बढ़ती अराजकता और नफ़रत भरे अपराधों का स्रोत

लोक राज संगठन द्वारा आयोजित राजनीतिक मंच

30 सितम्बर, 2018 को लोक राज संगठन ने “बढ़ती अराजकता और नफ़रत भरे अपराधों का स्रोत” इस विषय पर दिल्ली में एक राजनीतिक मंच का आयोजन किया। इस राजनीतिक मंच में कई राजनीतिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने अपने विचार पेश किये। इनमें गांधीयन इनिशिएटिव फॉर सोशल ट्रांसफॉर्मेशन के राजराजन, ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लाक के जी. देवराजन, यू.टी.यू.सी. के आर.एस. डागर, एटक से धीरेन्द्र शर्मा, एस.डी.पी.आई. के राष्ट्रीय सचिव अब्दुल वारिस, एस.डी.पी.आई. के राज्य संयोजक निजामुद्दीन खान, आई.एफ.टी.यू. सर्वहारा के कृष्ण कान्त, प्रवासी सेना के अध्यक्ष मनोज राय, कॉन्कोर कंटेनर एम्प्लाईज़ यूनियन के अध्यक्ष विनय चौधरी, लोक राज संगठन की दिल्ली परिषद के सचिव बिरजू नायक तथा कई नौजवान और मज़दूर वक्ता शामिल थे।

MTG on Anarchy and hate crimes

लोक राज संगठन के पूर्व अध्यक्ष और मौजूदा मानद अध्यक्ष जस्टिस होस्बेट सुरेश ने इस राजनीतिक मंच की अध्यक्षता की। उन्होंने इस बात को उजागर किया कि भले ही संविधान लोगों के अधिकारों की बात करता है, हकीक़त में आज़ादी के 71 वर्ष बाद आज भी लोगों को भूख का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर देते हुए कहा कि मानव अधिकार हर एक इंसान का बुनियादी अधिकार है और उनकी गारंटी होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि देश की तथाकथित मुख्यधारा की पार्टियां चुनाव महज पैसों के बल पर लड़ती हैं और इसका देश के अधिकांश लोगों की मर्ज़ी या पसंद से कुछ भी लेना-देना नहीं है।

लोक राज संगठन के अध्यक्ष एस. राघवन ने सभा में आये सभी से अनुरोध किया कि वे खुलकर इस विषय पर अपने विचार रखें, ताकि हम सब मिलकर सामूहिक तरीके से मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था का विकल्प खड़ा कर सकें। उन्होंने इस बात का पर्दाफ़ाश किया कि अराजकता और नफ़रत भरे अपराध कोई नयी बात नहीं हैं और यह सिलसिला लंबे समय से चलता आ रहा है। हर एक सरकार लोगों पर अपनी पकड़ को मजबूत करने और उनको हमेशा ख़ौफ़ में रखने के लिए इसका इस्तेमाल करती आई है। बर्तानवी बस्तीवादियों ने सुनियोजित तरीके से ‘बांटो और राज करो’ की नीति को चलाकर हिन्दोस्तान पर अपनी हुकूमत क़ायम की थी। उन्होंने कांग्रेस और मुस्लिम लीग के साथ मिलकर बड़े ही सुनियोजित तरीके से देश का बंटवारा किया और बड़े पैमाने पर कत्लेआम आयोजित किया, जिसमें 20 लाख से भी अधिक लोग मारे गए। हमारे देश के हुक्मरान भी इसी नीति पर चलते आये हैं, जिसकी वजह से हिन्दोस्तान और पाकिस्तान के लोग हमेशा के लिए एक दूसरे के प्रति नफ़रत और दुश्मनी के जाल में फंसे रहे हैं और असली मुद्दों से उनका ध्यान हटाया जाता रहा है। इसकी आड़ में, हिन्दोस्तानी राज्य नोटबंदी, जी.एस.टी., राफेल विमान घोटाला और सैन्यीकरण जैसे जन-विरोधी क़दम उठाता रहता है।

लोक राज संगठन के सचिव प्रकाश राव ने दोहराया कि सरकार यू.ए.पी.ए. जैसे कानून लोगों पर थोपकर एक ख़ौफ़ का माहौल तैयार कर रही है। यदि इस माहौल को ख़त्म करना है तो फिर हमें उसके स्रोत को पहचानना होगा और उसे ख़़त्म करना होगा। उन्होंने बताया कि इस तरह का ख़ौफ़ का माहौल केवल हिन्दोस्तान में ही नहीं बल्कि दुनियाभर में पैदा किया जा रहा है और उनमें केवल उन्नीस-बीस का ही फ़र्क है। दरअसल बम धमाके, आतंकवादी हमले, नफ़रत भरे अपराध, सांप्रदायिक हिंसा आदि को राज्य बड़े ही सुनियोजित तरीके से आयोजित करता है, ताकि लोगों के बीच ख़ौफ़ और बंटवारा पैदा किया जा सके। हमें इस मौजूदा व्यवस्था को बदलना होगा जो कि इस अराजकता और हिंसा को पैदा करती है और एक ऐसी नयी व्यवस्था का निर्माण करना होगा जो लोगों के हित में काम करेगी और सभी को सुख और सुरक्षा की गारंटी देगी।

राजनीतिक मंच में भाग लेने वाले इस नतीजे पर पहुंचे कि हमें लोगों को बांटने की तमाम कोशिशों का विरोध करना होगा और एक ऐसी राजनीतिक व्यवस्था के निर्माण के लिए संघर्ष करना होगा जो सभी के लिए रोज़ी-रोटी का अधिकार और मानव बतौर इज़्ज़त से जीवन जीने के अधिकार सहित राष्ट्रीय अधिकार जैसे बुनियादी अधिकारों की गारंटी देगी और हिन्दोस्तान के सभी लोगों के लिए सुख और सुरक्षा सुनिश्चित करेगी।

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पार्टी के दस्तावेज

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इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


पी.डी.एफ. डाउनलोड करनें के लिये चित्र पर क्लिक करें

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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