सफाई कर्मचारियों पर पुलिस का बर्बर हमला

8 अक्तूबर, 2018 को वेतन व बकाया भुगतान में बार-बार हो रही देरी को लेकर, संसद पर प्रदर्शन करने आ रहे पूर्वी दिल्ली नगर-निगम के हजारों सफाई कर्मचारियों पर दिल्ली पुलिस ने लाठी चार्ज किया। पुलिस के इस बर्बर हमले में कई महिला व पुरुष कर्मचारी घायल हुए हैं।

इन कर्मचारियों की मांग थी कि उनका 3 महीने का बकाया वेतन व भत्ता दिया जाए, 1998 से कार्यरत ठेका व दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को पक्का किया जाए और सेवानिवृत्त कर्मचारियों को ग्रेज्युटी का भुगतान किया जाए, आदि।

पूर्वी दिल्ली नगर-निगम के हजारों सफाई कर्मचारी अपनी उपरोक्त जायज़ मांगों को लेकर, 12 सितम्बर, 2018 से हड़ताल पर थे। बीते कई सालों से, समय पर वेतन व भत्ता न मिलने की समस्या रही है।

Sanitation Workers

प्रधानमंत्री जी बड़े आडंबर के साथ पूरे देश में स्वच्छता अभियान चला रहे हैं। स्वच्छता अभियान में झाड़ू लेकर सरकारी प्रतिनिधि स्वच्छता का ढोंग कर रहे हैं और मीडिया में इनके फोटो छप रहे हैं। परन्तु असलियत में सफाई करने वाले मज़दूरों की सरकार को कोई चिंता नहीं है। जब वे किए गए काम का भुगतान समय पर करने की मांग करते हैं तो उन्हें सरकार लाठी से पीटती है।

सफाई कर्मचारी इस संघर्ष मे अकेले नहीं हैं। न सिर्फ सफाई कर्मचारी, बल्कि क्लेरिकल स्टाफ, सुपरवाईजर स्टाफ, स्कूल शिक्षक और कर्मचारी, अस्पतालों के डाक्टर, नर्स और अन्य कर्मचारी, पार्कों और बागवानी का काम करने वाले कर्मचारी, इन्जीनियरिंग स्टाफ, सहित कई अन्य विभागों के कर्मचारी भी समय-समय पर वेतन व भत्तों का समय पर भुगतान किए जाने की मांग को लेकर धरना, प्रदर्शन यहां तक कि हड़ताल भी करने को मजबूर होते रहे हैं।

9 अक्तूबर, 2018 को पूर्वी दिल्ली नगर-निगम के आयुक्त और हड़ताली कर्मचारियों के बीच समझौते के बाद हड़ताल ख़त्म हुई। समझौते में, सफाई कर्मचारियों को पक्का करने की शर्त को कुछ चरणों में पूरा करने की रजामंदी जाहिर की गई है। साथ ही, इस संबंध में तत्काल लिखित आदेश जारी करने की बात भी कही गई है। इसके अलावा, आयुक्त ने दीवाली बोनस और दो बार का महंगाई भत्ता देने और कर्मचारियों का निलंबन वापस लेने का भी आश्वासन दिया है।

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सफाई कर्मचारियों] बर्बर हमला    Oct 16-31 2018    Struggle for Rights    Rights     2018   

पार्टी के दस्तावेज

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पूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि
उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई
विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है।
इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि
लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि
पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को।
यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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