नस्लवाद के खि़लाफ़ जर्मनी में जन आंदोलन

बढ़ते नस्लवाद और जेनोफोबिया (दूसरे देशों के लोगों के प्रति दुव्र्यवहार) के खि़लाफ़ 13 अक्तूबर, 2018 को पूरे जर्मनी के लोगों ने साथ आकर बर्लिन में विरोध प्रदर्शन किया। यह उन पार्टियों के खि़लाफ़ भी था जो ऐसे नस्लवादी प्रचार को भड़काती हैं। लगभग 2,40,000 लोगों ने इसमें हिस्सा लिया। यह प्रदर्शन मज़दूर यूनियनों, संघों, पार्टियों और अधिकारों के लिए लड़ने वाले समूहों के एक व्यापक गठबंधन द्वारा आयोजित किया गया था।

GermanyBerlineजर्मन राज्य देश में नस्लवाद और अप्रवास-विरोधी भावनाओं को भड़का रहा है। उसने नस्लवाद भड़काने वाली पार्टियों को सक्रिय समर्थन दिया है, यह दर्शाने के लिए कि यह लोकप्रिय भावना है। लेकिन जर्मनी के मज़दूर वर्ग और लोगों ने जर्मन समाज में विभाजन करने के सरकार के प्रयासों को ज़ोरदार तरीके से खारिज़ करके 13 अक्तूबर को एक उचित उत्तर दिया। प्रदर्शनकारियों ने “दीवार नहीं पुल बनाएं”, “हम नस्लवाद के खि़लाफ़ एकजुट हैं” और “हम एक खुले और मुक्त समाज के लिए अविभाज्य हैं” नारों के प्लाकार्ड  हाथ में पकडे़ हुये थे।

दुनियाभर के बाकी सभी देशों की तरह, जर्मन राज्य अपने मज़दूरों को सुरक्षा देने में असफल और असमर्थ रहा है। इसलिए, लोगों का ध्यान भटकाने तथा उनमें फूट डालने के लिए वह आप्रवासन से जुड़े मुद्दों को उठा रहा है। वह इस तथ्य को छुपाना चाहता है कि लोगों की बुरी हालत के लिये जर्मनी और वैश्विक अर्थव्यवस्था की कार्य दिशा ज़िम्मेदार है। ये वही दिशा है जिसके चलते जर्मनी और विश्व की सभी अर्थव्यवस्थायें लोगों की ज़रूरतों को पूरा करने की बजाए वित्त पूंजी की लालच को पूरा करने में लगी हैं।

राज्य इस तथ्य से लोगों का ध्यान हटाना चाहता है कि पश्चिम एशिया और उत्तरी अफ्रीका के देशों पर कब्ज़ा करने के लिये किए गए युद्धों के कारण यूरोप में लोगों का बड़े पैमाने पर आप्रवासन हुआ है। ये सभी युद्ध अमरीकी राज्य और नाटो के नेतृत्व में हुए हैं, जिसका जर्मनी भी एक सदस्य है।

जर्मनी के मज़दूरों और लोगों ने इन सभी भड़काऊ और फूट डालने वाले प्रचारों तथा झूठों का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने स्पष्ट रूप से जर्मनी के सभी मज़दूरों और लोगों के साथ, उनके रंग या जन्म के स्थान पर ध्यान न देते हुए अपनी एकता प्रकट की है।

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नस्लवाद    जर्मनी में जन आंदोलन    Nov 16-30 2018    World/Geopolitics    Privatisation    Rights     2018   

पार्टी के दस्तावेज

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पूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि
उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई
विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है।
इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि
लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि
पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को।
यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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