असम में नागरिकों के राष्ट्रीय रजिस्टर का जारी होगा दूसरा मसौदा : असम में स्थिति तनावपूर्ण

30 जुलाई, 2018 को असम में नागरिकों के राष्ट्रीय रजिस्टर (एन.आर.सी.) के दूसरे मसौदे को हिन्दोस्तानी राज्य द्वारा जारी किये जाने की संभावना है। इसकी वजह से असम में स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गयी है और लोग इसका बेचैनी से इंतजार कर रहे हैं, यह जानने के लिए कि क्या उनका नाम इस रजिस्टर में दर्ज़ है या नहीं। इस रजिस्टर का पहला मसौदा 1 जनवरी, 2018 को जारी किया गया था और उसमें 1.9 करोड़ लोगों का नाम दर्ज़ किया गया था, जबकि 3.29 करोड़ लोगों ने अपना आवेदन पत्र जमा किया था। इस तरह से पहले मसौदे में 1.39 करोड़ यानी 42 प्रतिशत से अधिक लोगों की तक़दीर को अधर में लटका कर रखा गया। बहुत बड़े पैमाने पर लोगों के बीच इस बात का डर है कि इस दूसरे मसौदे में भी शायद उनका नाम शामिल नहीं किया जायेगा।

People line up at the NRC office
People worried about their citizenship line up at the NRC

हिन्दोस्तानी राज्य 1985 के असम समझौते को “लागू करने” के नाम पर एन.आर.सी. में सुधार कर रहा है। इस समझौते के मुताबिक जिस किसी ने 24 मार्च, 1971 (जब बांग्लादेश की एक स्वतंत्र राज्य के रूप में स्थापना हुई थी) के बाद बांग्लादेश से असम में प्रवेश किया है उसे गैर-कानूनी अप्रवासी माना जायेगा, उसे सारे नागरिक अधिकारों से वंचित किया जायेगा, जिसमें मत देने का अधिकार शामिल है और उसे वापस बांग्लादेश निर्वासित किया जायेगा।

असम के लिए एक राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एन.आर.सी.) बनाने की यह प्रक्रिया इस तरह से चलायी जा रही है कि लोगों को पहले से ही गुनहगार माना जा रहा है, उनको आतंकित किया जा रहा है और उनकी एकता को तोड़ा जा रहा है। इससे असम के लोगों के बीच सांप्रदायिक और गुटवादी बंटवारे को और तीव्र करने के लिए ज़मीन तैयार की जा रही है।

बजाय इसके कि राज्य किसी को “गैर-कानूनी अप्रवासी” साबित करता है, लोगों को खुद ही अपनी नागरिकता साबित करने के लिए कहा जा रहा है। दूसरे शब्दों में कहा जाए तो असम के लोगों को खुद अपनी ही जन्म-भूमि में “गैर-कानूनी” करार दिया जा रहा है। उनको हिन्दोस्तानी राज्य के सामने अपनी नागरिकता साबित करने के लिए तमाम दस्तावेज़ पेश करने के लिए कहा जा रहा है!

जून के अंतिम सप्ताह के दौरान यूनाईटेड अगेंस्ट हेट नामक आंदोलन की एक फैक्ट फाइंडिंग टीम ने असम का दौरा किया और 2,000 से अधिक लोगों से मुलाक़ात की। उत्तर प्रदेश पुलिस के भूतपर्व इंस्पेक्टर जनरल श्री एस.आर. दारापुरी ने इस टीम की अगुवाई की। 13 जुलाई को इस टीम की रिपोर्ट दिल्ली में जारी की गयी। इस रिपोर्ट से इस बात का पर्दाफ़ाश हो जाता है कि एन.आर.सी. बनाने की इस पूरी कार्यवाही के दौरान असम के लोगों के मानव अधिकारों का घोर उल्लंघन किया गया है।

इस फैक्ट फाइंडिंग टीम ने बताया कि किसी भी व्यक्ति को अपनी नागरिकता साबित करने के लिए हिन्दोस्तानी राज्य द्वारा गठित किये गए विदेशियों के लिए न्यायाधिकरण के सामने 16 जायज़ दस्तावेज़ जमा करने पड़ते हैं। इन दस्तावेज़ों के अलावा यह न्यायाधिकरण लोगों से उनके परिवार के पूरे इतिहास के बारे में सवाल पूछता है, जहां उनको यह साबित करना होता है कि उनके पूर्वज असम के नागरिक और मतदाता रहे हैं।

