तमिलनाडु में चक्रवात से प्रभावित लोगों का राज्य प्रशासन की उदासीनता के विरोध में प्रदर्शन

गाज़ा नामक भीषण चक्रवाती तूफ़ान चेन्नई से करीब 300 किमी दूर, नागापट्टिनम में तमिलनाडु तट से 16 नवम्बर, 2018 को टकराया। इसने अपने पीछे भयंकर मौत और बर्बादी को छोड़ा है।

ख़बरों के मुताबिक कम से कम 46 लोग मारे गये हैं। नागापट्टिनम, तिरुवारूर, पुदुकोट्टेय और तंजावूर सहित, दस से भी अधिक जिलों में जबरदस्त बर्बादी हुई है।

राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, निचले स्तर पर रहने वाले लगभग 90,000 लोगों को कडलोर, नागापट्टिनम, पुदुकोट्टेय, तंजावूर, रामनाथपुरम और तिरुवारूर के छः जिलों में स्थित राहत शिविरों में पहुंचाया गया था।

हवा की रफ्तार 120 किमी प्रति घंटा तक पहुंचने से सैंकड़ों पेड़ जड़ से उखड़ गये और सड़कें बंद हो गईं। बड़े स्तर पर घरों व सम्पत्ति को नुकसान होने की खबरें मिली हैं। एक लाख से भी अधिक बिजली के खंबे उखड़ गये हैं और बहुत बड़े इलाके में बिजली दो हफ्तों से गायब है। तटवर्ती मछुआरों पर बहुत बुरा असर पड़ा है और उनके घरों व नावों को भारी क्षति पहुंची है।

चक्रवात से होने वाले विनाश के बाद, इस इलाके के प्रभावित लोगों में, खास तौर पर नागापट्टिनम-वेदारण्यम पट्टी के आंतरिक गांवों के लोगों में, राज्य के अधिकारियों के रूख़ेपन व बेपरवाही की वजह से बेहद गुस्सा है। राहत शिविरों में हजारों महिलाओं, पुरुषों और बच्चों को बहुत ही दयनीय हालतों में रहने के लिये मज़बूर किया गया है। खाने-पीने के प्रबंध के बिना वे वहां तरह-तरह की बीमारियों के शिकार बन रहे हैं।

18 नवम्बर को सैकड़ों महिलाओं व पुरुषों ने, जो अधिकांश रूप से वेदारण्यम के पास के आंतरिक गांवों से थे, उन्होंने चक्रवाती तूफ़ान गाज़ा के बाद राज्य के अधिकारियों की बेपरवाही के खि़लाफ़ मुख्य सड़क पर प्रदर्शन किये। नागापट्टिनम से वेदारण्यम के बीच की 50 किमी की पट्टी में प्रदर्शनकारियों ने रास्ते को कई जगह रोका। उनकी मांगों में शामिल हैं - खाने-पीने की बुनियादी व्यवस्था, बिजली व टेलीफोन सेवा को बहाल कराना और राज्य द्वारा विनाश का ठीक से मूल्यांकन तथा भरपाई करना। अपने टूटे हुए घरों के पुनर्निर्माण और अपनी जीविका को पुनस्र्थापित करने में वे राज्य की सहायता की मांग कर रहे हैं।

रिपोर्टों से पता चलता है कि वे बहुत गुस्से में हैं क्योंकि राज्य के अधिकारियों ने चक्रवात के आने से कई दिनों पहले ही आश्वासन दिया था कि उनकी ज़िन्दगी और रोज़ी-रोटी को बचाने के लिये सभी क़दम उठाये जा चुके हैं। परन्तु उन्हें जबरदस्त नुकसान हुआ है। लोगों का गुस्सा इतना ज्यादा बढ़ गया कि उजड़े हुए एक गांव के लोगों ने दौरे पर आये एक मंत्री को घेर लिया।

इस मामले में राज्य के मौसम विज्ञान और आपदा प्रबंधन विभागों ने 'आश्वासन' दिया था कि बड़े विनाश से मुक्त रहने के सारे प्रबंध कर लिये गये हैं। परन्तु जब चक्रवात आया तब सच्चाई कुछ और ही निकली। जैसा कि पहले की बाढ़ों, चक्रवातों और अन्य विपदाओं का अनुभव है, राज्य के अधिकारी प्रभावित लोगों की बुरी परिस्थिति के प्रति निर्दयी बेरुख़ी से पेश आये। अपने हाल पर छोड़े जाने पर, पीड़ित लोग साहूकारों व अन्य धोखेबाजों के शिकार बन जाते हैं जो उनकी दयनीय परिस्थिति का फ़ायदा उठा कर झटपट मुनाफ़ाखोरी करते हैं।

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी चक्रवात प्रभावित लोगों के प्रति राज्य की बेरुख़ी और निष्ठुरता की भत्र्सना करती है। वह लोगों को बुलावा देती है कि वे एकजुट हों और अपने जीवन और रोज़ी-रोटी को पुनस्र्थापित करने में राज्य अधिकारियों से सहायता पाने के अपने संघर्ष को आगे बढ़ाएं।

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पार्टी के दस्तावेज

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इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
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ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


पी.डी.एफ. डाउनलोड करनें के लिये चित्र पर क्लिक करें

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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