राजस्थान राज्य परिवहन कर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल

17 सितंबर, 2018 से ‘राजस्थान रोडवेज़ श्रमिक संगठनों का संयुक्त मोर्चा’ के बैनर तले राजस्थान राज्य परिवहन कर्मी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। इस हड़ताल की वजह से पूरे राजस्थान में 4500 बसें सड़क पर नहीं उतरीं। अनुमान है कि पूरे राज्य में 10 लाख लोग प्रतिदिन इन बसों में यात्रा करते हैं।

परिवहन कर्मियों की मुख्य मांगें हैं (1) परिवहन विभाग के रिक्त पदों पर भर्ती की जाये (2) नई बसें खरीदी जायें (3) सातवां वेतन आयोग लागू किया जाये (4) रिटायरमेंट कर्मियों का बकाया भुगतान किया जाये (5) ई.टी.एम. मशीनें खरीदी जायें।

Rajasthan Transport  

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विदित रहे कि इससे पहले इन कर्मचारियों ने जुलाई, 2018 में 3 दिन की हड़ताल की थी। इस हड़ताल के अंत में, परिवहन मंत्री, परिवहन विभाग के अफ़सरों और राजस्थान रोडवेज़ संयुक्त मोर्चा के प्रतिनिधियों के बीच एक समझौता हुआ था। समझौते के अनुसार एक कमेटी बिठाई जाने वाली थी जिसे राजस्थान रोडवेज़ की समस्याओं पर अपनी रिपोर्ट 31 अगस्त तक पेश करनी थी। अब तक इस रिपोर्ट पर कोई सूचना नहीं है। इसके अलावा, समझौते के अनुसार, अगस्त के महीने के अंदर रिक्त पदों की भर्ती पूरी की जानी थी तथा रिटायर्ड कर्मचारियों का बकाया भुगतान व महंगाई भत्ता दिया जाना चाहिये था।

इन मांगों के पूरा न होने के कारण राजस्थान रोडवेज़ के कर्मचारी फिर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने को मजबूर हुये।

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परिवहन कर्मियों    निश्चितकालीन हड़ताल    Oct 1-15 2018    Struggle for Rights    Rights     2018   

पार्टी के दस्तावेज

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पूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि
उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई
विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है।
इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि
लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि
पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को।
यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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