मज़दूरों, किसानों और मेहनतकशों को सामाजिक सुरक्षा देने से इंकार

हमारे देश में मज़दूरों के एक बहुत ही छोटे हिस्से को औपचारिक रूप से सामाजिक सुरक्षा की सुविधायें मिलती हैं: जैसे कि भविष्य निधि, ई.एस.आई., चिकित्सा सुविधा, मातृत्व सुविधा, दुर्घटना मुआवज़ा, ग्रेच्यूटि और पेंशन, इत्यादि। हमारे देश में जो लोग बेरोज़गार हैं, काम पर घायल हुए हैं, बीमार या वृद्ध हैं, उनके लिये कोई सामाजिक सुरक्षा नहीं है। उनको और उनके परिवारों को खुद के हाल पर छोड़ दिया जाता है।

किसान और कृषि मज़दूर, जो समाज की बुनियादी ज़रूरतों को पूरा करने के लिये मेहनत करते हैं, उन्हें किसी भी तरह की सामाजिक सुरक्षा से वंचित रखा गया है। किसानों और कृषि मज़दूरों की देखभाल की ज़िम्मेदारी समाज की है, जब वे वृद्धावस्था के कारण काम करने में असमर्थ हो जाते हैं। उनकी स्वास्थ्य सेवा का दायित्व भी समाज का है। वे मांग कर रहे हैं कि उन्हें 5,000 रुपये मासिक पेंशन और सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा मिलनी चाहिये।

उनमें से बहुतों को, जो कि नियमानुसार एक नहीं तो दूसरी सामाजिक सुरक्षा के हक़दार हैं, उन्हें भी राज्य पर पूंजीपतियों के आधिपत्य की वजह से इन सुविधाओं से वंचित रखा जाता है। मज़दूरों के निरंतर संघर्ष के परिणामस्वरूप, सामाजिक सुरक्षा से संबंधित 15 कानून बने हैं। इनमें विशिष्ट कानून शामिल हैं जो निर्माण मज़दूरों, बीड़ी मज़दूरों, सिनेमा मज़दूरों और खदान मज़दूरों के खास तबकों को सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने का दावा करते हैं। परन्तु कानूनी तौर पर जो उन्हें मिलना चाहिये वह ज़मीनी तौर पर नहीं मिलता है। मौजूदा राज्य की मशीनरी इनको लागू नहीं करती है। किसी भी कारणवश जब मज़दूर इन योजनाओं में योगदान देने से असमर्थ होते हैं - जैसे कि अगर उनकी नौकरी छूट जाती है, तब वे सामाजिक सुरक्षा लाभों के अधिकार को भी खो देते हैं।

मौजूदा सरकार इन कानूनों को सामाजिक सुरक्षा पर एक नई संहिता के साथ बदलने का प्रस्ताव दे रही है। वह दावा कर रही है कि यह नया कानून सभी को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करेगा। यह मज़दूरों को बताया जाने वाला झूठ है। यह उसी प्रकार का धोखा है जिस प्रकार 2009 में संप्रग सरकार द्वारा मज़दूरों को दिया गया था, जब उसने असंगठित श्रमिक सामाजिक सुरक्षा अधिनियम को अधिनियमित किया था। कांग्रेस पार्टी नीत संप्रग सरकार और भाजपा नीत राजग सरकार, इन दोनों में से किसी ने भी इन कानूनों के तहत तथाकथित असंगठित क्षेत्र के मज़दूरों की सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त पैसा नहीं लगाया है।

पिछले दो दशकों से शासक वर्ग ई.एस.आई. को बर्बाद करने पर तुला हुआ है, जिसके चलते वह नए अस्पतालों और डिस्पेंसरियों की संख्या का विस्तार करने से इनकार कर रहा है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि अधिक से अधिक मज़दूर वास्तव में इसका लाभ न उठा पाएं। सरकारों ने लगातार निजी अस्पतालों को लाभ पहुंचाने के लिए यह सुनिश्चित किया है कि ई.एस.आई. में इलाज कराने वाले रोगियों का इन निजी अस्पतालों में भेजा जाए।

इसके अलावा, अब मज़दूरों की सुरक्षा के लिये इकट्ठा की गयी धनराशि को लालची पूंजीपतियों द्वारा लूटने ख़तरा भी। पिछले 15 वर्षों में, निर्माण मज़दूरों से सामाजिक सुरक्षा के नाम पर इकट्ठा किए गए पैसों में से 25 प्रतिशत भी निर्माण मज़दूरों को लाभ प्रदान करने पर खर्च नहीं किया गया है। बीड़ी मज़दूरों और औपचारिक रूप से सामाजिक सुरक्षा कानूनों के अंतर्गत आनेवाले ऐसे अन्य मज़दूरों की भी यही स्थिति है। आज सरकार, ई.एस.आई., भविष्य निधि, कोयला खान मज़दूर निधि, निर्माण मज़दूर निधि, इत्यादि की 12 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति पर कब्ज़ा करके बैठी है। सरकार इस धनराशि का निवेश शेयर बाज़ार में करने का प्रस्ताव रख रही है जिससे पूंजीवादी इजारेदार घरानों को फायदा होगा।

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Aug 16-31 2018    Voice of the Party    Popular Movements     Privatisation    Rights     2018   

पार्टी के दस्तावेज

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पूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि
उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई
विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है।
इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि
लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि
पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को।
यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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