बी.एस.एन.एल. की यूनियनों द्वारा प्रस्तावित हड़ताल स्थगित

ऑल यूनियन एंड एसोसिएशन ऑफ़ बी.एस.एन.एल. (ए.यू.ए.बी.) ने बी.एस.एन.एल. मज़दूरों द्वारा 3 दिसंबर को शुरू होने वाली प्रस्तावित हड़ताल को स्थगित कर दिया। इसके बाद ए.यू.ए.बी. और सरकार के बीच, मज़दूरों की मांगों को लेकर बातचीत हुई। ए.यू.ए.बी. ने घोषणा की है कि यदि, सरकार उनकी मांगों को पूरा नहीं करेगी, तो वे 10 दिसंबर की आधी रात से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाएंगे।

अधिकारियों सहित विभिन्न श्रेणियों के लगभग 2 लाख मज़दूरों का प्रतिनिधित्व ए.यू.ए.बी. करता है। बी.एस.एन.एल. के अधिकारी और मज़दूर, सार्वजनिक क्षेत्र की दूरसंचार कंपनी को बंद करने की सरकारों की चालबाजियों के ख़िलाफ़, लंबे समय से लगातार संघर्ष करते रहे हैं।

ए.यू.ए.बी. ने बताया कि निजी दूरसंचार कंपनियों को 4जी स्पेक्ट्रम आवंटित किए जाने के चार साल बाद भी केंद्र सरकार ने बी.एस.एन.एल. को 4जी स्पेक्ट्रम आवंटित करने से इनकार कर दिया है। चूंकि बी.एस.एन.एल. 4जी सेवाएं नहीं देता है, इसलिए निजी दूरसंचार कंपनियों के साथ मुकाबला नहीं कर पा रहा है। ए.यू.ए.बी. ने सरकार पर यह आरोप लगाया है कि सरकार जानबूझकर सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी बी.एस.एन.एल. के साथ इस प्रकार का भेदभाव रही है ताकि वह इसे बंद कर सके और इसके निजीकरण को उचित ठहरा सके।

ए.यू.ए.बी. ने अपनी मांगों को लेकर 2017 में दो मुख्य हड़तालों सहित पूरे हिन्दोस्तान में कई प्रदर्शनों का आयोजन किया था। 24 फरवरी, 2018 को, दूरसंचार मंत्री ने ए.यू.ए.बी. नेताओं को आश्वासन दिया था कि उनकी ये और अन्य मांगें पूरी की जाएंगी। हालांकि, आठ महीनों तक कुछ भी नहीं करने के बाद, सरकार ने 6 नवंबर, 2018 को बी.एस.एन.एल. प्रबंधन को एक पत्र भेजा जिसमें उन्होंने मज़दूरों की मुख्य मांगों को पूरा करने से साफ़ इंकार कर दिया था। यही कारण है कि बी.एस.एन.एल. के मज़दूर इस समय अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का विचार कर रहे हैं।

सरकार द्वारा बी.एस.एन.एल. को तुरंत 4जी स्पेक्ट्रम आवंटित करने के साथ-साथ मज़दूरों के वेतन में वृद्धि तथा पेंशन संशोधन को लेकर, मज़दूर 1 जनवरी, 2017 से मांग कर रहे हैं।

बी.एस.एन.एल. मज़दूरों के संघर्ष को उस संकट के संदर्भ में देखा जाना चाहिए जिसने पूरे दूरसंचार उद्योग को घेर लिया है। एयरटेल, वोडाफोन और आइडिया जैसे बड़े निजी खिलाड़ी भारी नुकसान में चल रहे हैं। निजी दूरसंचार कंपनियों का कुल कर्ज़ 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक होने का अनुमान है। विलय और दिवालियापन रोज़ सुनने में आते हैं। वोडाफोन और आइडिया का विलय हो गया है। एयरसेल, टाटा टेली-सर्विसेज, अनिल अंबानी की रिलायंस इन्फोकॉम और टेलीनॉर जैसी छोटी निजी कंपनियां या तो बंद हो गई हैं, बंद होने या विलय की कगार पर हैं।

दूरसंचार उद्योग में इन हालातों के चलते, रिलायंस जियो सबसे बड़े खिलाड़ी के रूप में उभरा है। सितंबर 2016 में मुकेश अंबानी समूह द्वारा लॉन्च किए गए रिलायंस जिओ ने, “सस्ते दामों पर” सेवाएं पेश करके,  अपने प्रतिद्वंदियों को पूरी तरह ख़त्म कर दिया है।

रिलायंस जियो दूर संचार बाज़ार पर अपना एकाधिकार स्थापित करने की कोशिश कर रहा है, जिसके बाद यह उपभोक्तओं से अपनी सेवाओं के लिए मनचाहा दाम वसूलेगा। बी.एस.एन.एल. के मज़दूरों ने सरकार पर यह आरोप लगाया है कि सरकार, बी.एस.एन.एल. को सुनियोजित तरीके से ख़त्म करके, रिलायंस जिओ को उसके उद्देश्य पूरे करने में सहायता कर रही है। वे इस बात को सामने लाए कि पिछले तीन वर्षों में, 4जी स्पेक्ट्रम से वंचित होने के बावजूद, बी.एस.एन.एल. के सभी मज़दूरों के समर्पित काम के परिणामस्वरूप कंपनी ने मनाफ़ा कमाया है। केवल 2जी और 3जी सेवाओं को पेश करने के बावजूद उनका मोबाइल ग्राहक आधार 11 प्रतिशत से अधिक बढ़ा है।

निजीकरण को ख़त्म करने का संधर्ष तथा बी.एस.एन.एल. को ख़त्म करने के ख़िलाफ़ और उनके वेतन तथा पेंशन को बढ़ाने की मांगों को लेकर उसके मज़दूरों का संघर्ष पूरी तरह से जायज़ है।

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पार्टी के दस्तावेज

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गोष्ठी में पेश किया था।


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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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