स्टरलाइट पर नेशनल ग्रीन ट्राइब्यूनल का फैसला

15 दिसम्बर को नेशनल ग्रीन ट्राइब्यूनल (एन.जी.टी.) ने स्टरलाइट, तूतकोडि, के पक्ष में अपना फैसला सुनाया और तामिलनाडू सरकार के फैक्ट्री को मई में बंद करने के आदेश को खारिज कर दिया। एन.जी.टी. ने फैक्ट्री को बंद करना “नाजायज़“ ठहराया, यह सफाई देकर कि ऐसा कोई “वैज्ञानिक सबूत” नहीं मिला है जो दिखाता हो कि फैक्ट्री से पर्यावरण में प्रदूषण फैला है। इसके अलावा, एन.जी.टी. ने सभी सरकारी संस्थानों को आदेश दिया कि फैक्ट्री को फिर से चालू करने के लिए सभी जरूरी इजा़जतें दी जाएं और बिजली की सप्लाई बहाल की जाए ताकि एक हफ्ते के अंदर वहां कामकाज शुरू हो सके। जिला कलेक्टर को आदेश दिया गया कि वे स्टरलाइट फैक्ट्री को जरूरी रक्षा प्रदान करें, वर्ना उनके खिलाफ़ कड़ी कार्यवाही की जाएगी।

यह सवाल उठता है कि राज्य सरकार द्वारा जारी किए गए फैक्ट्री बंद करने के आदेश को रद्द करने का क्या एन.जी.टी. के पास कोई अधिकार या न्यायिक शक्ति है? एक और सवाल यह उठता है कि अदालत ने स्टरलाइट को गंदगी साफ करने के लिए 25 करोड़ रुपए जमा करने का आदेश क्यों दिया और तूतकोडि के लोगों के कल्याण के लिए तीन साल के अंदर 100 करोड रुपए जमा करने का आदेश क्यों दिया, अगर अदालत यह मानती है कि स्टरलाइट पर्यावरण में प्रदूषण नहीं फैला रहा था।

Sterlight

स्टरलाइट द्वारा तूतकोडि में प्रदूषण फैलाने के बारे में कई संस्थानों ने ठोस दस्तावेज पेश किए हैं और कई संस्थानों ने तरह-तरह के मामलों में इसके सबूत अदालत को भी पेश किए हैं। दस्तावेजों में यह बताया गया है कि स्टरलाइट फैक्ट्री ने जहरीले पदार्थों से भूमिगत जल व वायु को प्रदूषित किया है, जिसकी वजह से कई मौतें हुईं हैं, तरह-तरह की गंभीर बीमारियां फैली हैं और उस इलाके में रहने वाले लोग बड़ी संख्या में कैंसर पीड़ित हो रहे हैं। तूतकोडि के अधिकतम लोगों ने इस फैक्ट्री को हमेशा के लिए बंद कर देने की मांग की थी। वहां के निवासियों ने शुरू से तथा बीते वर्षों में बार-बार कंपनी और उसके प्रदूषणकारी कार्यों के खिलाफ़ आंदोलन किया है, परंतु सरकारी अधिकारियों ने बार-बार स्टरलाइट के पूंजीपतियों का ही पक्ष लिया है और प्रदर्शनकारी लोगों पर हमले किए हैं।

अदालतों में कंपनी के खिलाफ़ कई मामले दर्ज किए गए हैं। परंतु हर बार कंपनी अदालत से अपने पक्ष में फैसला हासिल करने में कामयाब रही है और उत्पादन करती रही है। अपने धनबल का प्रयोग करके कंपनी राज्य के सभी संस्थानों से आवश्यक इजाज़तों और आदेशों को प्राप्त कर पायी है। कार्यकारिणी, न्यायपालिका और तामिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड जैसे सरकारी संस्थानों ने स्टरलाइट के इजारेदार पूंजीपतियों की सांठगांठ में काम किया और उस कंपनी के अधिक से अधिक मुनाफे कमाने के प्रयासों का समर्थन करने के लिए सभी कायदे-कानूनों को नजरंदाज किया। अब एन.जी.टी. ने स्टरलाइट को निर्दोष घोषित कर दिया है, जबकि एन.जी.टी. खुद को पर्यावरण के प्रदूषण के खिलाफ़ पहरेदार के रूप में पेश करता है। मई में निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने वालों में से किसी एक को भी अब तक गिरफ्तार नहीं किया गया है और न ही किसी पर कोई मामला दर्ज किया गया है। प्रदर्शनकारियों पर गोली-बारी और राज्य के क्रूर हमले के बारे में कई व्यक्तियों व संगठनों ने कई मामले दर्ज किए थे परंतु किसी भी मामले में कोई प्रगति नहीं हुई है, न ही कोई फैसला सुनाया गया है। परंतु स्टरलाइट कंपनी और उसके पूंजीपतियों के पक्ष में एन.जी.टी. ने बड़ी जल्दी ही अपना आदेश जारी कर दिया है।

हिन्दोस्तानी राज्य को अपनी जनता की खुशहाली के बारे में कोई चिंता नहीं है। हिन्दोस्तानी राज्य लगातार लालची इजारेदार पूंजीपतियों द्वारा जल, जंगल, जमीन और जनता के सभी संसाधनों के निरंकुश शोषण और लूट की हिफाज़त करता रहा है। अदालत का फैसला फिर यही दिखाता है कि राज्य के संस्थान, जैसे कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, लाइसेंस अधिकारी, न्यायपालिका और सरमायदारों की राजनीतिक पार्टियां इजारेदार पूंजीपतियों के हितों के लिए काम करती हैं, जबकि “नियामक” और “रक्षक” होने का दावा करती हैं। लोग इन संस्थानों पर भरोसा नहीं कर सकते हैं।

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स्टरलाइट    नेशनल ग्रीन ट्राइब्यूनल    Jan 1-15 2019    Struggle for Rights    Popular Movements     Privatisation    Rights     2018   

पार्टी के दस्तावेज

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इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


पी.डी.एफ. डाउनलोड करनें के लिये चित्र पर क्लिक करें

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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