नाटो की शिखर बैठक के ख़िलाफ़ हजारों लोगों का विरोध प्रदर्शन

11-12 जुलाई, 2018 को ब्रुसेल्स में होने वाली नाटो की शिखर बैठक के कुछ दिन पहले से ही लोगों ने जंग के ख़िलाफ़ और निशस्त्रीकरण, शांति और लोगों की समस्याओं को सुलझाने की मांग को लेकर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन आयोजित किये।

Anti-NATO protests in Europe

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Views of massive rallies in London to protest visit of US President and NATO Summit

Anti-NATO protests in Europe
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लंदन के ट्रफाल्गर स्क्वायर में अमरीकी राष्ट्रपति के दौरे और नाटो के खिलाफ़ विशाल प्रदर्शन

7 जुलाई को हजारों लोगों ने ब्रुसेल्स में आयोजित विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा लिया। बेल्जियम के शांति, पर्यावरण, विकास और मानव आधिकार संगठनों सहित पूरे यूरोप से ट्रेड यूनियन कार्यकर्ताओं ने “नो टू वार - नो टू नाटो” (जंग नहीं चाहिए, नाटो नहीं चाहिए) इस अंतर्राष्ट्रीय गठबंधन के झंडे तले ये विरोध प्रदर्शन आयोजित किये थे। प्रदर्शनकारियों ने बताया कि नाटो अपने हर सदस्य देश में फौज़ी खर्च को सकल घरेलू उत्पादन (जी.डी.पी.) का 2 प्रतिषत तक बढ़ाने की योजना बना रहा है। इससे पूरे यूरोप में अतिरिक्त फौज़ी खर्च प्रति वर्ष 100 अरब यूरो हो जायेगा। प्रदर्शनकारी मांग कर रहे हैं कि इस पैसे का इस्तेमाल ग़रीबी दूर करने, लोगों को रोज़गार देने, उनकी सामाजिक ज़रूरतों को पूरा करने और पर्यावरण को विनाश से बचाने इत्यादि के लिए किया जाना चाहिए।

8 जुलाई को ब्रुसेल्स में नाटो की शिखर बैठक के ख़िलाफ़, एक नाटो-विरोधी शिखर बैठक आयोजित की गयी। इस शिखर बैठक का आयोजन “नो टू वार - नो टू नाटो” इस अंतर्राष्ट्रीय गठबंधन और बेल्जियम शांति आंदोलन के संगठनों द्वारा किया गया।

इस नाटो-विरोधी शिखर बैठक में 15 नाटो देशों और 5 गैर-नाटो देशों से 100 से अधिक प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

नाटो-विरोधी शिखर बैठक के इन प्रतिभागियों ने नाटो देशों द्वारा बड़े पैमाने पर किये जा रहे फ़ौज़ीकरण का जमकर विरोध किया। उन्होंने नाटो देशों के इस फैसले का विरोध किया कि हर एक नाटो देश अपनी जी.डी.पी. का 2 प्रतिषत हिस्सा फ़ौज़ीकरण पर ख़र्च करेगा। उन्होंने मांग की कि फ़ौज़ीकरण पर खर्चे को तुरंत कम कर दिया जाये, जो कि इस वक़्त करीब 1.7 ख़रब अमरीकी डॉलर तक पहुंच गया है। उन्होंने मांग की कि इस रकम को लोगों की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

नाटो-विरोधी शिखर बैठक के प्रतिभागियों ने तमाम परमाणु हथियारों को ख़त्म करने की मांग भी की। उन्होंने अपने इस गठबंधन को और भी अधिक व्यापक बनाने का फैसला लिया। उन्होंने तमाम तरह के हथियारों के निर्यात को ख़त्म करने और ड्रोन द्वारा जंग चलाने, जंग के लिए और अधिक मशीनों और रोबोट का इस्तेमाल करने पर भी रोक लगाने की मांग की। उन्होंने ड्रोन द्वारा जंग के चलन को ख़त्म करने के लिए एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित करने की मांग की।

नाटो-विरोधी शिखर बैठक में सभी ने इस बात पर सहमति जताई कि मौजूदा नाटो का फ़ौज़ी गठबंधन दुनिया के इतिहास का सबसे मज़बूत और व्यापक फ़ौज़ी गठबंधन है। यह न केवल यूरोप और उत्तरी अमरीका को घेरता है बल्कि पूरी दुनिया और ख़ास तौर से एशिया को अपने घेरे में शामिल करता है। इसका मक़सद रूस और चीन की घेराबंदी करना है। अमरीकी साम्राज्यवादी और अन्य साम्राज्यवादी ताक़तों द्वारा नाटो के सैनिकों का अन्य देशों पर जंग चलाने के लिए इस्तेमाल की निंदा करते हुए नाटो-विरोधी शिखर बैठक के प्रतिभागियों ने ऐलान किया कि ऐसी कार्यवाही तमाम अंतर्राष्ट्रीय कानूनों, राष्ट्रों और लोगों की संप्रभुता का घोर उल्लंघन है। इस समय दुनिया के विभिन्न हिस्सों में तैनात नाटो की सेनाओं को वापस बुलाने की मांग भी उन्होंने की।

