महिला संगठनों ने हरियाणा में बलात्कार का विरोध किया!

हरियाणा के रेवाड़ी में 19 वर्षीय लड़की के सामूहिक बलात्कार के विरोध में 17 सितंबर को अनेक हिला संगठनों ने दिल्ली में हरियाणा भवन के सामने मिलकर घेराव किया। एडवा, एपवा, एन.एफ.आई.डब्ल्यू., पुरोगामी महिला संगठन, स्वास्तिक महिला समिति, सी.एस.डब्ल्यू., ए.आई.एम.एस.एस., डी.वाई.एफ.आई., एस.एफ.आई., के.वाई.एस. और कई अन्य संगठनों के कार्यकर्ताओं ने इस कार्यक्रम में भाग लिया।

protest at Hariyana Bhawan 17 Sep 2018 protest in Hariyana
दिल्ली के हरियाणा भवन पर प्रदर्शन करते हुए हरियाणा के कुरुक्षेत्र में प्रदर्शन करते हुए

लगभग 150 कार्यकर्ता हरियाणा भवन के सामने इकट्ठे हुये। उन्होंने अपने गुस्से को जाहिर करते हुए, केन्द्र सरकार, हरियाणा सरकार, राज्य प्रशासन और पुलिस के खि़लाफ़ जमकर नारे लगाये - “महिलाओं पर हिंसा नहीं चलेगी!”, “महिलाओं की उठी आवाज़, हिंसा मुक्त बने समाज!”, ”जहां महिला का हो अपमान, फिर कैसे हो वो देश महान!”, “सी.बी.एस.ई. टॉपर छात्रा के बलात्कारियों को सज़ा दो!”, “मुख्यमंत्री खट्टर इस्तीफा दो!”, “अश्लीलता, नशाखोरी पर रोक लगाओ!”,“सभी आरोपियों को गिरफ़्तार करने में नाकाम है, हरियाणा पुलिस भी महिलाओं पर बढ़ रहे शोषण की ज़िम्मेदार है!”, आदि। कार्यकर्ताओं ने हाथों में प्लाकार्ड ले रखे थे, जिन पर ये तथा अन्य नारे लिखे हुये थे।

प्रदर्शनकारी संगठनों ने घेराव स्थान पर एक जनसभा की। भाग लेने वाले संगठनों के प्रतिनिधियों ने सभा को संबोधित किया। सरकार के “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” के नारे की धज्जियां उड़ाते हुये, वक्ताओं ने महिलाओं पर बढ़ती हिंसा और महिलाओं की बढ़ती असुरक्षा के लिये केन्द्र व राज्य सरकारों तथा राज्य प्रशासन और पुलिस को सीधे तौर पर ज़िम्मेदार ठहराया। वक्ताओं ने अपराधी बलात्कारियों का बचाव करने तथा पीड़िता व उसके परिजनों को प्रताड़ित करने के पुलिस व राज्य प्रशासन के कारनामों की कड़ी निन्दा की।

वक्ताओं ने इस बात को उठाया कि राजनीतिक नेताओं व सरकारी अफ़सरों और फ़ौजियों द्वारा नियमित तौर पर, देश के किसी न किसी भाग में महिलाओं के साथ बलात्कार किया जाता है। हर ऐसे कांड में राज्य प्रशासन इन अपराधियों का बचाव करते हुये पाया जाता है। हमारे नेता महिलाओं को सुरक्षा देने के बारे में बड़े-बड़े वादे करते हैं। परन्तु जब भी ऐसा कोई कांड होता है तो वे महिलाओं को ही दोषी ठहराने में लग जाते हैं। कानून और न्याय व्यवस्था भी इन मामलों में महिलाओं के साथ बहुत ही बेदर्दी के साथ पेश आते हैं तथा बलात्कारियों को बचाने में लगे रहते हैं। पुलिस अक्सर अपराधियों के साथ मिलीभगत में होती है और पीड़ित महिलाओं को और प्रताड़ित करती है। हाल के महीनों में, देश के कई इलाकों में हुये बलात्कार के कांडों में भी फ़ौज, पुलिस तथा विधायकों पर बलात्कार का आरोप लगाया गया है परन्तु उनपर अब तक न तो कोई कानूनी कार्यवाही हुई है और न ही उन्हें कोई सज़ा मिली है। देश की महिलायें पुलिस और कोर्ट-कचहरी पर भरोसा बिल्कुल खो चुकी हैं।

पुरोगामी महिला संगठन की वक्ता ने स्पष्ट किया कि सरकार चाहे किसी भी राजनीतिक पार्टी या गठबंधन की हो, महिलाओं को सुरक्षा और इंसाफ दिलाने में सभी सरकारें नाकामयाब रही हैं क्योंकि वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था और प्रक्रिया के चलते, लोगों के प्रति इनकी कोई जवाबदेही नहीं होती। उन्होंने आह्वान किया कि हमें सभी मेहनतकशों के साथ मिलकर, एक ऐसे संघर्ष को अगुवाई देनी होगी, जिसका उद्देश्य है एक ऐसी नई व्यवस्था बनाना, जिसमें सभी के लिये सुख-सुरक्षा और रोज़गार सुनिश्चित होंगे।

वक्ताओं में शामिल थे एन.एफ.आई.डब्ल्यू. से फिनोमिना, एडवा से आषा शर्मा, स्वास्तिक महिला समिति से कुसुम, पुरोगामी महिला संगठन से रेनू, एपवा से शीतल, ए.आई.एम.एस.एस. से ऋतु कौशिक तथा सी.एस.डब्ल्यू. से माया। सामूहिक नारों और गीतों के साथ सभा को समाप्त किया गया।

सभा के अंत में सहभागी संगठनों के एक प्रतिनिधिमंडल ने हरियाणा सरकार को एक ज्ञापन दिया, जिसमें उन्होंने अपराधियों की तुरंत गिरफ्तारी और सज़ा तथा त्वरित कार्यवाही की मांग की।

जन संघर्ष मंच हरियाणा ने बलात्कार का विरोध किया

कुरुक्षेत्र में 17 सितंबर को जन संघर्ष मंच हरियाणा ने रेवाड़ी में छात्रा के सामूहिक अपहरण और बलात्कार कांड के विरोध में जन प्रदर्शन किया। सभी अपराधियों की गिरफ्तारी न किये जाने, हरियाणा पुलिस की संवेदनहीनता व बेटियों की सुरक्षा में नाकाम हरियाणा सरकार के खि़लाफ़ जन संघर्ष मंच हरियाणा जिला कमेटी द्वारा स्थानीय पुराना बस अड्डा कुरुक्षेत्र पर रोष प्रदर्षन किया गया व मुख्यमंत्री हरियाणा सरकार का पुतना फूंका गया।

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बलात्कार का विरोध    Oct 1-15 2018    Struggle for Rights    Rights     2018   

पार्टी के दस्तावेज

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पूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि
उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई
विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है।
इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि
लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि
पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को।
यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

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