तमिलनाडु के शिक्षकों की भूख हड़ताल

तमिलनाडु के 20,000 से अधिक शिक्षक वेतन में विसंगतियों के ख़िलाफ़ चेन्नई में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। शिक्षकों ने एग्मोर के एक स्टेडियम में भूख हड़ताल में भाग लिया और सरकार को मनमाने वेतन के सुधार के लिए उनकी मांग पर ध्यान देने के लिए मजबूर किया। छठे वेतन आयोग के तहत 2009 से पहले कार्यरत शिक्षकों का मूल मासिक वेतन 8,370 रुपये है, जबकि इसके बाद से कार्यरत शिक्षकों को 5,200 रुपये मिलते हैं।

स्कूली शिक्षा मंत्री के साथ बैठक के विफल होने के बाद शिक्षकों ने 24 दिसंबर की शाम को अपनी भूख हड़ताल शुरू कर दी। उसी दिन एक हजार से अधिक शिक्षकों ने कॉलेज रोड पर स्थित लोक शिक्षण निदेशालय के पास सड़क को रोका। बाद में उन्हें पुलिस द्वारा हिरासत में ले लिया गया और उन्हें स्टेडियम में रखा गया। अगले दिन और शिक्षक उनके साथ शामिल हो गये।

राज्य सरकार ने कहा कि विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट आने के बाद ही कोई फैसला लिया जाएगा। रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए समिति की समय सीमा 7 जनवरी है। हालांकि, शिक्षकों को परिणाम पर संदेह है और उन्होंने अपनी मांगों के लिए अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर जाने का फैसला किया।

25 दिसंबर की देर शाम, प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने स्टेडियम से बाहर भेज दिया। उन्होंने लोक शिक्षण निदेशालय तक वापस मार्च किया, जहां उन्होंने भूख हड़ताल जारी रखी।

यह पहली बार नहीं है, जब ये शिक्षक वेतन की विसंगतियों को समाप्त करने की अपनी मांग के समर्थन में हड़ताल कर रहे हैं। उन्होंने अप्रैल 2018 में काम रोका था। उस समय भी उनसे यही वादे किए गए थे।

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शिक्षकों की भूख हड़ताल    Jan 16-31 2019    Struggle for Rights    Privatisation    Rights     2019   

पार्टी के दस्तावेज

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इस दस्तावेज़ “किस प्रकार की पार्टी” को, कामरेड लाल सिंह
ने हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय कमेटी की
ओर से 29-30 दिसम्बर, 1993 में हुई दूसरी राष्ट्रीय सलाहकार
गोष्ठी में पेश किया था।


पी.डी.एफ. डाउनलोड करनें के लिये चित्र पर क्लिक करें

Click to Download PDFइस पुस्तिका के प्रथम भाग में नोटबंदी के असली इरादों को समझाने तथा उनका पर्दाफाश करने के लिये, तथ्यों और गतिविधियों का विश्लेषण किया गया है। दूसरे भाग में सरकार के दावों - कि नोटबंदी से अमीर-गरीब की असमानता, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होगा - का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। तीसरे भाग में यह बताया गया है कि कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के अनुसार, इन समस्याओं का असली समाधान क्या है तथा उस समाधान को हासिल करने के लिये फौरी कार्यक्रम क्या होना चाहिये।

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यह चुनाव एक फरेब है!हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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यह बयान, ”बड़े पूँजीपतियों के लिये अच्छे दिन का मतलब मजदूर-किसान के लिये दुख-दर्द के दिन“, हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी की केन्द्रीय समिति की 31 मई, 2014 को सम्पन्न हुई परिपूर्ण सभा में हुए विचार-विमर्श और मूल्यांकन पर आधारित है।

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हिन्दोस्तान की कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के महासचिव, कामरेड लाल सिंह का,

मजदूर एकता लहर के संपादक, कामरेड चन्द्रभान के साथ साक्षात्कार

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हिन्दोस्तानी गणराज्य का नवनिर्माण करने और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दिलाने के कार्यक्रम के इर्द-गिर्द एकजुट हों ताकि सभी को सुख और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!

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