शिक्षकों ने शिक्षक दिवस पर काला दिवस मनाया!

5 सितंबर, 2018 को शिक्षक दिवस के अवसर पर, देशभर के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में हजारों शिक्षकों ने फेडरेशन ऑफ सेंट्रल यूनिवर्सिटीज टीचर्स एसोसिएशन (फेडकूटा) के बुलावे पर काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन किया। वे नई पेंशन योजना (एन.पी.एस.) को रद्द करने और अतिथि शिक्षकों को नियमित किये जाने की मांग कर रहे थे।

teachersदिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक यूनियन (डूटा), जामिया टीचर्स एसोसिएशन (जे.टी.ए.), जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (जे.एन.यू.टी.ए.), असम विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (ए.यू.टी.ए.) और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (ए.एम.यु.टी.ए.) जैसे कई शिक्षक संगठनों ने फेडकूटा के बुलावे का समर्थन किया और एकजुटता दिखायी।

शिक्षक दिवस, इस पेशे को समाज में अपने अमूल्य योगदान के लिए मनाया जाता है। हालांकि, शिक्षण के पेशे के मूल्यों को पिछले कुछ वर्षों में घटा दिया गया है। अधिकांश शिक्षकों को समय पर वेतन नहीं मिलता है। उनके पद सुरक्षित नहीं हैं। काम की परिस्थितियां बहुत ख़राब हैं। स्थायी पदों के खाली होने पर भी स्थायी शिक्षकों की सालों-साल तक नियुक्ति नहीं होती है। इन पदों पर “अतिथि शिक्षक” जैसे विभिन्न अस्थायी नामों से भर्ती होती है। अतिथि शिक्षकों से स्थायी शिक्षकों के समान काम की उम्मीद की जाती है लेकिन उनको बहुत थोड़ा वेतन दिया जाता है और कोई भी अन्य सुविधाएं नहीं दी जातीं। प्रशासन द्वारा सरकारी स्कूलों-कॉलेजों के प्रति लापरवाही और स्कूलों और कॉलेजों पर बढ़ते निजी प्रबंधन के चलते, शिक्षकों की स्थिति और ख़राब हो गई है। शिक्षकों को ज़रूरी प्रशिक्षण या ढांचागत सुविधा प्रदान नहीं की जाती है। दूसरी ओर, शिक्षा प्रणाली की कई समस्याओं के लिए शिक्षकों को बदनाम किया जाता है।

शिक्षकों के संगठनों का कहना है कि साल 2004 से, नयी पेंशन योजना के नकारात्मक प्रभाव को लेकर शिक्षक संगठन मानव संसाधन विकास मंत्रालय को ज्ञापन देकर प्रदर्शन कर रहे हैं। पेंशन की यह योजना सेवानिवृत्ति के बाद जीवन चलाने योग्य पेंशन की सुनिश्चित नहीं करती है। 60 साल की उम्र से पहले रिटायर होने वाले लोगों के लिए स्थिति और भी बदतर है।

मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा अनदेखा किए जाने वाले कई अन्य मुद्दे भी शिक्षकों द्वारा उठाए गए हैं। शिक्षकों ने मांग की कि पुस्तकालय के कर्मचारी और अन्य शिक्षा कर्मचारी जैसे इंस्ट्रक्टर, प्रोग्रामर आदि के तथा शिक्षकों के वेतनमान के बीच असमानता दूर की जाये। 7वें वेतन आयोग के अनुसार घोषित देय भत्ते जल्द से जल्द दिये जायें। शिक्षकों ने नयी पेंशन योजना की जमकर आलोचना की और शिक्षकों की नियुक्ति व पदोन्नति में विसंगतियों को दूर करने की मांग की।

कश्मीर में, शेर-ए-कश्मीर पार्क में इकट्ठे हुए शिक्षकों ने 7वें वेतन आयोग को लागू करने के लिए प्रदर्शन किया।

पंजाब फेडरेशन ऑफ यूनिवर्सिटी और कॉलेज टीचर्स ऑर्गनाइजेशन के बुलावे पर, राजकीय विश्वविद्यालयों व पंजाब के 60 सरकारी कॉलेजों और पंजाब व चंडीगढ़ के 160 गैर-सरकारी कॉलेजों के हजारों शिक्षकों ने छुट्टी लेकर एक रैली आयोजित की।

कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के शिक्षकों के अलावा, देशभर में 60,000 से अधिक स्कूली शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों ने शिक्षकों की सुरक्षा के लिये तथा उनके साथ हो रहे भेदभाव की नीतियों के विरोध में काला दिवस मनाया। राष्ट्रीय स्वतंत्र स्कूल गठबंधन (एन.आई.एस.ए.) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, असम, नगालैंड, राजस्थान, गुजरात, कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, केरल, तमिलनाडु आदि के स्कूलों के शिक्षकों ने इन विरोध कार्यक्रमों में भाग लिया। एन.आई.एस.ए. और उसके सभी सदस्य संघों ने प्रधानमंत्री से मांग की कि शिक्षक सुरक्षा अधिनियम लाया जाए और शिक्षा प्रणाली में सुधार किया जाए।

ओडीशा के 5,500 स्कूलों के लगभग 60,000 शिक्षकों ने शिक्षक दिवस पर काला दिवस मनाया। वे बेहतर वेतन और सेवा लाभ की मांगों को लेकर, ओडीशा के स्कूल और कॉलेज शिक्षक और कर्मचारी यूनाइटेड फोरम की अगुवाई में भुवनेश्वर में 16 अगस्त से बारी-बारी से प्रदर्शन कर रहे हैं, ताकि पढ़ाई में रुकावट न आए।

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शिक्षक दिवस    काला दिवस    Sep 16-30 2018    Struggle for Rights    Privatisation    Rights     2018   

पार्टी के दस्तावेज

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पूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि
उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई
विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है।
इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि
लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि
पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को।
यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

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