कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की 38वीं सालगिरह बड़े उत्साह के साथ मनाई गयी

क्रांतिकारी विकल्प के इर्द-गिर्द एकजुट होने का आह्वान

हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की 38वीं सालगिरह, जो 25 दिसम्बर को थी, दिल्ली, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और देश की कई अन्य जगहों पर तथा विदेश में टोरंटो और अन्य शहरों में मनाई गयी। “ग़दरियों की पुकार: इन्कलाब” पर आधारित एक ऑडियो-विजुअल प्रस्तुति पेश की गयी, जिसके बाद पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का भाषण उनकी ओर से पढ़ा गया।

पहले आधे घंटे के दौरान ग़दरियों और शहीद भगत सिंह समेत, ग़दरियों के रास्ते पर चलने वालों की बातें और कृतियां सभी सहभागियों के दिमागों में गूंजती रहीं। उसके बाद कामरेड लाल सिंह का आह्वान था, आज, इसी समय उसी तरह संघर्ष करने का आह्वान, जैसा कि ग़दरियों ने अपने समय में किया था। कामरेड लाल सिंह ने सभी हिन्दोस्तानी कम्युनिस्टों, सभी प्रगतिशील ज़मीर वाली महिलाओं और पुरुषों को हिन्दोस्तान के नव-निर्माण के लिये संघर्ष में एकजुट होने का बुलावा दिया।

38th Party Ann

शासक वर्ग फिर से मज़दूरों, किसानों, महिलाओं और नौजवानों के गुस्से और प्रतिरोध के साथ दांवपेच करने और उन्हें गुमराह करने की कोशिश करेंगे। इजारेदार पूंजीवादी घराने 2019 के लोक सभा चुनावों का फायदा उठाकर, फिर से लोगों को भाजपा और कांग्रेस पार्टी की आपसी दुश्मनी के अनुसार बांटने की कोशिश करेंगे। पूंजीपतियों और जमींदारों के बीच में कुछ ऐसे असंतुष्ट तबके हैं जो एक गैर-भाजपा और गैर-कांग्रेस पार्टी, संघीय मोर्चे को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं। इन हालातों में, कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी ने क्रांतिकारी विकल्प के लिए बहादुरी से आह्वान दिया है, जिसका उद्देश्य है मज़दूरों और किसानों की हुकूमत स्थापित करना और नयी बुनियाद पर हिन्दोस्तान का निर्माण करना।

हिन्दोस्तान ग़दर पार्टी की कृतियों पर प्रस्तुति और हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव के आह्वान के बाद, कई सहभागियों ने अपनी बातें रखीं। अनेक सदस्यों, समर्थकों और मित्रों ने अपने विचार रखे, अपने अनुभवों को प्रकट किये। उन्होंने अर्थव्यवस्था को एक नई मानव-केन्द्रित दिशा दिलाने और लोगों को राजनीतिक सत्ता में लाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द व्यापक राजनीतिक एकता बनाने के दौरान, कम्युनिस्टों की एकता को पुर्नस्थापित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

पार्टी की 38वीं सालगिरह को मनाने के लिए आयोजित सभी सभायें उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुईं। सभी सहभागियों ने 2019 में कम्युनिस्ट आन्दोलन और हिन्दोस्तान की मुक्ति के संघर्ष के लिए बड़ी-बड़ी जीतें हासिल करने का अपना संकल्प प्रकट किया।

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पार्टी के दस्तावेज

8 जनवरी, 2020 की सर्व हिन्द आम हड़ताल को सफल करें!

मज़दूर एकता कमेटी का आह्वान

देश की दिशा पूंजीपतियों की अमीरी को बढ़ा रही है और मज़दूर, किसान व सभी मेहनतकशों को ग़रीबी में धकेल रही है। इस रास्ते का विरोध करने के लिए और देश की दौलत पर अपने अधिकार का दावा करने के लिए यह हड़ताल आयोजित की जा रही है।

मेहनतकशों का है यह नारा, हम हैं इसके मालिक! हिन्दोस्तान हमारा!

thumbपूंजीपति वर्ग की राजनीतिक पार्टियां यह दावा करती हैं कि उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम का कोई विकल्प नहीं है। परंतु सच तो यह है कि इसका विकल्प है। इसका विकल्प है अर्थव्यवस्था को एक नयी दिशा दिलाना, ताकि लोगों की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दी जाए, न कि पूंजीपतियों की लालच को पूरा करने को। यह हिन्दोस्तान के नवनिर्माण का कार्यक्रम है।

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5th Congress Documentहिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव कामरेड लाल सिंह द्वारा, पार्टी की केन्द्रीय समिति की ओर से, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के पांचवें महाअधिवेशन को यह रिपोर्ट पेश की गई। महाअधिवेशन में इस पर चर्चा की गयी और इसे अपनाया गया। पांचवें महाअधिवेशन के फैसले के अनुसार, इस रिपोर्ट को सम्पादकीय शोधन के साथ, प्रकाशित किया जा रहा है।

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Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब, मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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