बना देते हैं। लोगों के आर्थिक और राजनीतिक संघर्षों को गुनहगारी कार्यवाही करार दिया जाता है और फिर उन पर बर्बर तरीके से हमला किया जाता है। इस “जनतंत्र” में लोग सरकार के फैसलों के खि़लाफ़ प्रदर्शन तक नहीं कर सकते। इस मामले में, सरकार ने वेदांत समूह को तूतीकोरिन में अपने तांबे के कारखाने का विस्तार करने की अनुमति देने का फैसला लिया था और लोग उसका विरोध कर रहे हैं।

हमारे देश के लोग देख रहे हैं कि किस प्रकार तरह-तरह की हिन्दोस्तानी और विदेशी पूंजीवादी कंपनियां देश के बेशकीमती संसाधनों का बड़े पैमाने पर लगातार शोषण कर रही हैं। इसका फायदा केवल मुट्ठीभर बड़े इजारेदार पूंजीपतियों को मिला है। लोगों के हाथ में कुछ भी नहीं आया है। बड़े पूंजीपतियों के खुदगर्ज़ हितों की हिफ़ाज़त में केंद्र और राज्य सरकारें लोगों का दमन करने, उनकी आवाज़ को दबाने के लिए, जानलेवा हथियारों का इस्तेमाल कर रही हैं।

अपनी भूमि, संसाधन और अपनी सामूहिक संपत्ति की हिफ़ाज़त करना लोगों का अधिकार है। साथ ही मुनाफ़ों की भूखी पूंजीवादी कंपनियां हमारे पर्यावरण को बर्बाद न करें, यह मांग करना भी लोगों का अधिकार है। इजारेदार पूंजीपतियों के हितों से पहले लोगों के हितों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए, यह मांग करना लोगों का अधिकार है।

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तूतीकोरिन गोली कांड    Jun 1-15 2018    Statements    Privatisation    Rights     2018   

पार्टी के दस्तावेज

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इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


पी.डी.एफ. डाउनलोड करनें के लिये चित्र पर क्लिक करें

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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