देश में बढ़ती अराजकता, हिंसा और आतंक, मरणासन्न पूंजीवाद का नतीजा है!

संपादक महोदय,

“अराजकता, हिंसा और आतंक - पूंजीपतियों के शासन को क़ायम रखने के लिये”, मज़दूर एकता लहर के सितम्बर 1-15, 2018 के अंक में प्रकाशित यह लेख हमारे देश के मैजूदा हालात और उसके लिए ज़िम्मेदार कारकों को बेहद सटीक रूप से पेश करता है और साथ ही हमारे देश और तमाम मेहनतकश लोगों को आगे का रास्ता दिखाता है।

जैसे कि लेख में बताया गया है कि जैसे-जैसे मौजूदा व्यवस्था, पूंजीवादी व्यवस्था का संकट गहराता जा रहा है, वैसे-वैसे धर्म, जाति, भाषा, विचारधारा, लिंग, इत्यादि के आधार पर नफ़रत और हिंसा का माहौल और अधिक गहराता जा रहा है। यह न केवल हमारे देश में हो रहा है बल्कि, दुनिया के तमाम पूंजीवादी देशों के हुक्मरानों का तरीका बन गया है। हिन्दोस्तान की धरती पर लोग सदियों से रहते आये हैं। सदियों से अलग-अलग विचारों के बीच टक्कर होती रही है कि कौन-सा विचार समाज की प्रगति का रास्ता खोलेगा और कौन-सा विचार उसकी प्रगति के रास्ते की रुकावट बन रहा है। लेकिन विचारधारा और ख़याल के आधार पर किसी को गुनहगार या राष्ट्रद्रोही करार देना ऐसा कभी नहीं हुआ है।

किसी विचारधारा में विश्वास रखना या किसी भी मसले पर अपना ख़याल पेश करना, यह ज़मीर के अधिकार का मसला है और यह अधिकार किसी भी इंसान से अलग नहीं जा सकता। ज़मीर का अधिकार हर एक इंसान का अलंघनीय अधिकार है। मौजूदा राज्य इस अधिकार पर लगातार हमला करता आया है और इसके लिए एक व्यापक तंत्र खड़ा किया है। यह तंत्र सुनिश्चित करता है कि जो कोई अपने अधिकार के लिए संघर्ष करता है, जो कोई अपने ज़मीर के आधार पर देश और समाज के सामने कोई वैकल्पिक दृष्टिकोण पेश करता है। उसे तमाम तरह से प्रताड़ित किया जाता है, आतंकित किया जाता है, और यहां तक की उसका कत्ल कर दिया जाता है। लोगों को प्रताड़ित करने, आतंकित करने, उनके खि़लाफ़ नफ़रत फैलाने का यह तंत्र मौजूदा राज्य का अभिन्न हिस्सा है। हमारे देश में पूंजीवाद को जीवित रखने और उसका विस्तार करने के एकमात्र मकसद से इस तंत्र को बनाया गया है। चाहे कोई भी पार्टी सत्ता में हो, यह तंत्र लोगों को बांटने, उनके बीच आपसी-नफ़रत फैलाने, उनके संघर्ष को निरस्त करने और उसे खून के समंदर में बहा देने के लिए लगातार काम करता है।

पूंजीवाद अपने सबसे उच्चतम पड़ाव, साम्राज्यवाद के पड़ाव पर खड़ा है और दुनियाभर में विनाश बरसा रहा है। हमारे देश के हुक्मरान खुद एक बड़ी साम्राज्यवादी ताक़त बनने का मंसूबा रखते हैं और इसके लिए हर प्रतिरोध को, हर चुनौती को मिटा देना चाहते हैं। देश में बढ़ती अराजकता, हिंसा और आतंक उन्हीं मंसूबों का नतीजा है।

आज के युग में पूंजीवाद को जीवित रखने, उसका विस्तार करने का मतलब है, पूरे समाज का विनाश और मौत। यदि देश, समाज को जिं़दा रखना है तो, इस मरणासन्न पूंजीवाद को दफनाना ज़रूरी है।

यदि किसी को राष्ट्र-द्रोही, समाज-द्रोही कहा जा सकता है, तो वह मौजूदा राज्य है, जो इस मरणासन्न पूंजीवाद को ज़िन्दा रखने के लिए अराजकता, हिंसा और आतंक फैला रहा है और देश को एक विनाशकारी रास्ते पर ले जा रहा है। 

आपका

विवेक कुमार

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अराजकता    हिंसा    आतंक    मरणासन्न    Sep 16-30 2018    Letters to Editor    Communalism     Rights     2018   

पार्टी के दस्तावेज

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पूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि
उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई
विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है।
इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि
लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि
पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को।
यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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