रेल मज़दूरों और केंद्र सरकार के कर्मचारियों का विरोध प्रदर्शन

19 सितंबर, 2018 को देशभर में रेल मज़दूरों और केंद्र सरकार के कर्मचारियों ने अपने संबंधित मुख्यालयों के सामने धरना-प्रदर्शन आयोजित किये। सरकार ने विरोध प्रदर्शन में शामिल होने पर मज़दूरों की तनख्वाह में कटौती करने और उनके खि़लाफ़ अनुशासनात्मक कार्यवाही करने की धमकी दी, लेकिन इसके बावजूद मज़दूरों ने बहादुरी के साथ अपना धरना प्रदर्शन आयोजित किया।

बार-बार दिए गए आष्वासनों के बावजूद उनकी शिकायतों को सुलझाने में केंद्र सरकार की विफलता के बाद 32 लाख मज़दूरों, जिनमें रेलवे (13 लाख मज़दूर), रक्षा (6 लाख मज़दूर) और अन्य केंद्रीय सरकारी मज़दूरों (आयकर, पोस्ट, बी.ए.आर.सी. इत्यादि) शामिल हैं। उनका प्रतिनिधित्व करने वाली नेशनल जॉइंट कौंसिल ऑफ़ एक्शन (एन.जे.सी.ए.) ने अपने आंदोलन को तेज़ करने का फैसला लिया।

19 सितम्बर, 2018 को हिन्दोस्तान के प्रधानमंत्री को लिखे एक पत्र में, एन.जे.सी.ए. ने कहा कि केंद्र सरकार के मंत्रियों के समूह द्वारा दिए गए आष्वासनों की वजह से अनिश्चितकालीन हड़ताल को रोक दिया गया था। इस समूह में गृहमंत्री, वित्तमंत्री और रेलमंत्री शामिल थे। लेकिन अभी तक इन आष्वासनों को पूरा नहीं किया गया है। इसी वजह से एन.जे.सी.ए. ने सरकार को चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों को पूरा नहीं किया गया तो वे फिर से हड़ताल और धरना-प्रदर्शन करने पर मजबूर हो जायंगे। एन.जे.सी.ए. ने कहा कि न्यूनतम मज़दूरी, फिटनेस फॉर्मूला, भत्ते और राष्ट्रीय पेंशन योजना (एन.पी.एस.) के पहलुओं पर गौर करने के लिए चार समितियां गठित की गई थीं। केंद्र सरकार द्वारा इन समितियों की रिपोर्ट को नज़र-अंदाज़ कर दिया गया है और कुछ रिपोर्टों को सार्वजनिक भी नहीं किया गया है।

इस पत्र में दी गई मुख्य मांगें इस प्रकार हैं: 1) न्यूनतम मज़दूरी को बढ़ाना और फिटमेंट फॉर्मूला को लागू करना; 2) केंद्र सरकार के कर्मचारियों को नेशनल पेंशन स्कीम (एन.पी.एस.) के दायरे से बाहर निकालना और सभी केन्द्रीय सरकारी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना वापस लाना, चाहे उनकी नियुक्ति किसी भी समय की गयी हो; 3) भारतीय रेल के इंजन चालकों और गार्डों सहित तमाम मज़दूरों के लिए रनिंग आलाउंस में संशोधन।

इसके अलावा एन.जे.सी.ए. रेलवे मज़दूरों के काम की बदतर हालतों का विरोध कर रही है, जिसके चलते पूरे देश में दुर्घटनाओं में हर दिन दो रेलवे कर्मचारी मारे जाते हैं। एन.जे.सी.ए. ने सुरक्षा श्रेणी में काम करने वाले सभी रेल मज़दूरों को जोखिम भत्ता का भुगतान करने की मांग की है। एन.जे.सी.ए. ने इस बात को भी उजागर किया है कि भारतीय रेल की सुरक्षा श्रेणी में 1,30,000 पद रिक्त हैं, जिनमें इंजन ड्राईवर, गार्ड, एस. एंड टी., विद्युत और यांत्रिक मज़दूर, और गैंगमेन इत्यादि शामिल हैं। एन.जे.सी.ए. ने मांग की है कि इन पदों पर तुरंत भर्ती की जाये।

मज़दूर एकता लहर केंद्र सरकार के कर्मचारी और रेल मज़दूरों की इन जायज़ मांगों का पूरा समर्थन करता है।

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