यूरोप में बढ़ते फ़ौज़ीकरण की ओर इशारा करते हुए सहभागियों ने कहा कि इससे इस इलाके में जंग का ख़तरा बढ़ रहा है।

नाटो-विरोधी शिखर बैठक का समापन इस फैसले के साथ किया गया कि नाटो को ख़त्म करने के आंदोलन को और अधिक मज़बूत किया जायेगा। यह फैसला लिया गया कि जब अप्रैल 2019 में नाटो की 70वीं सालगिरह होगी, उस वक़्त दुनियाभर की तमाम अमन-पसंद ताक़तों के साथ मिलकर, दुनियाभर में नाटो के ख़िलाफ़ विशाल विरोध प्रदर्शन आयोजित किये जायेंगे।

नाटो की शिखर बैठक के तुरंत बाद जब अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने यूरोप का दौरा किया, उस वक़्त उनके ख़िलाफ़ विशाल विरोध प्रदर्शन आयोजित किये गए। 12 जुलाई को जब वह राष्ट्रपति बतौर पहली बार इंग्लैंड गए उस वक़्त इंग्लैंड सहित स्कॉटलैंड के सभी प्रमुख शहरों में विरोध प्रदर्शन आयोजित किये गए। 13 जुलाई को इंग्लैंड के 50 शहरों में विरोध प्रदर्शन आयोजित किये गए।

यह विरोध प्रदर्शन आप्रवासियों, नस्ली संबंधों से लेकर महिलाओं के मुद्दे, पर्यावरण बदलाव समेत तमाम मुद्दों पर ट्रम्प प्रशासन की नीतियों के ख़िलाफ़ आयोजित किये गए। लोगों को न केवल अमरीकी साम्राज्यवाद बल्कि यूरोप के तमाम देशों के हुक्मरानों की प्रतिगामी और अंधराष्ट्रभक्ति पर आधारित नीतियों का विरोध करने पर ज़ोर दिया। डोनाल्ड ट्रम्प के दौरे के ख़िलाफ़ केंद्रीय लंदन की सड़कों पर हजारों लाखों लोग उतर आये और पोर्टलैंड प्लेस से लेकर ऑक्सफ़ोर्ड सर्कस तक जुलूस निकाला। हाथों में प्लेकार्ड लिए उन्होंने अमरीकी प्रशासन पर जंग और नस्लवाद को भड़काने का आरोप लगाया।

इससे पहले 13 जुलाई को हजारों महिलाओं ने पुरुषों के साथ मिलकर केंद्रीय लंदन में एक जुलूस निकाला और वे बर्तन पीटते हुए ट्रम्प और अमरीकी साम्राज्यवाद के ख़िलाफ़ नारे लगाते हुये और दुनिया के तमाम लोगों के अंतर्राष्ट्रीय बंधुत्व के गीत गाते हुए आगे बढ़ीं। नाटो की शिखर बैठक की निंदा करते हुए उन्होंने ऐलान किया कि यह बैठक फ़ौज़ीकरण, जंग और राष्ट्रों की संप्रभुता के हनन को बढ़ावा देगी। जबकि जनसमुदाय ग़रीबी और बेरोज़गारी की चक्की में पिस रहा है ऐसे वक़्त में फ़ौज़ीकरण पर ख़र्च को बढ़ाने के ट्रम्प के प्रस्ताव की उन्होंने जमकर निंदा की। उन्होंने आप्रवासियों के संबंध में ट्रम्प की नीतियों की निंदा करते हुए कहा कि इसके चलते करीब 140 माताएं अपने बच्चों से बिछड़ गयी हैं।

13 जुलाई को लंदन के ऑक्सफ़ोर्ड सर्कस से ट्रफाल्गर स्क्वायर तक एक विशाल जुलूस का आयोजन किया गया जिसमें एक लाख से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया। जुलूस के अंत में ट्रेफाल्गर स्क्वायर पर विशाल सभा का आयोजन किया गया। इस विशाल जुलूस में शामिल हुए लोगों ने नाटो, जंग, अमरीकी साम्राज्यवाद और उसके द्वारा अमरीका और दुनियाभर के लोगों पर हमलों के ख़िलाफ़ बैनर उठाये और नारे लगाये।

ये तमाम विरोध प्रदर्शन साफ़ दिखाते हैं कि दुनियाभर में लोगों के दिलों में अमरीकी साम्राज्यवाद और अन्य साम्राज्यवादी ताक़तों के ख़िलाफ़, फ़ौज़ीकरण और आक्रामक जंग के ख़िलाफ़, बढ़ते फ़ौज़ी खर्च के ख़िलाफ़ कितना गुस्सा और आक्रोश है, जबकि लोगों की बुनियादी ज़रूरतों को नज़रंदाज़ किया जा रहा है।

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नाटो    शिखर बैठक    निशस्त्रीकरण    Aug 1-15 2018    World/Geopolitics    Rights     War & Peace     2018   

पार्टी के दस्तावेज

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पूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि
उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई
विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है।
इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि
लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि
पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को।
यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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