2018: दुनिया के मज़दूर वर्ग और लोगों के ज़ोरदार और व्यापक संघर्षों का वर्ष

बीते वर्ष के दौरान दुनिया के सभी देशों के मज़दूर वर्ग और मेहनतकश लोग अपनी रोज़ी-रोटी और अधिकारों पर बढ़ते हमलों के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शनों में बड़ी से बड़ी तादाद में सड़कों पर उतर आये हैं। जर्मनी, फ्रांस, ब्रिटेन, स्पेन, कनाडा, अमरीका और दूसरे पूंजीवादी देशों में लाखों-लाखों मज़दूरों ने बड़ी बहादुरी से हड़तालें की हैं।

मज़दूर अपने बढ़ते शोषण के ख़िलाफ़, रोज़गार की सुरक्षा के लिये, बेहतर वेतन और काम की शर्तों के लिये तथा छंटनी और नौकरियों में कटौती के ख़िलाफ़ संघर्ष करते आ रहे हैं। उन्होंने पूंजीपतियों के पक्ष में श्रम कानूनों में तब्दीली लाने की सरकारों की कोशिशों के विरोध में बड़े-बड़े प्रदर्शन किए हैं। उन्होंने मज़दूरों की बलि चढ़ाकर इजारेदार पूंजीपतियों के हितों की खुलेआम हिमायत करने वाली सरकारों के ख़िलाफ़ अपना गुस्सा जाहिर किया है। मज़दूरों ने स्वास्थ्य, शिक्षा और जन परिवहन जैसी मूल सेवाओं का निजीकरण करने और उन्हें बड़ी इजारेदार पूंजीवादी कंपनियों के हवाले कर देने के अपनी सरकारों के क़दमों का विरोध किया है। मज़दूरों ने अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा में चलाने की मांग की है, जिसमें सबकी ज़रूरतें पूरी की जाएंगी, न कि मुट्ठीभर इजारेदार पूंजीवादी कंपनियों के अत्यधिक मुनाफ़ों को सुनिश्चिति की जाएगी।

working class in world_2018

अक्तूबर, 2018 में पैरिस और फ्रांस के कई अन्य शहरों में सैकड़ों-हजारों मज़दूरों, छात्रों और सेवानिवृत्त मज़दूरों ने सड़कों पर उतरकर, सरकार द्वारा श्रम कानूनों में लाए जा रहे पूंजीपति परस्त संशोधनों व श्रम अधिकारों पर हमलों का डटकर विरोध किया। प्रदर्शनकारियों ने वेतनवृद्धि, पेंशन और निजीकरण को ख़त्म करने की मांग भी रखी। इंग्लैंड में नेशनल हेल्थ सर्विस (राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा) का निजीकरण करने की सरकार की कोशिशों के ख़िलाफ़, देशभर में स्वास्थ्यकर्मियों समेत तमाम लोगों ने कई विरोध संघर्ष किए।

राज्य द्वारा नस्लवाद और आप्रवासियों के प्रति नफ़रत फैलाने, लोगों को धर्म और समुदाय के आधार पर बांटने, आप्रवासी मज़दूरों पर हमला करके सभी मज़दूरों के अधिकारों को नकारने के प्रयासों का मज़दूर डटकर विरोध करते रहे हैं।

यूरोप और कनाडा में लोगों ने नाटो जंग-फरोश गठबंधन के ख़िलाफ़ बड़े-बड़े विरोध प्रदर्शन किए हैं। जापान में लोग सैन्यीकरण के ख़िलाफ़ आवाज़ उठा रहे हैं। कोरिया प्रायद्वीप में, यूरोप और उत्तरी अमरीका में लोग यु़द्ध और हमलों के ख़िलाफ़, निरस्त्रीकरण, शांति और राष्ट्रों के बीच मित्रता के पक्ष में संघर्ष करते रहे हैं।

गाज़ा पर इस्राइली सेना के वहशी हमलों के ख़िलाफ़ फिलिस्तीनी लोगों का दिलेर संघर्ष लगातार जारी रहा है।

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ज़ोरदार    व्यापक    संघर्षों का वर्ष    Dec 16-31 2018    Struggle for Rights    Privatisation    Rights     2018   

पार्टी के दस्तावेज

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पूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि
उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई
विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है।
इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि
लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि
पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को।
यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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