राजस्थान : फसल बीमा मुआवज़ा के लिए किसान आंदोलन जारी

20 अगस्त, 2018 को हनुमानगढ़ के किसानों ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत मुआवज़ा न मिलने के खिलाफ़ गंगानगर-दिल्ली महामार्ग का चक्का जाम कर दिया। यह चक्का जाम रात 11 बजे तक चलता रहा।

Rajasthan Farmers agitation

बीते दो महीने से भारतीय स्टेट बैंक की रामगढ़ शाखा पर किसानों का धरना लगातार जारी है। इसमें सैकड़ों किसान प्रत्येक दिन भाग ले रहे हैं। उज्जवालावास, भुकरका और गोरखाना की भारतीय स्टेट बैंक की शाखाओं में जिन-जिन किसानों की फसल बीमा का मुआवज़ा जमा होना था, उनकी मांग है कि 2016-17 का बकाया बीमा मुआवज़ा किसानों के खातों में अविलंब डाला जाये।

इस पूरे आंदोलन को अखिल भारतीय किसान सभा की अगुवाई में चलाया जा रहा है। पूरे आंदोलन को लोक राज संगठन और लोक जन समिति रामगढ़ ने अपना पूरा समर्थन दिया है।

जैसा कि मज़दूर एकता लहर में पहले रिपोर्ट किया गया है, रामगढ़ उप-तहसील के आप-पास के गांवों के 1350 किसान लगातार मांग करते आये हैं कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत उनको मिलने वाले मुआवज़े का भुगतान किया जाये। लेकिन सरकार बहाने बनाकर किसानों को भुगतान का लाभ देने से वंचित कर रही है। भारतीय स्टेट बैंक और निजी बीमा कंपनी की मिली-भगत से किसानों के 8-10 करोड़ रुपये के मुआवज़े के भुगतान को रोका गया है।

26 जून को सैकड़ों किसानों ने भारतीय स्टेट बैंक की रामगढ़ शाखा का 24 घंटे के लिये घेराव किया और बैंक प्रशासन व सरकारी अधिकारियों से यह लिखित समझौता करवाया कि 26 जुलाई तक किसानों को मुआवजे़ का भुगतान कर दिया जायेगा। जब 27 जुलाई तक उन्हें भुगतान नहीं किया गया तो हजारों की संख्या में किसानों ने भारतीय स्टेट बैंक के रामगढ़ शाखा का अनिश्चितकालीन घेराव शुरू कर दिया।

5 अगस्त को किसानों ने बैंक पर एक दिन के लिये ताला लगा दिया। जैसे-जैसे आंदोलन तेज़ हो रहा है, राजस्थान के अनेक इलाकों से यह ख़बर आ रही है कि वहां भी किसानों को बैंकों द्वारा मुआवजे़ की राशि का भुगतान नहीं किया गया है। भूकरका में भारतीय स्टेट बैंक ने 500 किसानों को बीमा मुआवजे़ की राशि का भुगतान नहीं किया है। इसी तरह गोरखाना में 900 किसानों और गांधीबाड़ी में 800 किसानों को बीमा के मुआवजे़ से वंचित किया गया हैं।

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संघर्ष को आगे बढ़ाते हुए, 9 अगस्त को जेल भरो आंदोलन चलाया गया। इस दौरान हजारों महिला और पुरुष किसानों ने गिरफ्तारियां दीं।

किसानों ने 13 अगस्त को एसडीएम कोर्ट का घेराव करके धरना दिया। इसी सभा में तय किया गया कि यदि प्रशासन ने हमारी मांगें नहीं मानी तो 20 अगस्त को महामार्ग को रोक दिया जायेगा। इससे पहले 19 अगस्त को प्रशासन ने किसानों से वार्ता की और किसानों के पैसे लौटाने का आश्वासन दिया था, किन्तु किसानों को उस आश्वासन पर भरोसा नहीं था। 20 अगस्त को दोपहर 2 बजे तक प्रशासन को समय देने के बाद गंगानगर-दिल्ली महामार्ग का चक्का जाम शुरू किया गया।

हजारों की संख्या में महिला और पुरुष किसान तपती धूप की परवाह किये बिना महामार्ग पर ही बैठ गये। किसानों ने वहीं पर चूल्हे बनाये और आंदोलनकारियों के लिये चाय-नाश्ता व रात का भोजन बनाया।

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आंदोलित किसानों के मजबूत इरादों को देखते हुए, रात 11 बजे नोहर के उपखंड अधिकारी, पुलिस अधीक्षक और तहसीलदार ने किसानों के बीच आकर यह घोषणा की कि एरिया जनरल मैनेजर ने लिखित पत्र दिया है कि तीनों बैंक शाखाओं के किसानों का पैसा दस दिन के भीतर उनके खातों में डाल दिया जायेगा।

इस आंदोलन में हजारों महिला व पुरुष किसानों के साथ-साथ भारतीय किसान सभा के नेता नोहर जिला अध्यक्ष कामरेड बलवान पुनिया, कामरेड कुलदीप भांभू, जिला सचिव कामरेड विनोद स्वामी, संयुक्त सचिव रोहतास सोलंकी, जिला परिषद सदस्य मंगेज चैधरी, लोक राज संगठन के सर्व हिन्द उपाध्यक्ष हनुमान प्रसाद शर्मा तथा लोक राज संगठन के सदस्य ओम सहू (पूर्व सरपंच उज्जवला वास), मनीराम लकेसर, डा. कृष्ण नोखवाल और कन्हैया लाल जैन प्रत्येक दिन इसमें शामिल हो रहे हैं। लोक जन समिति रामगढ़ के पदाधिकारी और सदस्य भी शामिल हो रहे हैं। इनके अलावा बलराम भांभू, कामरेड नियामत अली, सुनीता पुनिया पूर्व सदस्य पंचायत समिति सदस्य भादरा, श्रीमति सावित्रि देवी, बलवंत भांभू सहित राममूर्ति भांभू आदि शामिल हो रहे हैं।

पूरे इलाके में इस तरह से बीमा राशि के मुआवजे़ का भुगतान न किये जाने के मामले सामने आ रहे हैं। जब किसानों को मुआवज़ा देने का वक्त आता है तो ये निजी बीमा कंपनियां, बैंक की सांठ-गांठ में कोई न कोई बहाना देकर भुगतान करने से इंकार कर देती हैं। इससे जाहिर होता है कि निजी बीमा कंपनियां द्वारा बैंक की मिली-भगत से एक सोची-समझी साज़िश के तहत किसानों की बीमा राशि के मुआवजे़ को डकारा जा रहा है। किसान समझ रहे हैं कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना सिर्फ निजी बीमा कंपनियों के मुनाफ़ों को बढ़ाने की योजना है न कि संकटग्रस्त किसानों को राहत देन की।

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पार्टी के दस्तावेज

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पूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि
उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई
विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है।
इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि
लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि
पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को।
यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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