राजस्थान के रामगढ़ में किसानों का आंदोलन : बीमा से वंचित किये जाने पर किसानों ने फिर किया बैंक का घेराव

27 जुलाई से किसानों ने अपनी फसलों के लिये 8 करोड़ रुपये की बीमा राशि का भुगतान किये जाने की मांग को लेकर रामगढ़ उपतहसील के स्टेट बैंक के सामने अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है।

इससे पहले 26 जून को सैकड़ों किसानों ने इसी मांग को लेकर आंदोलन शुरू किया था। उस मौके पर आंदोलित किसानों ने बैंक शाखा पर पहुंचकर धरना दिया था और मानव श्रृंखला बनाकर बैंक का चारों ओर से घेराव किया था।

Dharna at SBI Ramgarh on 28 July 2018 Dharna at SBI Ramgarh on 28 July 2018
रामगढ़ में किसानों द्वारा बैंक का घेराव रामगढ़ में किसानों द्वारा बैंक का घेराव

26 जून के धरने ने प्रशासन को हिला दिया था। किसानों द्वारा बैंक घेराव की सूचना मिलते ही गोगामेडी पुलिस थाना से भारी पुलिस बंदोबस्त वहां पहुंचा। उनके साथ-साथ, स्टेट बैंक, हनुमानगढ़ के मुख्य प्रबंधक तथा कृषि सहायक निदेशक भी वहां पहुंचे और उन्होंने किसान नेताओं से वार्ता की। वार्ता में प्रशासन व बैंक के अधिकारियों को यह मानना पड़ा कि किसानों की मांग एकदम जायज़ है। वार्ता में यह सहमति बनी कि एक महीने के अंदर किसानों की इस समस्या का हल किया जायेगा तथा किसानों की बीमा राशि का भुगतान किया जायेगा। इस आश्वासन पर आंदोलित किसानों ने 26 जनू की रात को घेराव समाप्त किया।

​Farmers dharna started on 26th June 2018

 

Farmers dharna started on 26th June 2018

Bank gherao on 26th June 2018 in Ramgarh

Farmers dharna resumed on 26th June 2018

 

27 जुलाई को बैक द्वारा एक महीने में बीमा राशि के भुगतान के वादे को पूरा न करने की स्थिति में रामगढ़ उपतहसील के किसानों ने स्टेट बैंक के सामने अनिश्चितकालीन धरना दुबारा शुरू कर दिया है। उन्हांेने ऐलान किया है कि जब तक उनकी 8 करोड़ रुपये की बीमा राशि का भुगतान नहीं किया जाता तब तक वे धरने पर डटे रहेंगे। विदित है कि इस इलाके के 1200 किसानों की सावणी फसल 2017 की बीमा राशि को बैंक और निजी बीमा कंपनी ने मिलकर हड़प लिया है। किसानों ने बीमा प्रीमियम की राशि स्टेट बैंक में जमा की थी। बजाज एलायंस, एक निजी बीमा कंपनी, ने समय अवधि निकल जाने का बहाना बनाकर किसानों को बीमा राशि देने से इनकार कर दिया। इस तरह किसानों को फसल खराबी के लिये मिलने वाले 8 करोड़ रुपये के भुगतान से वंचित किया गया है। इससे पहले किसानों ने इस मुद्दे पर बैंक कर्मियों और प्रशासन के साथ दो बार समझौता वार्तायें आयोजित की थीं, परन्तु वे विफल रहीं।

 इस मौके पर अखिल भारतीय किसान सभा के जिलाध्यक्ष बलवान पुनिया, लोक राज संगठन के उपाध्यक्ष, श्री हनुमान प्रसाद शर्मा, पूर्व सरपंच ओम प्रकाश सहू, पूर्व सरपंच धनपत नेहरा, जिला परिषद सदस्य मंगेज चैधरी, जिला सचिव विनोद स्वामी, जिला उपाध्यक्ष छोटू राम गोदारा, किसान सभा जिला संयुक्त सचिव रोहताश सोलंकी, पूर्व पंचायत समिति सदस्य ऋषि पाल कासनिया सहित कुलदीप भांभू, जे. पी. यूणा, आदि ने आंदोलित किसानों को संबोधित किया।

रामगढ़ के किसान इस समस्या में अकेले नहीं हैं। देशभर में किसान अन्य मांगों के अलावा, फसल खराबी से सुरक्षा की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। सरकार द्वारा घोषित फसल बीमा योजना के तहत, देश के अनेक स्थानों पर निजी बीमा कंपनियां, नाना प्रकार के बहानों के साथ, किसानों को अपनी बीमा राशि से वंचित कर रही हैं। इससे स्पष्ट होता है कि सरकार द्वारा किसानों के तथाकथित कल्याण के लिये घोषित फसल बीमा योजना का असली उद्देश्य है निजी बीमा कंपनियों के मुनाफ़ों को खूब बढ़ाना, न कि उत्पीड़ित किसानों को राहत पहुंचाना।

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बीमा से वंचित    बैंक का घेराव    Aug 1-15 2018    Struggle for Rights    Rights     2018   

पार्टी के दस्तावेज

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पूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि
उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई
विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है।
इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि
लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि
पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को।
यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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