मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की गिरफ़्तारी और उत्पीड़न की निंदा करें!

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति का बयान, 29 अगस्त, 2018

28 अगस्त को एक सुनियोजित कार्यवाही के जरिये, पुणे की पुलिस ने मुंबई, दिल्ली, रांची, गोवा और हैदराबाद में एक ही समय पर, कई ऐसे व्यक्तियों के घरों पर छापा मारा, जो गरीबों और दबे-कुचले लोगों के अधिकारों के लिए काम करते आये हैं। इनमें ट्रेड यूनियन कार्यकर्ता, वकील, लेखक, कवि और पादरी शामिल हैं। पांच जाने-माने मानव अधिकार कार्यकर्ताओं - सुधा भारद्वाज, वरनन गोंसाल्वेस, वरावर राव, गौतम नवलखा और अरुण फरेरा - को गिरफ्तार किया गया है, इस फर्जी आरोप पर कि 1 जनवरी, 2018 को भीमा कोरेगांव में हुयी दलित रैली में “हिंसा भड़काने” में इनका हाथ था। इन्हें यू.ए.पी.ए. नामक काले कानून के तहत गिरफ्तार किया गया है। इजारेदार पूंजीपतियों के द्वारा नियंत्रित कुछ मीडिया चैनलों के जरिये, सरकार यह झूठा प्रचार कर रही है कि कुछ उच्च सरकारी नेताओं की हत्या करने की तथाकथित साज़िश के साथ इन कार्यकर्ताओं का कुछ सम्बन्ध है।

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी इन ट्रेड यूनियन नेताओं, वकीलों और लेखकों की गिरफ्तारी के लिए हिन्दोस्तानी राज्य की कड़ी निंदा करती है।

ये हमले ऐसे समय पर किये जा रहे हैं जब मजदूर, किसान, आदिवासी, महिलाएं और नौजवान बड़े-बड़े इजारेदार पूंजीवादी घरानों के हाथों अपने निरंकुश शोषण और देश की अनमोल खनिज सम्पदा की बेइन्तहा लूट का जमकर विरोध कर रहे हैं।

गिरफ्तार किये गए ये पाँचों व्यक्ति मजदूरों, किसानों, आदिवासियों, राज्य द्वारा आयोजित जातिवादी और साम्प्रदायिक हिंसा के पीड़ितों और सैनिक व राजकीय हिंसा के पीड़ितों के अधिकारों की हिफाजत में कई सालों से लगातार काम करते आये हैं। बड़े इजारेदार पूंजीवादी घरानों के आदेशानुसार, राज्य आदिवासी समुदायों को आतंकित करके, उनकी जमीन, जंगल व खनिज सम्पदा को इजारेदार घरानों के हवाले कर देने का जो सुनियोजित प्रयास करता रहा है, उसका इन्होंने पर्दाफाश और विरोध किया है। धर्म, जाति और समुदाय के आधार पर लोगों को निशाना बनाने की राज्य की कोशिशों का इन्होंने पर्दाफाश और विरोध किया है। इन्होंने हर प्रकार के राजकीय आतंकवाद का पर्दाफाश और विरोध किया है।

इसी साल, 6 जून को पुणे की पुलिस ने पांच मानव अधिकार कार्यकर्ताओं - प्रोफेसर शोमा सेन, रोना विल्सन, महेश राउत, सुधीर धावले और सुरेन्द्र गैडलिंग - को इसी प्रकार के आरोपों के आधार पर, भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं और यू.ए.पी.ए. के तहत गिरफ़्तार किया था।

मज़दूरों, किसानों, आदिवासियों, जातिवादी और सांप्रदायिक हिंसा के पीड़ितों के अधिकारों की हिफाजत में जो लोग संघर्ष कर रहे हैं, उन्हें हिन्दोस्तानी राज्य “अपराधी”, “राष्ट्र-विरोधी” बताता है। जो सभी प्रकार के राजकीय आतंकवाद का पर्दाफाश करते हैं और लोगों के अधिकारों की हिफाजत करते हैं, उन्हें फर्जी आरोपों के आधार पर गिरफ़्तार किया जा रहा है।

इन छापों, गिरफ़्तारियों और झूठे प्रचार के पीछे राज्य का असली मकसद है जनसमुदाय को आतंकित करना, ताकि लोग अपने अधिकारों के लिए संघर्ष न करें। अराजकता, हिंसा और आतंक का माहौल पैदा करना राज्य का पसंदीदा तरीका बन गया है, ताकि इजारेदार पूंजीपतियों और उनकी सेवा करने वाली सरकारों के खिलाफ मज़दूर-मेहनतकशों को एकजुट होकर संघर्ष करने के रास्ते से भटकाया जा सके।

देश की सभी प्रगतिशील और जनवादी ताकतों को इन पांचों कार्यकर्ताओं की, फर्जी आरोपों के आधार पर गिरफ़्तारी की कड़ी निंदा करनी चाहिए।

यह वक्त की मांग है कि हमारे लोगों के भविष्य के बारे में चिंतित सभी राजनीतिक ताकतें राजकीय आतंकवाद के खिलाफ, मानव अधिकारों, जनवादी अधिकारों और राष्ट्रीय अधिकारों की हिफाजत में, एकजुट होकर संघर्ष करें।

Tag:   

Share Everywhere

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं    गिरफ़्तारी    उत्पीड़न    Sep 1-15 2018    Statements    Communalism     Rights     2018   

पार्टी के दस्तावेज

thumb

 

पूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि
उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई
विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है।
इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि
लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि
पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को।
यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

पी.डी.एफ. डाउनलोड करनें के लिये चित्र पर क्लिक करें

 

thumbnail

इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


पी.डी.एफ. डाउनलोड करनें के लिये चित्र पर क्लिक करें

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

(Click thumbnail to download PDF)

यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)

यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

(PDF दस्तावेज को डाउनलोड करने के लिए कवर चित्र पर क्लिक करें)