टीम ने कहा कि “लोगों को न्यायाधिकरण के सामने अपनी नागरिकता साबित करने का न्याययुक्त मौका नहीं दिया जा रहा है। उनको अदालत में पेश होने के लिए बराबर नोटिस भी नहीं दिया जा रहा है। उनके लिये यह नोटिस अस्थायी जगहों पर भेजा जा रहा है, या फिर उनके उन ठिकानों पर जो कि साल दर साल ब्रम्हपुत्र नदी में बह जाते हैं, और अब ये ठिकाने केवल आधिकारिक दस्तावेज़ों में ही मौजूद हैं।”

इस टीम ने यह भी बताया कि हिन्दोस्तानी राज्य द्वारा एन.आर.सी. बनाने की यह पूरी कार्यवाही बंगाली भाषी लोगों को निशाना बनाने के लिए की जा रही है। इन लोगों के साथ “गुनहगारों” और “विदेशियों” जैसा बर्ताव किया जा रहा है और उन पर अपनी नागरिकता साबित करने के लिए दबाव डाला जा रहा है। लोगों द्वारा जमा किये गए दस्तावेज़ों में यदि कोई कमी पाई जाती है तो उनको विदेषियों के लिए बने न्यायाधिकरण द्वारा “फर्ज़ी मतदाता” करार दिया जाता है। मतदाता सूची में उनके नाम के सामने “डी” अंकित किया जाता है। कुछ आंकड़ों के मुताबिक करीब 1.25 लाख से अधिक लोगों को “डी” वोटर करार दिया जा चुका है। इनमें से कई लोगों को असम में बनाये गए 6 बंदीगृहों में भेजा जा चुका है। इन बंदीगृहों की हालत जेल से भी बदतर है। यहां रखे गए लोगों से सारे अधिकार छीन लिए गए हैं और उनको “विदेशी” करार दिया गया है, जबकि अभी तक राज्य ने ऐसा साबित नहीं किया है। ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि जब 30 जुलाई को एन.सी.आर. का दूसरा मसौदा जारी किया जायेगा तब “डी” मतदाता सूची में लोगों की तादाद 35 लाख तक जा सकती है।

जिनका नाम “डी” लिस्ट में शामिल किया गया है वे कानूनी तौर पर इस फैसले के ख़िलाफ़ उच्च न्यायालय में अपील कर सकते हैं, जो कि सैकड़ों किलोमीटर दूर गुवाहाटी में स्थित है। फैक्ट फाइंडिंग टीम ने बताया कि इस कार्य के लिए गुवाहाटी उच्च न्यायालय में स्थापित एक-न्यायाधीश की पीठ ने अधिकांश अपीलों को ठुकरा दिया है।

असम कई राष्ट्रीयताओं और जनजातियों से बना हुआ है। असम के लोग हिन्दोस्तानी राज्य द्वारा किये जा रहे अपने शोषण और दमन के ख़िलाफ़ कई वर्षों से संघर्ष कर रहे हैं। इसके अलावा हिन्दोस्तानी राज्य पर नियंत्रण करने वाले पूंजीपतियों द्वारा असम के प्राकृतिक संसाधनों की लूट के ख़िलाफ़ भी लड़ते आये है। असम के लोगों के राष्ट्रीय अधिकारों के आंदोलन को भटकाने और कुचलने के लिए हिन्दोस्तानी राज्य ने जानबूझकर असम के लोगों के बीच सांप्रदायिक और गुटवादी बंटवारे को थोपा है। हिन्दोस्तानी राज्य लगातार यह प्रचार करता आ रहा है कि असम के लोगों की समस्याओं की वजह बांग्लादेश से आये गैर-कानूनी अप्रवासी लोग हैं। हिन्दोस्तानी राज्य ने असम के लोगों को भाषा और धर्म के नाम पर एक दूसरे के ख़िलाफ़ भड़काने की पूरी कोशिश की है। इन बंटवारों को और अधिक गहरा करने के लिए एन.सी.आर. की कार्यवाई की जा रही है।

Tag:   

Share Everywhere

तनावपूर्ण    नागरिकों के राष्ट्रीय रजिस्टर    असम समझौते    Aug 1-15 2018    Struggle for Rights    Rights     2018   

पार्टी के दस्तावेज

thumb

 

पूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि
उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई
विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है।
इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि
लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि
पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को।
यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

पी.डी.एफ. डाउनलोड करनें के लिये चित्र पर क्लिक करें

 

thumbnail

इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


पी.डी.एफ. डाउनलोड करनें के लिये चित्र पर क्लिक करें

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

(Click thumbnail to download PDF)

यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)

यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)