पंचायतीराज सेवा परिषद कर्मचारियों का आंदोलन

12 सितंबर से पूरे राज्य में अलग-अलग चरणों में पंचायती राज्य सेवा परिषण कर्मचारियों का संघर्ष लगातार जारी है। जिसके तहत 21 सितंबर को राजस्थान पंचायतीराज सेवा परिषद की जिला शाखाओं, उपशाखाओं द्वारा क्षेत्रीय विधायकों का घेराव किया गया और ज्ञापन दिया गया।

तय कार्यक्रम के अनुसार 26 सितंबर को कर्मचारियों ने सभी जिला मुख्यालयों पर वाहन रैली करके विरोध प्रदर्शन किया।

विदित रहे कि इन कर्मचारियों का यह संघर्ष पिछले कई वर्षों से लगातार चल रहा है। इनके संघर्ष की वजह से सरकार ने कर्मचारियों के साथ 9 बार समझौते किये। हर बार सरकार इन समझौतों को लागू करने से मुकर गई।

Panchayati Raj  

​Panchayati Raj

परिषद के मुख्य मांगें :

1.       राजस्थान ग्रामीण विकास राज्य सेवा की काडर संरचना निर्धारित करने हेतु विभिन्न स्केल के पदों को निश्चित कर उन पदों पर पदोन्नति दी जाये।

2.       ग्राम विकास अधिकारी के ग्रेड-पे में पांचवें एवं छठे वेतनमान की विसंगति को दूर किया जाये।

3.       ग्राम विकास अधिकारी का चार्ज पंचायतीराज सेवा परिषद के ही लोगों को दिया जाये।

पंचायतीराज सेवा परिषद के श्रमिकों के आंदोलन से सरकार के कई कार्य प्रभावित हो रहे हैं। पंचायती राज संस्थाओं से जुड़े 5 विभागों (समाज कल्याण, कृषि, महिला बाल विकास, प्राथमिक शिक्षा एवं प्राथमिक स्वास्थ्य विभाग) के समस्त कार्य रुक गये हैं।

पंचायती राज के श्रमिकों का ग्रामीण क्षेत्र में बहुतरफा काम है। प्रधानमंत्री आवास योजना तहत आवासों का निर्माण, मनरेगा श्रमिकों के लिये रोज़गार सृजित करना, क्षेत्रीय विधायक कोष और सांसद कोष के कार्य, स्वच्छ भारत मिशन, पालनहार, विधवा, वृद्धा एवं विकलांगों की पेंशन, राशन कार्ड, जन्म-मृत्यु एवं विवाह पंजीकरण इत्यादि पर असर पड़ा है।

राजस्थान पंचायतीराज सेवा परिषद के श्रमिकों की योजना के अनुसार, 2 अक्तूबर, 2018 को पंचायतीराज स्थापना दिवस पर ये कर्मचारी प्रदेश की राजधानी जयपुर में विशाल आक्रोश रैली करेंगे। 3 अक्तूबर, 2018 से प्रदेश की राजधानी जयपुर में पंचायतीराज सेवा परिषद की कोर कमेटी/सदस्यों द्वारा अनवरत आमरण अनशन शुरू किया जायेगा।

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पंचायतीराज सेवा    परिषद कर्मचारियों    Oct 1-15 2018    Struggle for Rights    Rights     2018   

पार्टी के दस्तावेज

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इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


पी.डी.एफ. डाउनलोड करनें के लिये चित्र पर क्लिक करें

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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