हिन्दोस्तान-अमरीकी रणनैतिक गठबंधन से हिन्दोस्तानी संघ को ख़तरा

संपादक महोदय,

हिन्दोस्तान की आज़ादी की 71वीं सालगिरह के अवसर पर एक बार फिर हिन्दोस्तान के मजदूर, किसान और तमाम दबे-कुचले और शोषित लोगों के लिए इसके असली मायने क्या हैं, इस बात को इतनी स्पष्टता से पेश करने के लिए मैं हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केंद्रीय समिति को उसके गहन अध्ययन और सटीक विश्लेषण पर बधाई देता हूं। इस महत्वपूर्ण बयान में, 1947 से लेकर वर्तमान समय तक दुनिया में एक बड़ी पूंजीवादी ताक़त बनने की हिन्दोस्तान के इजारेदार पूंजीपतियों की रणनीति का सटीक विश्लेषण पेश किया है। यह विश्लेषण हिन्दोस्तान के आर्थिक और राजनीति के बदलते हालात की हक़ीक़त के आधार पर किया गया है, और उन तमाम विश्लेषणों से बिलकुल भिन्न है, जो सरमायदारी राजनीतिक विश्लेषक और उनके हिमायती पेश करते हैं। इसका मुख्य कारण है कि यह विश्लेषण मज़दूर वर्ग के दृष्टिकोण और हितों के आधार पर किया गया है।

इस बयान में एक बेहद महत्वपूर्ण विषय पर रोशनी डाली गयी है। हिन्दोस्तान और अमरीकी राज्य के बीच तेज़ी से बढ़ते रणनैतिक संबंधों के संदर्भ में जो कहा गया है, हर रोज़ की घटनायें उनकी पुष्टि करती हैं। 1947 से हिन्दोस्तान के बड़े सरमायदार जो साम्राज्यवादी मंसूबे पालते आ रहे हैं, आज के हालातों में उनको हासिल करने के लिए वह अमरीकी साम्राज्यवाद के साथ सैनिक रणनैतिक गठबंधन को लगातार मजबूत कर रहे हैं। हिन्दोस्तान-अमरीका के बीच का यह गठबंधन किसी भी तरह से हमारे देश या इस इलाके में शांति के हित में नहीं है, बल्कि हमारे देश के लोगों तथा इस इलाके के दूसरे देशों के लोगों के लिए बेहद ख़तरनाक है।

इस हक़ीक़त से सभी वाकिफ हैं कि अमरीकी साम्राज्यवादियों ने हिन्दोस्तान में अपनी खुफिया एजेंसियां तैनात कर रखी हैं। जब तक हिन्दोस्तान की सरकार अमरीकी साम्राज्यवाद की भू-राजनीतिक कार्यदिशा के अनुसार चलती है या फिर उससे बहुत ज्यादा भटकती नहीं है, तब तक ये एजेंसियां चुपचाप रहेंगी। लेकिन यदि हिन्दोस्तान की सरकार किसी मसले पर उनसे बहुत ज्यादा भटकती है, या उससे टकराती है तो अमरीकी साम्राज्यवाद अस्थिरता फैलाने वाले अपने तंत्रों को क्रियाशील कर देता है। अन्तर्राष्ट्रीय संबंधों में अपना उल्लू सीधा करने का, यही जाना-पहचाना तौर-तरीका रहा है। अपने रणनैतिक लक्ष्य को हासिल करने के लिए गुप्त आतंकवादी हमले आयोजित करना, “भ्रष्टाचार-विरोधी” आंदोलन, “जनवाद-परस्त”, “सत्ता परिवर्तन” आयोजित करना और अलगाववादी आंदोलनों को आयोजित करना, राजनीतिक नेताओं का क़त्ल करवाना, इस तरह की गुनहगार कार्यवाही अमरीकी साम्राज्यवाद इन खुफिया एजेंसियों के द्वारा करता आया है। हिन्दोस्तान-अमरीका रणनैतिक गठबंधन के और मजबूत होने से, न सिर्फ हिन्दोस्तान पर विदेशी दबाव और नाजायज़ साम्राज्यवादी जंगों में हिन्दोस्तान के फंस जाने के ख़तरे बढ़ रहे हैं, बल्कि इन साम्राज्यवादी दांवपेचों की वजह से, हिन्दोस्तानी संघ के टुकड़े-टुकड़े हो जाने का ख़तरा भी बढ़ रहा है।

कम्युनिस्टों का यह फर्ज़ है कि वे हिन्दोस्तान के तमाम मेहनतकश लोगों को इस ख़तरे के बारे में अवगत करायें और इसका सामना करने के लिए उनको लामबंध करें।

आपका पाठक

विवेक, नागपुर

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Aug 16-31 2018    Letters to Editor    History    Popular Movements     War & Peace     2018   

पार्टी के दस्तावेज

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पूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि
उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई
विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है।
इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि
लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि
पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को।
यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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